जीवन का उद्देश्य

101 वर्षों में आपके पालतू पशु-पक्षी की मृत्यु हो जाएगी.

102 वर्षों के भीतर आप भी जीवित नहीं रहोगे.

103 वर्षों में आपके पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पर-पोते या नाती भी जीवित नहीं रहेंगे.

109 वर्षों में पृथ्वी भी मृत होगी. पृथ्वी का सारा जल भाप बनकर अंतरिक्ष में उड़ जाएगा. पृथ्वी पर शायद बैक्टीरिया और वायरस को जीवित रख सकनेवाली परिस्तिथियां भी मौजूद नहीं होंगी. चारों तरफ लावा ही लावा होगा. बड़े-बड़े पर्वत पिघलकर बहेंगे.

1010 वर्षों में सूर्य भी समाप्त हो जाएगा. गुरुत्वाकर्षण में होनेवाले परिवर्तनों के कारण सभी ग्रह या तो एक-दूसरे से टकराकर नष्ट हो जाएंगे, या सूर्य के अवशेष श्वेत वामन तारे में समा जाएंगे.

1011 वर्षों में हमारी आकाशगंगा भी मृत हो जाएगी. यह हमारी पड़ोसी मंदाकिनी देवयानी (एंड्रोमेडा) से टकराकर उसमें मर्ज हो जाएगी, जिसके परिणामस्वरूप एक नई आकाशगंगा मिल्कड्रोमेडा बनेगी. एंड्रोमेडा हमारी तरफ 110km/sec की गति से आ रही है. अभी इसे आने में अरबों साल लगेंगे लेकिन अंततः मिल्कड्रोमेडा भी विराट ब्लैक होल बनकर मर जाएगी.

1015 वर्ष बाद सभी तारे मर चुके होंगे. ब्रह्मांड में नए तारों को जन्म देने के लिए पर्याप्त पदार्थ उपलब्ध नहीं होगा. अंतरिक्ष घुप्प अंधेरा काला हो जाएगा.

1030 वर्षों में सारा पदार्थ नष्ट हो जाएगा.

10100 वर्षों में अंतरिक्ष के सारे ब्लैक होल्स भी मर जाएंगे.

ब्रह्मांड में दूर-दूर तक कहीं कुछ भी नहीं होगा. यह अथाह खाली, अंधकारपूर्ण और बेहद ठंडा होगा.


इतनी दूर की और दिल को घबरा देने वाली बातें बताने के पीछे का मकसद यह है कि आप अपनी ज़िंदगी के बारे में दो तरह से सोच सकते हैं. यह सच है कि आप आप एक लंबी टाइम-स्केल पर सोचेंगे तो पाएंगे कि जीवन में किसी बात का कोई महत्व नहीं है, किसी बात से कोई फर्क नहीं पड़ता.  आपके बैंक अकाउंट में कुछ सौ रूपए पड़े हों या कुछ करोड़, अब से बहुत-बहुत-बहुत समय बाद अथाह खालीपन और अंधेरा हमारा इंतज़ार कर रहा है.

इसपर सोचने का दूसरा तरीका यह है कि हम यह समझें कि हम सभी एक दूसरे से अंजान अणु-परमाणुओं के गुच्छे हैं जो अंतरिक्ष के किसी कोने पर यह सब सोचविचार कर रहे हैं. हमारी सांसें चल रही हैं जो हमारे जीवित होने का प्रमाण है. यदि हमें जीवन मिला है तो इसका कोई-न-कोई उद्देश्य ज़रूर होना चाहिए. हम भले ही उसे जान न पाएं लेकिन ज़िंदगी का कोई परपज़ ज़रूर होता है, होना ही चाहिए.

आप लोक-परलोक, जन्म-मरण-पुनर्जन्म की बातों को मानें या न मानें, यह तो आप मानेंगे ही कि जीवन… या यह जीवन हमें एक बार ही मिला है. हमें चाहिए कि हम इसे पूरी तरह से जिएं. इसे पूरी तरह से जीने का अर्थ अपनी मनमर्जी से जीना नहीं है. यह जीवन हमारे और दूसरे मनुष्यों के लिए उपयोगी और सार्थक सिद्ध हो. इसी में जीवन का सार है.

Life is a onetime opportunity, make sure you live up to your full potential. Make it a purposeful life.

Have a good day.


(feature image courtesy) Based on a Quora answer by Shams Ur Rahman.

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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