हम मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को अधिक सक्रिय कैसे कर सकते हैं?

हमारे मस्तिष्क या दिमाग के दोनों तरफ के भाग अलग-अलग तरह के काम करने के लिए विकसित हुए हैं. दांए भाग का संबंध विज़ुअल्स या किसी भी बात के बड़े परिदृश्य से है और इस भाग में रचनात्मकता या क्रिएटिविटी अधिक मात्रा में सृजित होती है. इसके विपरीत बांए भाग में गणितीय, तार्किक, और तथ्यों/आंकड़ों को विस्तार से परखने की क्षमता अधिक होती है. अधिकांश व्यक्तियों के मस्तिष्क का कोई एक भाग अधिक प्रभावी या सक्रिय होता है और इसी के परिणामस्वरूप वे अपने कैरियर या जीवन में कामकाज का चुनाव करते हैं.

मस्तिष्क अपनी पूरी क्षमता से तब काम कर सकता है जब इसके दोनों भाग सक्रिय रहें और एक-दूसरे के साथ मिलकर सीखें और गतिविधियां करें. जब दोनों भाग सक्रिय होते हैं तो उनके बीच में तंत्रिका संपर्क मजबूती से स्थापित होता है और वे भविष्य में और अधिक अच्छे से काम करते हैं.

आप इन गतिविधियों या अभ्यास को करके अपने मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को अधिक प्रभावी बना सकते हैं.

1. विज़ुएलाइज़ करने के साथ-साथ किसी गतिविधि को भौतिक रूप से भी करना – विज़ुएलाइजेशन का अर्थ है अपने मस्तिष्क में किसी बात के होने या करने की कल्पना करना. यह हमारे मस्तिष्क के दांए भाग का कार्य है. यदि हम केवल विज़ुएलाइज़ ही करते रहेंगे तो मस्तिष्क का बांया भाग खाली बैठा रहेगा. दोनों भागों को सक्रिय करने के लिए हमें विज़ुएलाइज़ करने के साथ-साथ ही उस गतिविधि को अपने हाथों से करने का प्रयास करना चाहिए. आप अपने मस्तिष्क को आखिरी सीमा तक किसी बात को विज़ुएलाइज़ करने दें, फिर उस कार्य को चरणबद्ध रूप से करते हुए उस काम को पूरा करें. इसमें आपके मस्तिष्क का बांया भाग सक्रिय बना रहेगा.

2. इंडोर गेम्स – कुछ बोर्ड-गेम्स हमारे मस्तिष्क के दोनों भागों को सक्रिय बनाए रखते हैं क्योंकि उन्हें खेलते वक्त हमें गेम पर पूरे समय नज़र भी बनाए रखनी पड़ती है और रणनीति भी बनानी पड़ती है. शतरंज और चेकर्स इस प्रकार के गेम्स के सबसे अच्छे उदाहरण हैं. शतरंज खेलते वक्त आप आगे चली जानेवाली अनेक संभावित चालों की रूपरेखा अपने मस्तिष्क में बनाते हैं और उनकी काट या विकल्प खोजने के लिए गहराई से सोचते भी रहते हैं. जिगसॉ पज़ल्स (Jigsaw puzzles) को हल करने से भी लाभ मिलता है.

3. किसी वाद्ययंत्र को बजाना सीखना – संगीत संबंधित गतिविधियो को मस्तिष्क का दांया भाग प्रमुखता से डील करता है. लेकिन किसी वाद्ययंत्र को बजाते वक्त हमारे हाथ और उंगलियां चलती हैं जिनपर मस्तिष्क का बांया भाग प्रभावी होता है. इस प्रकार किसी म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट को बजाना सीखने से मस्तिष्क के दोनों भाग सक्रिय होते हैं.

4. अपने माहौल में मस्तिष्क के दोनों भागों को सक्रिय करनेवाले अवयव शामिल करना – यदि आपका कामकाज मुख्यतः मस्तिष्क के बांए भाग (अकाउंटिंग, रिपोर्टिंग, कानूनी अध्ययन, आदि) से संबंधित है तो आप अपने परिवेश में कला और संगीत से संबंधित चीजें जोड़िए और उन्हें करने का प्रयास कीजिए. खाली समय मिलने पर आप ड्राइंग करके देख सकते हैं या गिटार बजा सकते हैं. मस्तिष्क के दांए भाग की प्रमुखता वाले व्यक्ति गणित या पहेलियां हल करके यही कार्य कर सकते हैं. रुबिक्स क्यूब को हल करना प्रारंभ में बहुत अधिक परिश्रम मांगता है लेकिन इससे दिमाग की अच्छी-खासी कसरत हो जाती है.

5. जगलिंग करना सीखिए – जगलिंग में दो या तीन या अधिक चीजों जैसे प्लास्टिक की गेंद आदि को हवा में उछालकर पकड़ने की कोशिश की जाती है. यह करने के लिए आंखों से हाथों के समन्वय को सुधारने की ज़रूरत होती है और यह एक्टीविटी दिमाग के दोनों हिस्सों को सक्षम बनाती है.

6. रंगीन पेन्स के साथ अभ्यास करना – कुछ अलग-अलग रंग के स्केच पेन लीजिए और उनसे एक रंग का नाम लिखिए, लेकिन यह ध्यान रखें कि आपको पेन के रंग का नहीं बल्कि किसी दूसरे रंग का नाम लिखना है. अब पेनों को एक ओर रखकर शब्दों को देखें लेकिन उस पेन के रंग को कहें जिससे वह शब्द लिखा था. आपके मस्तिष्क का दांया हिस्सा रंग देखता है लेकिन बांया हिस्सा उस पेन को याद करता है जिससे आपने वह शब्द लिखा था.

7. किसी दिन अपने दूसरे हाथ से काम करके देखिए – दूसरे हाथ से मेरा मतलब उस हाथ से है जिसका आप कम उपयोग करते हैं. अर्थात यदि आप राइट-हैंडेड हैं तो एक दिन लेफ़्ट-हैंडेड बनकर देखिए. इससे मस्तिष्क के एक भाग के कार्य करने की प्रवृत्ति को सामंजस्य करने का मौका मिलेगा.

8. प्रोजेक्ट बनाने के लिए माइंड-मैपिंग करिए – माइंड-मैप में हम किसी स्कीम या प्रोजेक्ट के सारे फंडामेंटल्स को विज़ुएलाइज़ करके दिखाते हैं. अंग्रेजी का एक अच्छा शब्द है ‘brainstorming’. माइंड मैप बनाने से मस्तिष्क की ब्रेनसटॉर्मिंग करने की क्षमता बढ़ती है और आप किसी भी मामले पर अलग-अलग कोणों से सोचने लगते हैं. माइंड-मैप बनाने से आप चीजों को एक-दूसरे से संबंधित करके दिखा सकते हैं. माइंड-मैप बनाने का अर्थ केवल सोचना ही नहीं है. आप कागज पर रंगबिरंगी ड्राइंग करके खूबसूरत मैप भी बना सकते हैं, जिसमें वस्तुओं और विचारों को एक-दूसरे से कनेक्ट करके दिखाया जा सकता है. माइंड मैप बनाने से मस्तिष्क का दांया भाग स्टीमुलेट होता है और अलग तरह से सोचने की क्षमता बढ़ती है. आसानी से माइंड-मैप बनाने के लिए कागज के केंद्र में सबसे ज़रूरी पॉइंट लिखिए फिर उससे शाखाएं निकालते हुए वर्गीकरण को बढ़ाते जाइए, जो कि मस्तिष्क के बांए भाग की गतिविधि है. माइंड-मैप्स बनाने के लिए अब बहुत से फ़्री और प्रीमियम एप्स भी आ गए हैं.

9. मस्तिष्क को और अधिक क्षमतावान और उर्वर बनाने के लिए एप्स को उपयोग कीजिए –  मैं Elevate नामक एक एप्प की प्रीमियम सर्विस का उपयोग करता हूं. मैं मूलतः एकादमिक प्रकार का विद्यार्थी था जिसकी रूचि मुख्यतः साहित्य और कला में थी. मैंने कभी भी गणित और भौतिकी के जटिल विचारों या संकल्पनाओं पर मनन नहीं किया. धीरे-धीरे मुझे लगने लगा कि मुझे अपने मस्तिष्क को शार्प बनाए रखने के लिए दिमागी कसरत भी करनी चाहिए. एलीवेट जैसे बहुत से एप्स हैं जो हमें यह करने का मौका देते हैं. ये आपकी भाषाशैली से लेकर गणित तक को सुधारने वाली पहेलियों और प्रश्नों के ज़रिए दिमाग के हर हिस्से को झकझोरते हैं. इनमें तरह-तरह के गेम्स भी होते हैं. इनकी फ़्री सर्विस भी बहुत अच्छी है.

10. गणित की समस्याओं को अलग-अलग विधियों से हल करके देखिए – एल्जेब्रा के समीकरणों को हल करना मस्तिष्क का बांये भाग का काम है. उन समीकरणों को चित्र बनाकर हल करने से यह मस्तिष्क के दांए भाग का काम बन जाता है. खरीद-बिक्री, अनुपात, प्रतिशत, दर-लागत, और समय से संबंधित प्रश्न भी इसी तरह से हल करके देखे जा सकते हैं.

मस्तिष्क के दोनों हिस्सों के बीच जितना अधिक संबंध और समन्वय स्थापित होगा, आपकी समस्याओं को हल करने की और क्रिएटिव तरीके से काम करने की क्षमता उतनी ही बढ़ती जाएगी. यह हमेशा याद रखें कि आप हर समय अपने मस्तिष्क की पूरी क्षमता से ही काम करते हैं. कोई भी व्यक्ति अपने मस्तिष्क का केवल 10% या 20%  उपयोग नहीं करता. हम अपने मस्तिष्क को जितना सिखाते हैं यह उतना ही सीखता जाता है. सीखने की हर व्यक्ति की क्षमता बहुत से कारणों पर निर्भर करती है लेकिन उसमें हमेशा ही सुधार किया जा सकता है. (featured image)

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