प्रयास करते रहें

पाब्लो पिकासो ने कभी कहा था, “ईश्वर बहुत अजीब कलाकार है. उसने जिराफ बनाया, हाथी भी, और बिल्ली भी. उसकी कोई ख़ास शैली नहीं है. वह हमेशा कुछ अलग करने का प्रयास करता रहता है.”

जब आप अपने सपनों को हकीकत का जामा पहनाने की कोशिश करते हैं तो शुरुआत में आपको कभी डर भी लगता है. आप सोचते हैं कि आपको नियम-कायदे से चलना चाहिए. लेकिन हम सभी जब इतने अलग-अलग तरह से ज़िंदगी बिता रहें हों तो ऐसे में नियम-कायदों की परवाह कौन करे! यदि ईश्वर ने जिराफ, हाथी, और बिल्ली बनाई है तो हम भी उसकी कोशिशों से सीख ले सकते हैं. हम किसी रीति या नियम पर क्यों कर चलें!?

यह तो सच है कि नियमों का पालन करने से हम उन गलतियों को दोहराने से बच जाते हैं जो असंख्य लोग हमसे भी पहले करते आये हैं. लेकिन इन्हीं नियमों के कारण ही हमें उन सारी बातों को भी दोहराना पड़ता है जो लोग पहले ही करके देख चुके हैं.

निश्चिंत रहिये. दुनिया पर यकीन कीजिये और आपको राह में आश्चर्य देखने को मिलेंगे. संत पॉल ने कहा था, “ईश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञानियों को लज्जित करे; और ईश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्जित करे”. बुद्दिमान जन जानते हैं कि कुछ बातें अनचाहे ही बारंबार होती रहतीं हैं. वे उन्हीं संकटों और समस्याओं का सामना करते रहते हैं जिनसे वे पहले भी जूझ चुके हैं. यह जानकर वे दुखी भी हो जाते हैं. उन्हें लगने लगता है कि वे आगे नहीं बढ़ पायेंगे क्योंकि उनकी राह में वही दिक्कतें फिर से आकर खडीं हो गयीं.

“मैं इन कठिनाइयों से पहले भी गुज़र चुका हूँ”, वे अपने ह्रदय से यह दुखड़ा रोते हैं.

“सो तो है”, उनका ह्रदय उत्तर देता है, “लेकिन तुमने अभी तक उनपर विजय नहीं पाई है”.

लेकिन बुद्धिमान जन यह भी जानते हैं कि सृष्टि में दोहराव व्यर्थ ही नहीं होता. दोहराव बार-बार यह सबक सिखाने के लिए सामने आता है कि अभी कुछ सीखना बाकी रह गया है. बारंबार सामने आती कठिनाइयाँ हर बार एक नया समाधान चाहतीं हैं. जो व्यक्ति बार-बार असफल हो रहा हो, उसे चाहिए कि वह इसे दोष के रूप में न ले, बल्कि इसे गहन आत्मबोध के राह की सीढ़ी समझे.

थॉमस वाटसन ने कभी इसे इस तरह कहा था, “आप मुझसे सफलता का फॉर्मूला जानना चाहते हैं? यह बहुत ही सरल है. अपनी असफलता की दर दुगनी कर दीजिये”.

(पाउलो कोएलो के ब्लॉग से साभार)

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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