गोबर : Bullshit

एक मुर्गी खेत में बैल से बातें कर रही थी. वह बोली, “मैं उस पेड़ की ऊंची टहनी तक पहुंचना चाहती हूं, लेकिन मुझमें इतनी ताकत नहीं है.”

बैल ने कहा, “तुम्हें पता है, हमारे गोबर में बहुत पौष्टिक तत्व होते हैं. तुम इसे थोड़ा-थोड़ा रोज़ खाओगी तो तुममें ताकत आ जाएगी”.

मुर्गी ने गोबर में चोंच मारकर देखा और उसे यह वाकई पौष्टिक लगा. उसमें थोड़ी ताकत आ गई और वह पेड़ की निचली टहनी तक पहुंच गई.

अगले दिन उसने फिर थोड़ा गोबर चखा और वह पेड़ की दूसरी शाखा तक पहुंच गई.

गोबर खाते-खाते चार-पांच दिनों के भीतर मुर्गी में इतनी जान आ गई कि वह पेड़ की सबसे ऊपरी शाखा पर चढ़ बैठी. बदकिस्मती से किसान ने उसे कोई बुरी चिड़िया समझकर गोली से उड़ा दिया.

इस छोटी सी कहानी से मिलनेवाली सीख बहुत रोचक है जिसे नीचे मूल अंग्रेजी में पढ़ना ही सही होगा 🙂

(~_~)

A hen was chatting with a bull. “I would love to be able to get to the top of that tree,” sighed the hen, “but I haven’t got the energy.”

“Well, why don’t you nibble on some of my droppings?” replied the bull. “They’re packed with nutrients.”

The hen pecked at a lump of dung, and found it actually gave him enough strength to reach the lowest branch of the tree.

The next day, after eating some more dung, he reached the second branch.

Finally after a fourth night, the hen was proudly perched at the top of the tree. He was promptly spotted by a farmer, who shot him out of the tree.

Moral of the story: Bullshit might get you to the top, but it won’t keep you there.

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 8 comments

    1. Nishant

      सुब्रमण्यम जी पंचामृत में गोबर नहीं पड़ता. दूध, दही, शहद, घी और गन्ने के रस से बने प्रसाद को पंचामृत कहते हैं और आजकल ऐसा पंचामृत कोई नहीं बनाता.

      गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है. आयुर्वेद में इसे औषधि की मान्यता है और कई मांगलिक कार्य इनके बिना पूरे नहीं होते.

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