ये तीन छोटी-छोटी बातें आपके कामकाज को बेहतर बना सकती हैं

यहां मैं आपको तीन ऐसे छोटे-छोटे काम बता रहा हूं जिन्हें आप पांच मिनट से भी कम समय में कर सकते हैं. यदि आप इन कामों को करने की आदत डाल लेंगे तो आपके जीवन में बहुत सकारात्मक बदलाव आएगा. इन तीन कामों में सबसे महत्वपूर्ण काम है:

1. अपनी डेस्क साफ़ रखेंः कुछ लोग कहेंगे कि डेस्क साफ़ रखने भर से ही आपका काम सुधरने नहीं लगता लेकिन यह गतिविधि आपके दिमाग को संदेश देती है कि आपको स्वयं को बेहतर तरीके से ऑर्गेनाइज करना है और ऊर्जावान बने रहना है. अपनी डेस्क अस्त-व्यस्त रखने से तनाव और झुंझलाहट बढ़ती है, जिसका परिणाम वर्क परफॉर्मेंस पर पड़ता है. करोड़ों डॉलर का व्यवसाय करनेवाली एक कंपनी के CEO ने मुझे बताया था कि यह उसकी सबसे अच्छी प्रोफ़ेशनल एड्वाइस है.

2. अपना डेस्कटॉप व्यवस्थित रखेंः यदि आपके कंप्यूटर के डेस्कटॉप पर अनगिनत वर्ड डॉक्यूमेंट, पॉवरपाइंट प्रेज़ेंटेशन और एक्सेल वर्कशीट वगैरह का अंबार लगा है तो उन्हें सबसे पहले तीन-चार फोल्डरों में स्टोर कर लें. इसके बाद जो फाइलें काम की नहीं हैं उन्हें डिलीट कर दें. सिर्फ काम की फाइलें स्टोर करके रखने से उन्हें ढूंढने में वक्त बर्बाद नहीं होता. हर फाइल को यूनीक नाम देने की आदत डाल लेने से कुछ खोजते समय कई फाइलें खोलकर देखनी नहीं पड़तीं. इसी के साथ ही दिन भर में आधा या एक घंटा ज़रूरी ई-मेल्स का जवाब देने के लिए तय कर लेना चाहिए. आपके कामकाज की जगह का वातावरण बिल्कुल प्रोफेशनल लगना चाहिए और यह दिखना चाहिए कि आप हर चीज को अपने नियंत्रण में रखते हैं.

3. काम शुरु करने के पहले एक ग्लास ठंडा पानी पीनाः कुछ लोगों को काम शुरु करने के पहले एक कप चाय या कॉफ़ी पीने की आदत होती है. लंबे समय तक ऐसा करते रहने से चाय-कॉफ़ी के दुष्परिणाम (जैसे एसिडिटी और तलब लगना) दिखने लगते हैं. काम शुरु करने के पहले एक ग्लास ठंडा पानी पीने से आप तरोताजा महसूस करेंगे. ठंडा पानी हमारे शरीर के मेटाबोलिज़्म पर बहुत अच्छा प्रभाव डालता है. हमारा बॉडी ठंडे पानी को खुद के तापमान तक गर्म करने के लिए चर्बी को गलाती है. यह ध्यान रखिए कि पानी ठंडा हो लेकिन बर्फ़ीला न हो क्योंकि आइस चिल्ड पानी पीने से दांतों और गले को नुकसान पहुंचता है.

इन्हें करके देखिए. आपको बहुत लाभ होगा. Image credit

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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