हर दिन किसी एक व्यक्ति को प्रभावित कीजिए

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यदि आप दिन में सिर्फ़ एक व्यक्ति को भी अपना कोई प्रोडक्ट जैसे आपकी किताब या ब्लॉग या कविता-कहानी या ब्लॉग पोस्ट या कोई आइडिया पसंद करवा सकें या उससे आपकी पोस्ट शेयर करवा सकें तो साल के अंत में आपके पास ऐसे 365 फॉलोवर्स होंगे जो आपको आपके काम को सपोर्ट करते हों.

मैं इस मामले में भाग्यशाली रहा हूं. सोशल मीडिया पर सक्रिय मेरे मित्र जानते हैं कि आठ वर्षों में मैंने कभी भी किसी को भी मेरे ब्लॉग्स की पोस्ट पढ़ने के लिए आमंत्रित नहीं किया, कभी किसी को अपना पेज लाइक करने के लिए नहीं कहा, किसी की भी मेल आईडी सब्सक्रिप्शन बॉक्स में नहीं जोड़ी. आज हिंदीज़ेन पर इस जैसे ही नए ब्लॉग्स की तुलना में बहुत कम सब्सक्राइबर या फॉलोवर्स हैं लेकिन जो भी हैं वे जेनुइन हैं. उन सभी ने वाकई प्रभावित होकर इससे जुड़ना सही समझा. फिलहाल हिंदीज़ेन को लाइक या सब्सक्राइब करनेवालों की संख्या जितनी है वह ऊपर कही गई प्रतिदिन एक व्यक्ति वाली बात का समर्थन कर रही है.

आपको लग रहा होगा कि प्रतिदिन केवल एक व्यक्ति को प्रभावित करने पर होनेवाली ग्रोथ बहुत कम होनी चाहिए. लेकिन यदि आप प्रतिदिन केवल एक व्यक्ति को ही अपना टारगेट मानकर उसे प्रभावित करने के लिए मूल्यपरक पोस्ट लिखेंगे तो साल के अंत में आपके पास शायद 365 से भी अधिक सपोर्टर्स होंगे.

आपके 365 सच्चे फैन्स आपकी बातों को ईमानदारी से फैलाएंगे. वे आपकी किताब का रिव्यू लिखेंगे – न लिख सकें तो लोगों को बताएंगे कि उन्हें वह किताब अच्छी लगी (वे आपके फैन जो ठहरे). आप चाहे फ़ोटोग्राफ़र हों या कवि हों या ब्लॉगर… वे आपके प्रोडक्ट (चित्र, फोटो, कविता, पोस्ट) का बिना किसी मेहनताने या रिवार्ड के निःस्वार्थ प्रचार-प्रसार करेंगे. वे अपने परिवार, मित्रमंडली और सोशल सर्किल में आपके प्रोडक्ट के बारे में बताएंगे. उनके दोस्त भी आपके सच्चे फ़ैन्स बन सकते हैं… फिर उनके दोस्त…

लेकिन सिर्फ एक व्यक्ति को प्रभावित करने के उद्देश्य के लिए भी बहुत काम करना पड़ता है, बल्कि जितनी मेहनत की ज़रूरत एक लाख लोगों को प्रभावित करने के लिए चाहिए उतनी ही मेहनत सिर्फ़ एक व्यक्ति को प्रभावित करने के लिए करनी पड़ेगी. जो लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं वे इसे आसानी से समझ जाएंगे.

मैंने अपने ब्लॉग पर इन्सपिरेशन और मोटीवेशन के क्षेत्र में काम कर रहे टॉप ब्लॉगर्स के बहुत से लेख अनुवाद करके पोस्ट किए, हालांकि ज्यादातर लेखों में मैंने अपने विचारों और ओपीनियन्स का समावेश भी किया. इन लेखों को पोस्ट करने की अनुमति मांगने पर मुझे हमेशा ही एक दिन के भीतर ई-मेल या ट्विटर मैसेज के ज़रिए सकारात्मक उत्तर मिला है. हर बार ऐसा उत्तर मिलने पर मैं खुद को लकी मानता था कि अपनी फ़ील्ड के किसी टॉप अचीवर ने मुझे ई-मेल या ट्वीट करने की ज़हमत उठाई, मेरी परवाह की. लेकिन ज्यादातर मामलों में मैंने यह पाया कि ये प्रसिद्ध लेखक और ब्लॉगर सिर्फ मुझे ही नहीं बल्कि उनसे संपर्क करने या उनकी पोस्ट/ट्वीट पर कमेट करनेवालों सभी व्यक्तियों की बातों का यथासंभव उत्तर दे रहे थे. आप समझ सकते हैं कि यह कितना बड़ा काम है. आप किसी आटोमैटिक सर्विस का उपयोग करके लोगों को एक “थैंक यू” मैसेज भेज सकते हैं लेकिन हर व्यक्ति की बात का उत्तर देने के लिए बहुत ज्यादा एनर्जी चाहिए. इतना तो मैं भी नहीं कर पाता जिसकी पोस्टों पर इक्का-दुक्का कमेंट ही आते हैं.

ऊपर मैंने जिन ब्लॉगरों की बात की है वे अपने सच्चे फ़ैन्स तैयार कर रहे हैं. वे खुद को इन्फ्लुएंसर के रूप में स्थापित करने में सफल हो रहे हैं.

कई साल पहले मुझे वर्डप्रेस.कॉम पर ब्लॉगिंग में कुछ कठिनाई आ रही थी, जिसके समाधान के लिए मैंने वर्डप्रेस के स्टाफ़ को मेल लिखी. आश्चर्यजनक रूप से मुझे मैट मूलेनवेग (Matt Mullenweg) की मेल मिली जिसमें मेरी समस्या के समाधान के लिए आश्वासन दिया गया था. मैट ने ही वर्डप्रेस को बनाया है, यह बात मैं उन दिनों नहीं जानता था. बहुत बाद में मुझे उनकी हस्ती और शोहरत का पता चला. काश मैंने वह मेल संजो कर रखी होती.

उस दिन मैट ने मुझे उसका सबसे बड़ा फ़ैन बना लिया.

दिन में केवल एक व्यक्ति को अपना फ़ैन बनाने की बजाय यदि आप एक ही क्लिक से सैंकड़ों-लाखों लोगों को अपना मुरीद बनाने की कोशिश करेंगे तो क्या होगा? आपका मैसेज सही व्यक्तियों तक पहुंचना बंद हो जाएगा. आप लोगों से पर्सनली कनेक्ट करना बंद कर देंगे. आप आटो रिप्लाई सर्विस का इस्तेमाल करने लगेंगे. आप अपने सच्चे फ़ैन्स बनाना बंद कर देंगे. दूसरों की देखादेखी आपको लाइक करनेवालों की भीड़ आप जुटा लेंगे, साइडबार के फेसबुक लाइकबॉक्स में आपको या आपके कंटेंट को लाइक करनेवालों की संख्या हज़ारों मे दिखेगी लेकिन असलियत में उनमें से बहुत कम लोग ही आपको या आपके काम के बारे में जानते होंगे.

“एक दिन – एक व्यक्ति” : इस सूत्र को ध्यान में रखकर काम करिए. अपने सच्चे फ़ैन्स बनाइए. और जो फ़ैन्स सच्चे हों उनकी उम्मीदों पर खरा उतरिए, उन्हें नाराज़ मत कीजिए. SRK बनने का जोखिम मत उठाइए 😉

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 9 comments

  1. C P Gupta

    दादी की प्रसादी Dadi Ki Prasadi

    उदारस्य तृणं वित्तं शूरस्य मरणं तृणं।
    विरक्तस्य तृणं भार्या निस्पृहस्य तृणं जगत्।।
    ( उदार मनुष्य के लिये धन का महत्व तिनके बराबर होता है, शूरवीर मनुष्य के लिये मौत तिनके के बराबर तुच्छ होती है. जिसको संसार में रुचि नहीं होती उसको पत्नि का कोई मूल्य नहीं होता है, तथा निस्पृही मनुष्य के लिये सारा संसार तिनके के समान बेकार लगता है.)
    -અધૂરા સ્વપ્ન પેઠે ક્યાં થયું પ્રગટીકરણ ?
    હશે કો અર્ધબીડી આંખડી કાજે સ્મરણ મારુ !
    –     Customers are not hard to please.

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