आध्यात्मिक LSD

श्री देवदत्त पटनायक का यह आलेख अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इण्डिया के स्तंभ ‘स्पीकिंग ट्री’ में १२  नवम्बर, २०१० को प्रकाशित हो चुका है. उनकी अनुमति से मैं इसका हिंदी अनुवाद करके यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ. यदि आप मूल अंग्रेजी आलेख पढना चाहें तो यहाँ क्लिक करें.

lsd1.jpgहर व्यक्ति सुखी होना चाहता है. खाने के लाले पड़े हों, सर पर छत न हो, या दीनता-विपन्नता की दशा हो तो कोई भी सुखी और प्रसन्नचित्त नहीं रह सकता. ऐसे में यह स्वाभाविक ही है कि हम सुख की पूर्ति के लिए धन की देवी लक्ष्मी की आराधना करें. लक्ष्मी की कृपादृष्टि हमपर पड़ते ही जीवन के सभी भौतिक सुख सुलभ हो जाते हैं. फिर जीवनयापन की एवं  भविष्य की चिंता नहीं रहती. लक्ष्मी की अतिकृपा अतुल वैभव उपलब्ध कराती है: बैंक, निवेश, स्थाई संपत्ति में भरपूर धन लगा होता है और आर्थिक मोर्चों पर सुरक्षा प्राप्त होती है. लक्ष्मी की कृपादृष्टि से स्वास्थ्य को संजोये रखने के साधन सुलभ होते हैं और व्यक्ति जो-मन-चाहे वह कर सकता है. आनंददायक समृद्धि यही है.

ज्ञानीजन कहते हैं कि यदि तुम लक्ष्मी की कृपादृष्टि पाना चाहते हो तो उसके पीछे मत भागो बल्कि उसे अपने पीछे आने दो. यदि तुम ऐसा नहीं करोगे तो वह अपनी बहन अलक्ष्मी के साथ तुम्हारे घर आ जायेगी – और अलक्ष्मी वैमनस्य की देवी है. जिस घर में धन-सम्पदा की बहुतायत होने पर भी झगडे-द्वंद्व बने रहते हों वहां लक्ष्मी और अलक्ष्मी दोनों का ही निवास माना जाता है.

लक्ष्मी की कृपा का पात्र बनने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह अलक्ष्मी को अपने साथ न लेकर आये, हमें ज्ञान की देवी सरस्वती की उपासना करनी होती है. सरस्वती देवी शुभ्र वस्त्र धारण करतीं हैं और उनके हाथों को पुस्तक शोभायमान होती है. लक्ष्मी चंचला हैं. वे कभी तो बिना कोई कामना किये ही हमारे जीवन में प्रवेश कर जाती हैं और कभी बिना किसी चेतावनी के ही हमें छोड़ देतीं हैं. लेकिन सरस्वती बहुत विश्वसनीय देवी हैं. उनकी कृपा मिलना तो कठिन है पर एक बार हमारे शीश पर वरदहस्त रखने के बाद वे हमसे मुंह नहीं मोडतीं.

जीवन में सरस्वती अर्थात विद्या की उपस्थिति से हमें यह ज्ञान होता है कि लोग हमसे क्या चाहते हैं, विविध कर्मों का संपादन किस प्रकार किया जाता है, समस्याओं से कैसे निपटते हैं, और सही निर्णयों तक कैसे पहुंचते हैं. सरस्वती हमें ज्ञान का प्रकाश देतीं हैं और विश्व का बोध कराती हैं. जिनके जीवन में सरस्वती का उजास है वे जानते हैं कि वे वस्तुतः कितने अज्ञानी हैं; इसलिए वे विनीत और उदार होते हैं. वे लक्ष्मी के आगमन और प्रस्थान की चिंता नहीं करते और उससे भयभीत भी नहीं रहते.

कहा गया है कि लक्ष्मी और सरस्वती शायद ही कभी एक घर में एक-साथ निवास करतीं हों. जहाँ सरस्वती की अधिकता होती है वहां लक्ष्मी की अवहेलना होने लगती है. लक्ष्मी की अधिकता होने पर भी सरस्वती की उपेक्षा होने लगती है. लेकिन सरस्वती की अनुपस्थिति में लक्ष्मी जीवन में अलक्ष्मी को आमंत्रित कर देती है जो कि उचित नहीं है. लक्ष्मी की अनुपस्थिति में सरस्वती का वास होने पर जीवन में दरिद्रता अर्थात विपन्नता की देवी का आगमन हो जाता है जो कि बहुत बुरी बात है.

न तो आर्थिक सुरक्षा और न ही ज्ञान हमें भावनात्मक संतुष्टि उपलब्ध करा सकता है. जीवन में हर सम्पदा या सुविधा होने पर भी यह ज़रूरी नहीं है कि हमारे आपसी संबंध मधुर हों. दुनिया भर के शास्त्र और ज्ञान की बातें पढ़ लेने के बाद भी यदि माता-पिता, संतान, या बंधू-बांधवों से रिश्तों में कड़वाहट हो तो कैसा सुख? इसीलिए हम शक्ति की देवी दुर्गा की आराधना करते हैं. जब हम यह कहते हैं कि हम शुभफलदायी संबंध विकसित करना चाहते हैं तो हमारा अभिप्राय यह होता है कि हमारे संबंध ऐसे हों जिनसे हमें ऊर्जा मिले, हम सुरक्षित और गौरवान्वित अनुभव करें जैसे कोई योद्धा शस्त्र धारण करने पर करता है. हम किसी अजेय दुर्ग की भांति बनना चाहते हैं इसीलिए हम दुर्गा की उपासना करते हैं. दुर्गा भावप्रधान शरणागार हैं जिनके सानिध्य में हम सुरक्षित और वांछित होना चाहते हैं. दुर्गा के रूप में शक्ति की देवी सिंह की सवारी करतीं हैं. वे अभय है और उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र सुसज्जित हैं. वे हमारी रक्षा करतीं हैं और हमारे लिए युद्ध करतीं हैं. हमारे जीवन में उनका बड़ा महत्व है.

अपने जीवन में दुर्गा की प्रतिष्ठा करने के लिए हमें दूसरों को दुर्गा अर्थात शक्ति प्रदान करना पड़ता है. हम स्वयं को सुरक्षित और सबमें सम्मिलित अनुभव करें इसके लिए हमें दूसरों के जीवन को सुरक्षित और परिपूर्ण बनाना पड़ता है. ऐसा तब तक नहीं होगा जब तक हम दूसरों के प्रति संवेदनशील न बनें और मेरा-तेरा की भावना से ऊपर न उठें. मेरा-तेरा की इस भावना के निर्मूलन के लिए हमें पुनः सरस्वती की शरण में जाना पड़ता है.

इस प्रकार हमारा सुख और प्रसन्नता तीन देवियों की कृपा पर निर्भर है: (L) लक्ष्मी, (S) सरस्वती, और (D) दुर्गा. प्रत्येक मनुष्य को इसी आध्यात्मिक LSD की अभिलाषा है. इसके लिए सभी तरस रहे हैं.

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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