The Assembly of the Cats – चार बिल्लियां

कभी किसी जमाने में शोकेन नामक एक योद्धा था. उसके घर में एक बहुत बड़ा और शैतान चूहा रहता था. यह चूहा बड़ा ही ढीठ और उत्पाती था. शोकेन ने उसे मारने के बहुत प्रयत्न किये पर सफल नहीं हुआ. तंग आकर शोकेन एक व्यक्ति के पास गया जो चूहों को मारने के लिए बिल्लियों को प्रशिक्षण देता था. शोकेन ने उससे चूहे को मारने के लिए एक बिल्ली माँगी.

बिल्लीवाले ने शोकेन को अदरक जैसे रंगवाली बड़ी चपल बिल्ली दी जिसके दांत और नाखून बेहद नुकीले थे. उस बिल्ली ने जब चूहे का सामना किया तो चूहा उसे देखकर निर्भय खड़ा रहा और उल्टे बिल्ली भयभीत हो गयी. शोकेन बिल्ली को वापस बिल्लीवाले के पास ले गया.

“चूहा वाकई बड़ा बदमाश है”, बिल्लीवाले ने कहा और शोकेन को एक दुबली चितकबरी बिल्ली दी. “इस बिल्ली को मैंने कई वर्ष सिखाया है और यह बहुत कुशल है”.

दूसरी बिल्ली ने चूहे का डटकर सामना किया पर चूहे ने उसे भी आसानी से हरा दिया.

शोकेन वापस बिल्लीवाले के पास गया और इसबार एक खूंखार काली बिल्ली लेकर आया. यह बिल्ली दिखने में आत्मविश्वास से परिपूर्ण लगती थी. बिल्लीवाले ने कहा, “इस बिल्ली ने ध्यान के द्वारा अपने मन को एकाग्र करना सीखा है. इसकी तकनीक अचूक है. यह उस चूहे को ज़रूर मार भगायेगी.” लेकिन वह बिल्ली भी चूहे से हार बैठी.

अबकी बार जब शोकेन बिल्लीवाले के पास गया तो बिल्लीवाले ने कहा, “कोई बात नहीं, इस बार मैं तुम्हें अपनी सभी बिल्लियों की बूढ़ी गुरु बिल्ली देता हूँ.” यह बिल्ली बूढ़ी और बेढब थी. उसमें ज़रा भी आकर्षण नहीं था. शोकेन उस बिल्ली को चूहे के पास ले गया. चूहा बिल्ली के पास आया पर बिल्ली ने उसकी ओर बिलकुल ध्यान नहीं दिया. अचानक ही चूहा उसे देखकर भय से जड़वत हो गया. बूढ़ी बिल्ली ने इत्मीनान से अपना पंजा उठाया और एक वार में ही चूहे को ढ़ेर कर दिया.

शोकेन बिल्ली को बिल्लीवाले के पास लेकर गया और उससे पूछा, “इस बिल्ली ने चूहे को इतनी आसानी से कैसे मार दिया जबकि अन्य बिल्लियाँ युवा और मजबूत होते हुए भी हार गयीं?”

बिल्लीवाले ने कहा, “आप मेरे साथ आइये, मुझे यकीन है कि बिल्लियाँ इस बारे में बात ज़रूर करेंगी, और चूंकि वे मार्शल आर्ट के बारे में गहराई से जानती हैं इसलिए यह बात उनसे सुनना बहुत रोचक होगा”. वे छुपकर बिल्लियों की बातचीत सुनने लगे.

पहली बिल्ली ने कहा, “मैं बहुत कठोर हूँ”.

“तो फिर तुम चूहे को क्यों नहीं हरा पाईं?”, बूढ़ी बिल्ली ने कहा, “क्योंकि कठोर होना ही पर्याप्त नहीं है. किसी कठोर बिल्ली को उससे कठोर चूहा कभी भी मिल सकता है.”

चितकबरी बिल्ली ने कहा, “मैंने कई साल चूहे मारने के अचूक तरीके सीखे, फिर भी मैं उस चूहे से क्यों हार गयी?”. बूढ़ी बिल्ली ने जवाब दिया, “ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तुम सालों तक कुछ-एक ही दांव आजमाती रहीं और उस मुकाबले में वे दांव काम नहीं आये”.

“लेकिन मैंने तो ध्यान साधना के द्वारा अपने मन और शरीर को परिपूर्ण कर लिया था”, काली बिल्ली ने कहा, “मेरा कौशल अपरिमित होने और मुझे दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हो जाने के बाद भी मैं उस चूहे से कैसे हार गयी?”

“तुम्हारा कौशल निस्संदेह परिपूर्ण है और तुमने शारीरिक और आध्यात्मिक शक्तियां अर्जित कर ली हैं तिसपर भी तुम विषयों एवं कामनाओं से रिक्त नहीं हो. जब तुमने उस चूहे का सामना किया तब तुम्हारे मन में उसका वध करने की इच्छा प्रबल हो उठी. तुम अपनी इच्छा का अधिक्रमण नहीं कर सकीं और चूहे ने इसे भांप लिया. इस बात में वह तुमसे अधिक परिपक्व था. चूंकि तुम अपने मन को निर्विकार नहीं कर सकीं इसलिए तुम्हारी शक्तियों, तकनीकों, और चेतना का एकीकरण नहीं हुआ. चूहे को मारते समय मैंने इन तीनों तत्वों को साध लिया इसलिए मैं उसे निष्प्रयास ही मार सकी. यही मेरी सफलता का कारण है.”

“लेकिन मैं एक और बिल्ली को जानती हूँ जो यहाँ से कुछ दूर एक गाँव में रहती है. पकी उम्र की होने के कारण उसके बाल सन जैसे सफ़ेद हो गए हैं. वह देखने में बिलकुल कठोर नहीं लगती. वह मांस नहीं खाती बल्कि चावल सब्जी से अपना पेट भरती है. उसने कई सालों से एक भी चूहा नहीं मारा है क्योंकि चूहे उससे अत्यंत भयभीत रहते हैं और जैसे ही वह किसी घर में दाखिल होती है तो वहां के सारे चूहे फ़ौरन घर छोड़ देते हैं. वह बिल्ली अपनी नींद में भी चूहों को अचेत कर देती है. हम सभी को उस बिल्ली जैसा ही होना चाहिए – वह हिंसा व अहिंसा के परे है. उसकी कोई तकनीक नहीं है, उसके मन में चूहों को मारने की इच्छा तक नहीं है.”

* * * * * * * * * *

Once there was a sword master called Shoken, who lived in a house infested with a large rat. This rat was truly ferocious, and no matter how hard Shoken chased it with his bokuto he could not kill it. Fortunately, one of Shoken’s neighbours was a cat breeder who specialised in training his cats to kill rats. Shoken asked if he might borrow a cat to catch the rat.

The cat trainer gave Shoken a viscous ginger alley cat, a real street fighter with sharp claws. But when the cat came to face the rat, the rat stood it’s ground and the cat was afraid. Shoken returned the cat to the cat master.

“Must be some rat,” said the breeder, and gave Shoken a lean black and white cat. “This cat has had years of training, and is highly skilled.” The second cat fought with the rat, but the rat was able to beat it easily.

Shoken went back to the cat breeder, and retuned with a jet black cat. The black cat had a very strong presence, projecting a quiet confidence. “This cat has mastered flawless technique, and has developed his mind through meditation. His zanshin is truly powerful. This cat will get the rat,” the master had said. But this cat also was defeated.

When Shoken returned to the cat master, the master said. “Very well, this time I will give you the master of the cats. This cat was old and grey, and did not look so impressive. Shoken took the cat home and brought it to face the rat. The rat moved to attack the old cat, but the old cat sat quietly unconcerned. Suddenly the rat felt a slight tinge of fear. The rat hesitated, and suddenly the old cat reached out a claw and killed the rat with a single strike.

When Shoken brought the cat back to the breeder he asked him how it was that the old cat could kill the rat while the younger ones had such a hard time. “Come with me,” said the breeder, “I’m sure the cats will discuss this, and since cats know a great deal about martial arts I’m sure you will find their conversation interesting.” They listened in to the cats’ discussion.

The ginger cat stood up and said, “I am very tough.”

“Then why couldn’t you beat the rat? Because toughness is itself not enough. There will always be a tougher rat somewhere.” Said the old grey cat.

The black and white cat spoke. “I have had years of training and impeccable technique, why could I not beat the rat?” “Because, although your waza is brilliant, and although you have had many years in the dojo, this is not enough in a real fight.

“But I have perfected my body through training and my mind through meditation,” said the black cat, “I have flawless technique, and also have achieved enlightenment. Why did the rat defeat me?”

“Because, Kuroi-san, although your skill is indeed great, and you have both spiritual and physical power you are not without desire. When you faced the rat you had an object in your mind, you did not have mushin. The rat sensed this, and his intuition was better than yours. Because you did not have mushin you were unable to harmonise your strength, your technique and you consciousness. I was able to use all these three elements naturally and unconsciously to defeat the rat. This is why I was successful.

“But I know of another cat, in a village not far from here. His fur is snow white with age, and he’s not very strong looking. He doesn’t eat meat, but lives on vegetables and rice gruel, although he is known to take a little sake occasionally. He hasn’t caught a rat in years because the rats are all terrified of him! As soon as he walks into a house all the rats leave at once. Even in his sleep he chases away rats! We must all learn to be like him, beyond violence, beyond technique, beyond even the desire for skill.”

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 15 comments

  1. VC

    चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथी बलवद् दृढ़म् ।
    तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ।।

    असंशयं महाबाहो मनो दुनिर्ग्रहं चलम् ।
    अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते ।।

    कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन !! !! मामनुस्मर युध्य च !!

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