चुनाव

The 'Hindu' Gold Dubloon

शिष्य ने गुरु से पूछा, “यदि मैं आपसे यह कहूं कि आपको आज सोने का एक सिक्का पाने या एक सप्ताह बाद एक हज़ार सिक्के पाने के विकल्प में से एक का चुनाव करना है तो आप क्या लेना पसंद करेंगे?”

“मैं तो एक सप्ताह बाद सोने के हज़ार सिक्के लेना चाहूँगा”, गुरु ने कहा.

शिष्य ने आश्चर्य से कहा, “मैं तो यह समझ रहा था कि आप आज सोने का एक सिक्का लेने की बात करेंगे. आपने ही तो हमें हमेशा वर्तमान क्षण में अवस्थित रहने की शिक्षा दी है!”

“तुमने मुझे सोने की दो काल्पनिक मात्राओं में से एक का चयन करने के लिए कहा”, गुरु बोले, “तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि मैं किसका चुनाव करता हूँ!?

Thanx to John Weeren for this story



Categories: Zen Stories

Tags:

14 replies

  1. Shubh din….badi soch….dhanyavad…chalte rahiye…

    Like

  2. सिक्‍के पर लेख ”राम लक्ष्‍मण जानकी जै बोलो हनुमान की” ढालने का प्रयास है, ऐसे सिक्‍कों के दूसरे पहलू पर राम दरबार होता है, खैर कहानी तो बढि़या है, लेकिन मेरा ध्‍यान सिक्‍के पर अधिक रहा.

    Like

  3. कल्पना ही हो तो वृहद हो..

    Like

    • तुम्हें क्या मालूम कि कल्पना किसे कहते हैं
      वृहद का अर्थ क्या होता है
      एक काल्पनिक मुस्कान से अपने को होशियार दिखाने की कोशिश करना
      अपने आपको ही मूर्ख बनाना है
      सदगुरु के बिना खोखली है तुम्हारी आध्यात्मिकता

      Like

  4. dhairya…..intjar…..badi prapti……………goodpost

    Like

  5. yes ,its very true,if you have an option for the thing which will not remains same in future as it is ,so its does not matter that what option you choose for that……….generally tengibles have nature of variability…….intengibles like traits(knowledge,experience,nature,behaviour,thinking ) of people does matter for that which option you choose……today or tommorow,because traits have fixed value of them.
    if you asked for option of today or tommorow,based on knowledge…….than definitely you will opt for the option of “today”,because you believe in today.

    Like

  6. मालवी में एक कहावत है कि – जब सपने में ही लड्डु देखने हैं तो फिर असली घी के क्यों नहीं… !:-) कुछ ऐसा ही…

    Like

  7. एक महीने बाद कितने सिक्के मिलेंगे?

    Like

  8. कल्पना हमेशा सोच से परे होनी चाहिये।

    Like

  9. sach kaha hai ki kalpna hi karana hai to jyada ki ki jaye aur haqiqt mai rahana hai to kewal aur kewal aaz ki soch rakhi jaye.

    Like

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 7,780 other followers

%d bloggers like this: