सुपरपावर

superpower

एक इंटरव्यू में जब वारेन बफेट से पूछा गया कि यदि उन्हें कोई सुपरपावर दी जाए तो वे क्या पाना पसंद करेंगे. वारेन बफेट ने कहा, “मैं चाहता हूँ कि मैं जल्दी पढ़ने लगूं”.

मुझे बफेट का उत्तर अच्छा लगा. लेकिन जब मैंने इसे ट्विटर पर शेयर किया तो कुछ लोगों ने ऐसे कमेन्ट भी किये, “ये क्या बेवकूफी है! यदि आप जल्दी पढ़ने लगेंगे तो आपके दिमाग में कुछ नहीं घुसेगा!”

हाँ… सो तो है. लेकिन हम शायद यहाँ स्पीड-रीडिंग की ही बात नहीं कर रहे हैं. वारेन बफेट बहुत समझदार व्यक्ति हैं और वे भी इस बात को जानते होंगे कि बहुत जल्दी पढ़ लेने पर हमें कुछ भी समझ पाने या याद रखने में दिक्कत होती है. यहाँ यह अनुमान लगाना दूर की कौड़ी होगा पर शायद वारेन बफेट जल्दी सीखने-समझने की बात कर रहें हैं ताकि हम कम समय में ही ज्यादा जानकारी और तथ्यों को विश्लेषित और समाहित कर सकें.

मैंने भी ऊपर दिए गए प्रश्न के लिए अपना उत्तर सोचकर रखा है. यदि मुझे किसी तरह की सुपरपावर मिल सके तो मैं उड़ने की शक्ति लेना पसंद करूंगा. और मुझे लगता है कि बाकी लोग भी इसी सुपरपावर को लेना पसंद करेंगे.

यदि दो सुपरपावर का चुनाव करना हो तो मैं अदृश्य होने की शक्ति भी लेना चाहूँगा. मुझे लगता है कि सुपरपावर्स के बारे में सोचविचार करने वाला मैं अकेला शख्स नहीं हूँ. उड़ने और अदृश्य होने की ताकत मिल जाएँ तो ज़िंदगी कितनी मजेदार हो जाएगी न?

लेकिन यदि मुझे उड़ने और अदृश्य होने की शक्ति या सुपरपावर नहीं मिलें तो मैं चाहूँगा कि…

मुझे ऐसी योग्यता मिल जाए कि मैं सदैव यह जान सकूं कि मुझे आगे क्या करना है.

इस सुपरपावर की ताकत का भरपूर लाभ उठाना बहुत महत्वपूर्ण होगा. तब मुझे रोके रह सकना असंभव हो जाएगा. फिलहाल तो मैं अपने कम्प्युटर पर बैठा-बैठा सोचता ही रहता हूँ, “अब आगे क्या करूं.”. इस पल सबसे ज़रूरी काम क्या है?

कभी-कभी… नहीं, अक्सर ही मैं अटक-सा जाता हूँ. मेरे भीतर हर समय विचार उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं पर मैं यह तय नहीं कर पाता कि मुझे क्या करना है. कसरत या चहलकदमी करने से कुछ मदद मिलती है. चाय-कॉफ़ी से भी मदद मिलती है. लेकिन मेरा बहुत सारा समय स्क्रीन को घूरते रहने में ही व्यर्थ हो जाता है. मेरे सामने किये जानेवाले ज़रूरी काम परत-दर-परत मंडराते रहते हैं पर मैं उन्हें ठोस रूप नहीं दे पाता.

और जब मुझे कोई राह सूझ जाती है तो मुझे मायावी फिल्मों की तरह यह लगने लगता है कि एक फोनबूथ में प्रवेश करते ही मैं सुपरमैन बन गया और उड़ निकला. अब मैं उड़ सकता हूँ! मेरा अगला कदम पूर्णतः सुनिश्चित है. अब मुझे कोई रोक नहीं सकेगा! आपमें भी यह सुपरपावर आ जाए तो आपको रोकना भी असंभव हो जाएगा.

किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम करते समय, रोज़मर्रा के बिजनेस में, या कोई योजना बनाते समय अपनी राह के हर मंजिल हर अवरोध साफ़-साफ़ दिखाई देने की योग्यता वाकई सच्ची सुपरपावर होगी. यह भी ज़रूरी नहीं कि मंजिल का हर निशाँ नज़र आये, सिर्फ अगले कदम का पता होना ही बहुत है. लेकिन अफ़सोस… उड़ सकने या गायब हो सकने की तरह यह सुपरपावर भी हमारी जद में नहीं है. यही कारण है कि हम ज़िन्दगी भर कुछ भी करने के पहले हिचकते-सहमते रहते हैं, एक कदम आगे बढ़ाते हैं और दो कदम पीछे हो लेते हैं.

तो हमारा अगला कदम क्या है?

हमारे अगले कदम के बारे में हमें कुछ पता नहीं होना प्रकृति के हाथ में है (यही कारण है कि मैं इसे सुपरपावर कह रहा हूँ), लेकिन यदि आप अपने भीतर गहरे उतर कर देखें तो आप पायेंगे कि इस सुपरपावर का उपहार आपको अक्सर बिन-मांगे ही मिल जाता है.

तो… उड़ चलें!?

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 11 comments

  1. सुज्ञ

    सारी उल्झनों, अनावश्यक श्रम और असफलताओं की जड भ्रांतियां हैं।
    मुझे यदि सुपर पावर मिले तो ‘यथार्थ’ का ज्ञान ही चाहूंगा। फ़िर तो उद्देश्य स्वयं लक्षित हो जायेगा।

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  2. Cyril Gupta

    What a beautiful post. Thanks for sharing. I came here because I noticed that it mentions ‘reading fast’, well that’s what I would really love to be able to do.

    Sometimes I think about all the excellent books that have been written, and even if one reads as fast as one can, how small a share of this can a person read in his lifetime… Reading fast certainly is a very underrated superpower.

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  3. उन्मुक्त

    शायद सबसे मुश्किल काम है एक अच्छा इन्सान बनना। मैं तो एक अच्छा इन्सान बनना चाहूंगा।

    निशान्त जी, अदृश्य होने की शक्ति कभी न लीजियेगा। यह वरदान नहीं अभिशाप है। अदृश्य व्यक्ति अन्धा होता है।

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