Narcissus – नरगिस की कहानी

अल्केमिस्ट ने वह किताब पढ़ने के लिए उठाई जिसे कारवां में कोई अपने साथ लाया था. पन्ने पलटने पर उसे किताब में नारसिसस की कहानी दिखी.

अलकेमिस्ट को नारसिसस की कहानी के बारे में पता था. नारसिसस एक युवक था जिसने किसी झील के किनारे बैठकर पानी में अपना अक्स देखा. अपने अप्रतिम रूप को देखकर वह खुद पर इतना मोहित हो गया कि सुध-बुध खो बैठा और झील में गिरकर डूब गया (एक दूसरी कहानी यह कहती है कि वह खुद को देखकर सब कुछ भूल गया और वहीं बैठे-बैठे उसने भूख-प्यास से दम तोड़ दिया).

कहते हैं कि जिस जगह वो गिरा था वहां एक सुंदर फूल उगा, जिसे हम नरगिस के नाम से जानते हैं.

लेकिन उस किताब में नारसिसस की इस कहानी के अलावा और कुछ भी बयां किया गया था. उसमें लिखा था कि नारसिसस की मौत के बाद उस वन की देवियां उस झील तक आईं, और उन्होंने देखा कि झील का मीठा पानी खारा हो चुका था.

“तुम क्यों रो रही हो?”, वनदेवियों ने झील से पूछा.

“ये आंसू नारसिसस के लिए हैं”, झील ने कहा.

“हम जानते हैं कि नारसिसस के गुज़र जाने का तुम्हें सबसे ज्यादा दुख है” उन्होंने कहा, “क्योंकि हमने उसे हमेशा दूर से ही देखा जबकि तुमने उसकी सुंदरता को करीब से जी भर के निहारा”.

“लेकिन… क्या वो बहुत सुंदर था?”, झील ने पूछा.

“तुमसे बेहतर इस बात को कौन जान सकता है?”, वनदेवियों ने अचरज से कहा, “तुम्हारे किनारे पर बैठकर ही तो वह पानी में अपनी छवि को निहारता रहता था!”

यह सुनकर झील कुछ पल को चुप रही, फिर वह बोली:

“मैं नारसिसस के लिए रोती रही लेकिन मुझे यह पता न था कि वह सुंदर था. मेरे रोने की वज़ह कुछ और थी. जब वह मेरे किनारों पर बैठकर मुझे देखता था तो मुझे उसकी आंखों में अपनी खूबसूरती नज़र आती थी.”

“कितनी सुंदर है यह कहानी”, अल्केमिस्ट ने खुद से कहा.


The Alchemist picked up a book that someone in the caravan had brought. Leafing through the pages, he found a story about Narcissus.
The Alchemist knew the legend of Narcissus, a youth who daily knelt beside a lake to contemplate his own beauty. He was so fascinated by himself that, one morning, he fell into the lake and drowned.
At the spot where he fell, a flower was born, which was called the narcissus.
But this was not how the author of the book ended the story. He said that when Narcissus died, the Goddesses of the Forest appeared and found the lake, which had been fresh water, transformed into a lake of salty tears.
“Why do you weep?” the Goddesses asked.
“I weep for Narcissus,” the lake replied.
“Ah, it is no surprise that you weep for Narcissus,” they said, “for though we always pursued him in the forest, you alone could contemplate his beauty close at hand.”
“But….. was Narcissus beautiful?” the lake asked.
“Who better than you to know that?” the Goddesses said in wonder, “After all, it was by your banks that he knelt each day to contemplate himself!”
The lake was silent for some time. Finally it said:
“I weep for Narcissus, but I never noticed that Narcissus was beautiful. I weep because, each time he knelt beside my banks, I could see, in the depths of his eyes, my own beauty reflected.”
“What a lovely story,” the Alchemist thought.

(From the blog of Paulo Coelho)

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 4 comments

  1. मीनाक्षी

    हमने तो कुछ ऐसा सुन रखा था – नरगिस तुझमें तीन गुण , रूप-रंग और बास , अवगुण तेरा एक है भ्रमर न बैठे पास — अपनी इसी बेनूरी पर वह रोती है लेकिन नरगिस के बारे में इस नई जानकारी के लिए शुक्रिया.

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