Socrates and the Marketplace – बाज़ार में सुकरात

aswan shop

सुकरात महान दार्शनिक तो थे ही, उनका जीवन संतों की तरह परम सादगीपूर्ण था. उनके पास कोई संपत्ति नहीं थी, यहाँ तक कि वे पैरों में जूते भी नहीं पहनते थे. फ़िर भी वे रोज़ बाज़ार से गुज़रते समय दुकानों में रखी वस्तुएं देखा करते थे.

उनके एक मित्र ने उनसे इसका कारण पूछा.

सुकरात ने कहा – “जब मैं बाज़ार में घूमता हूं तो मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि दुनिया में कितनी सारी वस्तुएं हैं जिनके बिना मैं इतना खुश हूँ.”

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True philosopher that he as, Socrates believed that the wise person would instinctively lead a frugal life. He himself would not even wear shoes; yet he fell under the spell of the marketplace and would go there often to look at all the wares on display.

When one of his friends asked why, Socrates said: “I love to go there and discover how many things I am perfectly happy without.”

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 20 comments

  1. indowaves

    वो जिनके घर मल्टीनैशनल कंपनी के गोदाम बन गए है वो अगर इस पढ़ कर कुछ समझे तो कुछ बात भी बने!

    वैसे संसारी लोग इसे पढ़े तो सुकरात जी को यही कहते ..तुम्हारी औकात नहीं चले है सैमसंग का स्मार्टफ़ोन लेने 🙂 मतलब औकात नहीं तो क्या जरूरत थी बाज़ार में टहलने की 🙂

    -Arvind K.Pandey

    http://indowaves.wordpress.com/

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  2. rajeshwari

    निशांतजी आपका ब्लॉग पढ़कर मुझे हमेशा यही लगता है की मुझे ये देर से मिला. मैंने कितना वक़्त बर्बाद कर दिया व्यर्थ की (so called ) समस्याओं के समाधान में, जो मैं कर भी नहीं पाई, बल्कि अपनी ज़िन्दगी को (और मेरे अपनों की ज़िन्दगी को भी) और मुश्किल बना कर रखा. खैर वक़्त को तो हम लौटा नहीं सकते लेकिन आपके द्वारा संकलित सीख को अब भी अगर अपनी ज़िन्दगी में उतर पायें तो जीवन कुछ हद तक सार्थक कर पाएंगे. शुक्रिया आपका.

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  3. Bharat Bhushan

    बाहर की चीज़ों की निर्भरता और आकर्षण जितना कम होगा व्यक्ति उतना ही अपनी आंतरिक खुशी से जुड़ा रहेगा. सुकरात महान दार्शनिक हैं. अच्छी पोस्ट के लिए आभार.

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