Skills – कौशल

painterकिसी जमाने में एक यात्रिक था जिसे धन अथवा प्रसिद्धि आदि की चाह नहीं थी. वह चाहता तो जीवन में बड़ी-से-बड़ी पदवी पर आसीन हो सकता था पर वह हमेशा उन गुरुओं की खोज में लगा रहा जो उसे वीणा, शतरंज, पुस्तक, चित्र, और तलवार की पूर्ण शिक्षा दें.

वीणा से उसने संगीत प्राप्त किया जो आत्मा को अभिव्यक्ति देता है. शतरंज से उसने रणनीति, व्यूह-रचना और दूसरों की प्रतिक्रिया का अनुमान लगाना सीखा. पुस्तकों से उसे अकादमिक शिक्षाएं मिलीं. चित्रकला ने उसमें सौंदर्य और कलात्मक अभिरुचि उत्पन्न की. तलवार चलाना सीखने से उसमें आक्रमण और रक्षा करने की प्रवीणता आई.

एक दिन एक बच्चे ने यात्रिक से पूछा, “यदि आप अपने पांच कौशल भूल जाओ तो क्या होगा?”

यह सुनकर पहले तो यात्रिक बहुत भयभीत हो गया. जब वह संभाला तो उसने विचार-मनन किया. वह जान गया कि वीणा उसके बिना अपने आप नहीं बज सकती; खिलाड़ियों के बिना शतरंज की बिसात अधूरी होती है; यदि कोई पढ़नेवाला न हो तो पुस्तक की कोई उपयोगिता नहीं है; चित्र बनानेवाली तूलिकाएं स्वतः पटल पर नहीं चलतीं; और योद्धा के नहीं होने पर तलवार म्यान में ही पड़ी रह जाती हैं. यात्रिक को यह बोध हो गया कि इन कौशलों को अर्जित करने में ही उसका उत्कर्ष नहीं है. ये सब तो अंतर्यात्रा पर ले जानेवाले मार्ग के पड़ाव हैं.

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There was once a wanderer who cared nothing for fame. although he had many chances for position, he continued to search for teachers who could help him master five things: zither, chess, book, painting, and sword.

The zither gave him music, which expressed the soul. Chess cultivated strategy and a response to the actions of another. Books gave him academic education. Painting was the exercise of beauty and sensitivity. Sword was a means for health and defence.

One day a little boy asked the wanderer what he would do if he lost his five things. At first the wanderer was frightened, but he soon realized that his zither could not play itself, the chess board was nothing without players, a book needed a reader, brush and ink could not move on their own accord, and a sword could not be unsheathed without a hand. He realized that his cultivation was not merely for the acquisition of skills. It was a path t the innermost part of his being.

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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