बोंसाई और हम

National Bonsai & Penjing Museum

“Never underestimate the power of dreams and the influence of the human spirit. We are all the same in this notion: The potential for greatness lives within each of us.” – William Rudolph

जब मैं छोटा था तब हमारा परिवार अक्सर ही बोंसाई वृक्षों की प्रदर्शनी देखने के लिए जाता था. हमारे समुदाय में बोंसाई वृक्ष उगानेवाले बहुत से सदस्य थे जो अपनी कला को निखारने के लिए एक-दूसरे से नियमित रूप से मिलते थे. हर साल लगनेवाले मेले में समूह के सदस्य अपने लगाए बोंसाई वृक्ष प्रदर्शित करते थे. प्रदर्शनी में आमतौर से सौ के लगभग वृक्ष रखे जाते थे और वे हर आकार-प्रकार, रंग-रूप और प्रजाति के होते थे. कुछ वाकई बहुत आकर्षक होते थे और कुछ अनगढ़ से, लेकिन उन्हें देखने के लिए बहुत लोग आते थे.

उन दिनों मुझे यह लगता था कि बोंसाई के वृक्ष विशेष प्रकार के वृक्ष होते थे और वे छोटे आकार में ही उगते थे. कुछ बड़ा होने पर ही मुझे यह पता चला कि वे छोटे वृक्ष उन प्रजातियों के बड़े वृक्षों से बहुत अलग नहीं हैं. यदि उन्हें भी स्वतन्त्र रूप से उगने दिया जाए तो वे भी विशालकाय हो जायेंगे. लेकिन उन्हें छोटे-छोटे उथले गमलों में उगाया जाता है. उनकी जड़ें बहुत बेरहमी से काट दी जातीं हैं और शाखाओं को मनचाहे आकार में छांट कर धातु के तारों से उमेठकर वृक्ष का रूप दे दिया जाता है. इस प्रकार, बोंसाई वृक्षों को उनके स्वाभाविक रूप में उगने नहीं दिया जाता है. उनके विकास के हर संभव प्रयास का दमन कर दिया जाता है. उन्हें कम-से-कम पानी और न के बराबर मिट्टी और खाद में पनपने की आदत डाली जाती है.

आज मुझे लगता है कि मैं बोंसाई बनाने की कला और सौंदर्य को समझने लगा हूँ, फिर भी मुझे इस कार्य में एक अजीब सी त्रासदी दिखती है. बोंसाई की कला विशालकाय और प्रभावशाली वृक्ष के रूप में पनपने की संभावना को कुचलकर उसे निर्ममता से सीमित कर देती है.

इसके साथ ही साथ मेरा ध्यान हम सबके जीवन में हर दिन घट रही ऐसी ही त्रासदियों की ओर भी जाता है. हमारे भीतर भी अपरिमित विकास और संभावनाओं के बीज हैं. हम सब अद्वितीय हैं और हमारे जीवन के पीछे विशेष प्रयोजन हैं.

हम यदि चाहें तो अपने और दूसरों के जीवन में महत्वपूर्ण सकारात्मक परिवर्तन लाकर इस दुनिया को बदलने की ताक़त रखते हैं, लेकिन अक्सर यही देखने में आता है कि हमारी आत्मोन्नति की राह में अनेक अवरोध खड़े हो जाते हैं.

लेकिन हमारे विकास की राह के अवरोध उथले गमले, मिट्टी, या काट-छांट आदि नहीं हैं. जिन चीज़ों की वज़ह से हमारी ज़िंदगी की राह थम जाती है वे ये हैं:

  • अस्वास्थ्यकर आदतें
  • मिथ्याभिमान
  • अदूरदर्शितापूर्ण उद्देश्य
  • उपभोगिता/विलासिता
  • संबंधों में छिछलापन
  • भीतर घर कर चुके डर
  • अतीत से असहज जुड़ाव

आपका और हमारा जीवन इस सृष्टि के लिए महत्वपूर्ण है. यह कितना ही अस्पष्ट क्यों न हो पर हममें से प्रत्येक जन के अस्तित्व का एक गहन प्रयोजन है. हमारे ऊपर इसका उत्तरदायित्व है कि हम अपने महत्व और मूल्य को कभी कम करके नहीं आकें और हर उस छोटे/बड़े बदलाव का संवाहक बनें जो हमारी और इस दुनिया की बेहतरी के लिए सामने आये.

Advertisements

About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 7 comments

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s