पतंगे रोशनी की तरफ़ क्यों आकर्षित होते हैं?

पतंगे प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते. वे प्रकाश की दिशा में चलते हैं या प्रकाश का सहारा लेकर उड़ते हैं, लेकिन वे यह मानकर चलते हैं कि प्रकाश का स्रोत उनसे बहुत दूर है, जैसे कि चंद्रमा. ऐसे में यदि कोई पतंगा चंद्रमा की दिशा को आधार मानकर उड़ रहा हो और चंद्रमा उसके बांई ओर हो तो वह बहुत लंबे समय तक सीधे मार्ग में उड़ता रहता है (वास्तव में इसे समझा पाना कठिन है लेकिन मूल बात यही है). लेकिन किसी बल्ब या दिए के प्रकाश को अपनी एक ओर रखकर उड़ने में वह गोल-गोल या सर्पिल पथ में घूमने लगता है क्योंकि बल्ब या दिया चंद्रमा की तिलना में उसके बहुत निकट होता है. हमें यह प्रतीत होता है कि पतंगा प्रकाश की ओर जा रहा है लेकिन वह कन्फ्यूज़ सा उड़ता रहता है और कभी-कभी प्रकाश के स्रोत के निकट पहुंचकर उसकी गर्मी से जल भी जाता है.

करोड़ों वर्षों तक पतंगे अपना जीवन प्रकृति के नियम के अनुसार जीते रहे लेकिन लगभग 100 वर्ष पहले मनुष्य ने विद्युत से जलने वाले बल्बों और लाइटों का उपयोग करना शुरु कर दिया और पतंगों को इसे समझने में कठिनाई होने लगी. उसके पहले पतंगों के लिए सूर्य और चंद्रमा के प्रकाश के अलावा प्रकृति में अपने आप लगनेवाली या मनुष्यों द्वारा जलाई जानेवाली आग ही प्रकाश का अन्य स्रोत होती थीं. उन परिस्तिथियों में भी आग से कन्फ़्यूज़ होनेवाले पतंगे आग के चारों ओर मंडराते रहते थे और आग के बुझ जाने पर अपने रास्ते चले जाते थे.

इस प्रकार प्रकृति ने पतंगों के लिए करोड़ों वर्षों के विकास के चरणों के द्वारा तैयार जो यूनीक नेविगेशन सिस्टम बनाया था वह मनुष्य की वैज्ञानिक उपलब्धियों के कारण बेकार हो गया. विकासवाद के नियम और सिद्धांत पतंगों की इस समस्या का समाधान अपनी गति पर करेंगे जिसमें हजारों-लाखों वर्ष भी लग सकते हैं.

बहुत से पतंगे और कीड़े पराबैंगनी (ultraviolet, UV) प्रकाश से भी आकर्षित होते हैं. प्रकृति में आकाश में छितरा पराबैंगनी प्रकाश उन्हें जंगलों और झाड़ियों के अंधेरे कोनों से बाहर निकलकर उस क्षेत्र में जाने में सहायता करता है जहां फूल अधिक मात्रा में खिले हों, क्योंकि अधिकांश पतंगे और कीड़े फूलों का रस चूसते हैं. पराबैंगनी प्रकाश उन्हें एक-दूसरे से मिलमिलाप कर संतानोपत्ति के लिए भी प्रेरित करता है. आपने खाने-पीने की दुकानों पर रखे पराबैंगनी ट्यूब-लैंप देखे होंगे, जिनकी रौशनी से आकर्षित होकर कीड़े उस तक पहुंचते हैं लेकिन करेंट की जाली से टकराकर जल जाते हैं. (featured image)

Advertisements

There is one comment

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.