41 साल – 41 सबक : 41 Life Lessons

हैप्पी बर्थडे टु मी, फ़्रेंड्स! जैसा कि आप पोस्ट के टाइटल को पढ़कर ही समझ सकते हैं, मैं आज ही 41 साल का हो गया हूं, आज मेरा जन्म दिन है. इसी ब्लॉग पर मैंने कुछ साल पहले अपने जन्मदिन के दिन एक पोस्ट लिखी थी, और यह संकल्प लिया था कि हर साल वैसी ही पोस्ट लिखा करूंगा, लेकिन मनुष्य अपने लिए संकल्पों के दस प्रतिशत पर ही क्रियान्वयन कर ले तो बहुत बड़ी बात होगी… खैर…

मुझे वह दिन याद है जब मैं 30 साल का हुआ था. तब मेरी पक्की नौकरी लगे ज्यादा अरसा नहीं हुआ था और शादी भी कुछ महीने पहले हुई थी. 30 साल का होने को लेकर मेरे विचार बहुत रोमानी थे. ज़िंदगी में सब फर्स्ट-क्लास चल रहा था. प्रचलित मुहावरे में मैं सेटल हो गया था. फ़ैमिली बड़ी हो रही थी. अब 11 साल बाद ये बातें इतनी नयी सी लगती हैं जैसे कल ही की बात हो.

40 पार कर जाना मिडलाइफ़ की शुरुआत माना जाता है. यह जीवन का वो दौर है जब आप चीज़ों को अपने अनुभव के दम पर आंकने के योग्य हो जाते हैं. 40 पार कर चुके लोगों से यह उम्मीद की जाती है कि वे खिलंदड़पन न करें. मैं अपने ही अनुभव से यह जानता हूं कि मुझमें थिरता आ गई है और उम्र के बढ़ते हुए साल मुझे ईश्वर के उपहार की तरह प्रतीत होने लगे हैं. मैं खुशनसीब हूं कि मुझे बढ़ती उम्र के दुष्परिणामों का सामना नहीं करना पड़ रहा है. मैं स्वस्थ हूं, सानंद हूं. मैं अपने हर दिन को समग्रता से जीता हूं.

आज मेरे मन में कुछ बेतरतीब से ख़याल आ रहे हैं. अपनी बीती हुई ज़िंदगी को जब मैं पलटकर देखता हूं तो पाता हूं कि मैंने जीवन से बहुत कुछ सीखा है. अपने उन्हीं विचारों को मैं आपसे शेयर करना चाहता हूं. ये विचार बहुत रैंडम हैं, बेतरतीबी मेरे स्वभाव में है, इसलिए हो सकता है मैं किसी ज़्यादा गहरी बात को पीछे धकेल दूं. ये हैं मेरे 41 Life Lessons … ज़िंदगी के सिखाए सबकः

1. जो मिला है उसके लिए शुक्रगुज़ार रहिए –

मैं बचपन और किशोरावस्था में बहुत बिगड़ैल था. मुझे या तो सब कुछ चाहिए होता था कुछ भी नहीं. मुझमें सही-ग़लत की समझ नहीं थी. कॉलेज एजुकेशन समाप्त होने के बाद जब मेरे सामने “क्या करें” का सवाल आकर खड़ा हो गया तब मेरी ज़िंदगी में एक नया मोड़ आया. युवावस्था में मुझमें यह देखने की समझ विकसित हुई कि मेरे पास बहुत कुछ था जिससे मेरे साथ के बहुत लोग वंचित थे. मेरे परिजनों, मित्रों, शिक्षकों और मेरी ज़िंदगी ने मुझे इतना कुछ दिया जिसके लिए मुझे कोटि-कोटि आभारी होना चाहिए था, बहुत पहले ही होना चाहिए था, लेकिन मैंने देर कर दी थी.

आपको तुम्हें भी चाहिए कि तुम्हारे जीवन में जो कुछ भी अच्छा है, जो कुछ भी बेहतर है उसकी पहचान करें और उसके लिए आभारी रहें. जो आपके पास नहीं है उसे पाने का प्रयास करें लेकिन जो है उसे संजो कर रखें.

2. हर दिन एक बेहतर शख्स बनने की कोशिश करते रहिए –

बाबा रामदेव की लोग कई मामलों में आलोचना करते हैं लेकिन एक बात है जिसे रामदेव बार-बार कहते हैं और बिल्कुल सही कहते हैं, और वो यह है कि… करने से होता है. मैं अपनी बात करता हूं – वर्ष 2000 में जिसे एक ई-मेल भेजना बहुत कठिन काम लगता था वह आज बिना किसी कोडिंग की जानकारी के कई ब्लॉग्स सफलतापूर्वक चला रहा है और रोज़मर्रा में आनेवाली मुश्किलों का हल बिना किसी परेशानी के निकाल लेता है.

हर नया दिन आपके सामने कुछ नया सीखने, करने और बनने के असंख्य मौके लेकर आता है. हर नए दिन में आप अपनी पिछली गलतियों के लिए शर्मिंदा हो सकते हो और उनसे सबक लेकर आगे बढ़ सकते हो. आप कर सकते हो क्योंकि… करने से होता है. यह बात हमेशा याद रखिए कि प्रयास करने पर हो सकता है कि आप असफल हो जाएं लेकिन यदि कोशिशें नहीं करेंगे तो 100 प्रतिशत असफल हो रहेंगे.

3. अपने अहंकार से छुटकारा पाइए –

हम सभी अपने ईगो का शिकार बनकर बहुत से मामलों में पीछे रह जाते हैं. हमें कुछ सीखना होता है लेकिन हमारी आत्म-गरुता उसके आड़े आ जाती है. अपनी उपलब्धियों पर गर्व होना और आत्मविश्वास होना पॉज़िटिव चीज़ है लेकिन अहंकार हमारी प्रगति में बाधक है. अहंकार वास्तव में हमारे डिफ़ेंस मैकेनिज़्म का तरीका है. यह हमें ठुकराए जाने और असफल होने से तो बचाता है लेकिन हमारी ज़िंदगी में कुछ जोड़ता नहीं है. मनुष्य दूसरों से तभी प्रेरित हो सकता है जब उसमें विनम्रता हो. किसी को कुछ सिखाने के संबंध में भी यह सही है. जिस व्यक्ति में अहंकार नहीं है वह खुद से ही आगे बढ़कर दूसरों की सहायता कर सकता है.

जिस व्यक्ति का अहंकार प्रबल न हो वह आलोचना को सकारात्मकता से लेता है. सच कहूं तो मैं भी हर कटाक्ष व आलोचना को सकारात्मकता से नहीं ले पाता लेकिन मैं यह सीख रहा हूं. आप भी सीखिए… अभी उम्र पड़ी है.

4. अपने भोजन की जांच-परख करते रहिए –

महानगरीय जीवनशैली का शिकार होकर मैं अपने खान-पान की आदतों को बिगाड़ बैठा. इसका बड़ा ख़ामियाज़ा मुझे इसी वर्ष फरवरी में भुगतना पड़ा जब मुझे दो सप्ताह से भी ज्यादा समय तक बुखार बना रहा. बुखार के कारण कुछ और रहे होंगे लेकिन समय-असमय कैसा भी खानपान करने की बुरी आदत का प्रभाव मेरे शरीर पर दो-तीन सालों से ही दिखने लगा था. गले का बार-बार खराब होना और पेट की गड़बड़ियां जैसे एसिडिटी से मेरी ओवरआल हैल्थ बिगड़ रही थी.

हाल ही में मैंने अपने खानपान में व्यापक सुधार किया है और उन पदार्थों की पहचान कर ली है जो मुझे नुकसान पहुंचाते हैं. मैं चाय-कॉफ़ी से परहेज़ करने लगा हूं और सोडा ड्रिंक्स पूरी तरह से अवॉइड करता हूं. मैं मानता हूं कि खानपान का विषय बहुत निजी होता है और आप किसी की भी सलाह आंख मूंद कर नहीं मान सकते. यदि आप अपने स्वास्थ्य को संजोए रखना चाहते हैं तो अपने भोजन की परख करते रहिए और इस दिशा में अपनी जानकारी बढ़ाइए. वॉट्सएप के ज़रिए फैलाई जानेवाली हैल्थ-टिप्स को भी प्रामाणिक स्रोतों से जांच लेने के बाद ही व्यवहार में लाइए.

5. अपने शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखिए –

मैं लगभग 15 घंटे कुर्सी पर बैठता हूं. छुट्टियों के दिन भी मेरा लगभग पूरा दिन कंप्यूटर टेबल पर बीत जाता है. शरीर के हर जोड़ और मांसपेशी को चलायमान रखने के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि रोज़ थोड़ी एक्सरसाइज़ की जाए. बैठे-बैठे शरीर कई तरह के दर्द और अकड़न का शिकार हो जाता है. मैं बहुत ज्यादा काम करता हूं और एक्सरसाइज़ के लिए समय नहीं निकाल पाता क्योंकि एक थके हुए शरीर और दिमाग को पर्याप्त नींद की ज़रूरत होती है.

ऐसे में मैं अपने काम के दौरान ही छोटे-छोटे ब्रेक लेकर आसपास चहलकदमी कर लेता हूं. रोज़ाना किसी-न-किसी काम के बहाने अपने ऑफ़िस से थोड़ी दूर पैदल चलता हूं और कभी भी लिफ़्ट का उपयोग नहीं करता. मैं जानता हूं कि इतना करना ही पर्याप्त नहीं है. मैं अपने फ़िटनेस गोल से दरअसल बहुत पीछे हूं और कोशिश कर रहा हूं कि अपनी एक्सरसाइज़ का स्कोर बढ़ा सकूं. मेरा मानना है कि घर के पास ही कई छोटे-मोटे काम करने के लिए कार या बाइक से चल देना खराब पॉलिसी है इसलिए मैंने साइकल खरीदना का भी निश्चय किया है. यदि आप व्यस्तता के कारण एक्सरसाइज़ के लिए टाइम नहीं निकाल पा रहे हों तो साइकल में निवेश करना आपके लिए भी सही रहेगा.

6. अपने लक्ष्य निर्धारित करिए –

मैंने अपने लक्ष्य कभी लिखकर नहीं रखे हालांकि मुझे ऐसा करना चाहिए था. मेरे साथ सबसे बुरी बात तो यह थी कि बहुत लंबे समय तक मेरे लक्ष्य स्पष्ट ही नहीं थे. मुझे इस बात का ज्ञान नहीं था कि मुझे क्या करना है और कैसे करना है. आज मेरे सामने जो लक्ष्य हैं उन्हें यदि मैंने 20 साल पहले निर्धारित किया होता तो मैं बहुत दूर तक जा चुका होता, लेकिन ये एक हाइपोथेटिकल बात है.

मैंने अपनी ऑनलाइन प्रेजेंस को लेकर जो लक्ष्य कुछ समय पहले बनाए थे उनका परिणाम मुझे अब दिखने लगा है. तय किए गए समय के भीतर अपने गोल्स को अचीव कर लेने से बेहतर मोटीवेशन कुछ नहीं हो सकता. अपने लिए लक्ष्य निर्धारित करना मेरे लिए एक विज़ुलाइजेशन एक्सरसाइज़ है जो हमेशा काम करती है. मुझे इसके लिए किसी तरह के फ़्लो-डाइग्राम या माइंड मैप्स बनाने की ज़रूरत नहीं है. मैं कुछ करने के बारे में सोचता हूं और उसमें अपनी पूरी ऊर्जा लगा देता हूं. कुछ बड़ा करने के बारे में सोचना, और उसे छोटी-छोटी स्टेप्स से अचीव करते जाना… यही मेरे लक्ष्य निर्धारित करने के तरीका है. शायद यह उपाय आपके लिए भी काम कर जाए, अन्यथा आप अपना तरीका इवॉल्व कर सकते हैं.

7. दूसरों को आपकी ज़िंदगी के फ़ैसले मत लेने दीजिए –

आपको बहुत से लोग मिलेंगे जो आपको बताएंगे कि आपके लिए क्या करना सही होगा. यह ज़रुरी नहीं कि उनमें से सभी आपको गलत सलाह ही दें. कुछ लोग आपको वाकई सही राह सुझा सकते हैं, लेकिन आपको हर व्यक्ति की बात को एक्सपर्ट एड्वाइस की तरह नहीं लेना है. अपनी ऑनलाइन लाइफ़ में मुझे हर कहीं यही सुनने को मिलता है कि मैं 9 से 5 के अपने रेगुलर जॉब में खुद को वेस्ट कर रहा हूं लेकिन मैं अपनी सीमाओं और परिस्तिथियों से बेहतर वाकिफ़ हूं. मैं अपने अनुभव से यह बेहतर जान पाया हूं कि मेरे लिए इस समय क्या करना सही है.

आप किसी की भी जीवनशैली को आदर्श मानकर उन्हें आपकी ज़िंदगी के फैसले मत लेने दीजिए. हर व्यक्ति के लिए सफल होने के पैमाने अलग-अलग होते हैं. हर व्यक्ति अपनी मंजिल पर पहुंचने के रास्ते खुद तय करता है. सफल-असफल होना और इसमें लगनेवाला समय बहुत से फ़ैक्टर्स पर निर्भर करता है. सुनिए सबकी, लेकिन करिए वही जो आपका दिल कहे. और हां, मल्टी-लेवल मार्केंटिंग करनेवालों के बहकावे में कभी मत आइए 😉

8. अपने पैशन को फ़ॉलो कीजिए –

अपनी चाह, अपनी उम्मीदों, अपनी आकांक्षाओं, अपने पैशन को फ़ॉलो कीजिए. यही एक जीवन है और आपको मौके बार-बार नहीं मिलेंगे. उस विषय पर, उस दिशा में अपने कैरियर को मोड़ दें जिसे आप प्यार करते हैं. करोड़ों लोग किसी और शख्स का मुखौटा लगाकर रोज़ काम पर जाते हैं और बोझिल कदमों से वापस घर आते हैं. आप अपने साथ ऐसा मत होने दीजिए. आपको परफ़ॉर्मर बनना है या ग्राफ़िक डिज़ाइनर… चाहे जो बनना चाहते हों, इंटरनेट के इस दौर में कोई काम छोटा नहीं है. 25 साल पहले स्कूल से बाहर निकलते वक्त मेरी पीढ़ी के बहुत से लोगों के सामने रास्ता क्लीयर नहीं होने का संकट होता था. आज वह दुविधा किसी के मन में नहीं होनी चाहिए क्योंकि मिलेनियल्स (जिनका जन्म पिछले 20-25 सालों के दौरान हुआ है) के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं. अपने पैशन को फॉलो करना उन्हें अपनी मंज़िल तक ले जाएगा.

9. अपने डर को पहचानिए और उसका सामना कीजिए –

ऐसा बहुत कुछ है जिससे आप भयभीत होंगे. जब जीवन में सब कुछ अच्छा चल रहा हो तो किसी अनिष्ट के होने का डर भी विकराल हो जाता है. जब मैं साइकल चलाना सीख रहा था तब गिरने की आशंका से मेरा डर इतना सॉलिडिफ़ाई हो जाता था कि नज़र सड़क के दूसरी ओर पड़े पत्थर पर ही टिकी रहती थी और हैंडल अपने आप ही साइकिल को उस दिशा में ले जाने लगता था. घनीभूत डर इसी तरह आपको बुरी परिस्तिथियों में धकेलता है और आपको पता भी नहीं चलता.

डर सभी को लगता है. कलेजा सभी का कांपता है. अच्छे से अच्छे धावकों की भी फ़ाइनल रेस के वक्त धुकधुकी लगी रहती है, लेकिन वे अपने डर को पॉज़िटिव एनर्जी में बदलकर बाजी मार ले जाते हैं. पर्याप्त सावधानी लेकर लिए गए रिस्क व्यक्ति को मंज़िल तक पहुंचा सकते हैं. बैकअप लिए बिना ब्लॉग की क्रूशियल सैटिंग्स या सी-पैनल में छेड़छाड़ करना कितना बेवकूफ़ी भरा होता है ये मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता. मैंने अपनी कई महीनों की मेहनत कई बार हमेशा के लिए खो दी है. लेकिन थोड़ा संभलकर और सीख-सीख कर तकनीक का डर मैंने अपने दिल से निकाल ही दिया. यदि मैं यह नहीं कर पाता तो इतना लंबा सफ़र तय करना मुश्किल था.

10. बचपन अच्छा था… उसे अतीत में ही रहने दीजिए –

बचपन हमारे जीवन का सबसे खुशनुमा पीरियड होता है. हमारी पर्सनालिटी का सबसे बड़ा अंश हमारे बचपन में ही निर्धारित हो जाता है. बचपन के साथ बहुत सी खट्टी-मीठी यादें जुड़ी होती हैं. मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे स्वर्णिम बचपन जीने का मौका मिला. बहुत बचपन में ही मैंने परिष्कृत रुचियां विकसित कीं जिन्हें बहुतेरे लोग हाईस्कूल पूरा करने का बाद जान पाते हैं.

बचपन में बहुत संरक्षित माहौल में पलने-बढ़ने के कारण मैं जीवन के कठोर सबक समय रहते नहीं सीख पाया. लोगों के बीच जल्दी खुल नहीं पाना, बहिर्मुखता का न होना, दोस्त जल्दी नहीं बना पाना, पब्लिक स्पीकिंग से कतराना जैसे बहुत से पर्सनालिटी ट्रेट्स थे जो मेरे बचपन से होते हुए युवावस्था में प्रवेश कर गए. इनसे उबरने में मुझे खासा वक्त और हिम्मत लगी है. आज भी में अपने बचपन और गुम हो चुकी मासूमियत को शिद्दत से याद करता हूं लेकिन उसकी भरपाई मैंने गंभीरता और परिपक्वता से की है.

अपने बच्चों के साथ बच्चा बनना, खूब ठठाकर हंसना और हरी घास पर सहसा लोटपोट हो जाना इसका लक्षण है कि आपके भीतर का बच्चा कभी भी जाग्रत हो सकता है. उसे बनाए रखिए पर अपने ऊपर हावी मत होने दीजिए. Childlike बनिए, childish नहीं.


यह पोस्ट पॉइंटर्स में लिखी जानेवाली थी लेकिन 10 बिंदुओं में ही बहुत लंबी हो गई है. पोस्ट के शेष भाग को या तो पोस्ट में ही बाद में जोड़ दिया जाएगा या अलग से पोस्ट कर दिया जाएगा. पढ़ते रहें…

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 28 comments

    1. Nishant

      हैलो विपुल, मुझे जानकर खुशी हुई कि तुम्हें यह लेख पसंद आया. ब्लॉग में फिर से पोस्ट लिखने आने का सारा क्रेडिट तुम जैसे सजग पाठकों को जाता है.

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    1. Nishant

      मल्टीलेवल मार्केटिंग बेस्ट है ये बात मैं 1990 से सुन रहा हूं. आप थोड़ी रिसर्च करें और पता लगाएं कि इसका बिजनेस मॉडल कैसा है. उन लोगों की खोज करें और उनसे मिलें जिन्होंने मल्टीलेवल मार्केटिंग से खूब पैसा कमाया हो.

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  1. Indira

    Happy Birthday Nishant. Wish you all the best.

    2016-05-09 19:56 GMT-07:00 “Hindizen – हिंदीज़ेन” :

    > Nishant posted: ” हैप्पी बर्थडे टु मी, फ़्रेंड्स! जैसा कि आप पोस्ट के
    > टाइटल को पढ़कर ही समझ सकते हैं, मैं आज ही 41 साल का हो गया हूं, आज मेरा
    > जन्म दिन है. इसी ब्लॉग पर मैंने कुछ साल पहले अपने जन्मदिन के दिन एक पोस्ट
    > लिखी थी, और यह संकल्प लिया था कि हर साल वैसी ही प”
    >

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  2. Rahul

    First time I visit your website and your article are very interesting and this one is very very interesting great work. I like to read everything about motivation and about life, I have read more than 200 books on motivation and a lot of article. There are a lot of negativity everywhere but reading this kind of article anybody can make himself positive. Again Great Work …………….

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