Attitude (नज़रिया), Awareness (जागरूकता) और Authenticity (प्रामाणिकता)

Neil-pasrichaएक पोस्ट पहले मैंने आपको ब्लॉगर नील पसरीचा के बारे में बताया था और उनका एक वीडियो भी पोस्ट किया था. उस वीडियो का मैंने अनुवाद कर लिया है जो इस पोस्ट की विषयवस्तु है. चूंकि वीडियो का अनुवाद सबटाइटल्स के रूप में किया गया है इसलिए कहीं-कहीं वाक्य कुछ अटपटे जान पड़ सकते हैं. ये है उस वीडियो वार्ता का पाठ:

मेरी शानदार कहानी ये है: इसकी शुरुआत लगभग 40 साल पहले हुई जब मेरे माता-पिता कनाडा आये. मेरी माँ ने केन्या में नैरोबी छोड़ा. मेरे पिता भारत में अमृतसर के बाहर एक छोटे से गाँव से आये थे. वे यहाँ 1960 के दशक के अंत में आये थे. टोरंटो के पूर्व में एक घंटे की दूरी पर उन्होंने छायादार अंचल में अपना घर बसाया और एक नयी ज़िंदगी की शुरुआत की. उन्होंने पहली बार डेंटिस्ट को यहीं देखा, पहला हैमबर्गर यहाँ खाया, और उनके बच्चे भी यहीं हुए. मैं और मेरी बहन यहीं पले-बढ़े और हमने शांत व सुखद बचपन बिताया. हमारा परिवार एकजुट था, अच्छे दोस्त थे, और शांत मोहल्ला था. हमने उन चीज़ों के महत्व को नहीं जाना जिनका हमारे माता-पिता के जीवन में बड़ा महत्व था जब वे बड़े हो रहे थे — जैसे हमारे घर में बिजली कभी नहीं जाती थी, स्कूल सड़क के दूसरी ओर था, अस्पताल थोड़ी दूरी पर था, और पिछवाड़े में आइस कैंडी मिल जाती थी. हम पले-बढ़े, और जवान हुए. मैं हाई स्कूल गया. कालेज में पढाई की.  घर से बाहर निकला, नौकरी ढूंढी, प्रेम में पड़ा और सैटल हो गया – ऐसा लगता है जैसे ये किसी घटिया धारावाहिक या कैट स्टीवंस के गाने से सुनकर बोल रहा हूँ.

लेकिन जिंदगी बढ़िया गुज़र रही थी. सब कुछ अच्छा चल रहा था. 2006 का साल बहुत अच्छा बीता. टोरंटो के अंगूरी बागानों में खुले आसमान के नीचे जुलाई में मेरा विवाह हो गया जिसमें 150 परिजनों और मित्रों ने शिरकत की. 2007 भी बहुत अच्छा साल था. मैं कॉलेज से निकल गया, और मेरे सबसे करीबी दो मित्रों के साथ लम्बी सड़क यात्रा पर निकल पड़ा. ये मेरे मित्र क्रिस के साथ मेरी फोटो है. प्रशांत महासागर के तट पर  हमने कार की खिड़की से बाहर सील मछलियाँ भी देखीं और उनकी फोटो लेने की कोशिश में गाड़ी रोकी पर वे हमारे बड़े-बड़े सिरों के पीछे छुप गयीं. जैसा कि आप यहाँ पर देख रहे हैं, लेकिन यकीन मानिए, यह सब बहुत मजेदार था. 2008 और 2009 कुछ कठिन साल थे. न सिर्फ मेरे लिए बल्कि कुछ लोगों के लिए, वे और भी कठिन थे. पहली बात तो यह है कि ये बहुत बड़ी खबर थी. अभी भी ये बड़ी बात है, उससे पहले भी यह बड़ी बात थी, लेकिन जब आप अखबार खोलते हैं या टीवी ऑन करके देखते हैं, तो वहां मुख्यतः ध्रुवीय बर्फ पिघलने की, दुनिया में जंग छिड़ने की, भूकंप, तूफ़ान के आने की, और लड़खड़ाती हुई अर्थव्यवस्था की खबरें दिखती है, और अंततः यह ध्वस्त हो जाती है, और फिर अचानक हमारे घर, हमारी नौकरियां, सेवानिवृत्ति की योजनाएं, और रोजीरोटी गायब हो जाती है.

2008 और 2009 मेरे लिए कुछ अन्य कारणों से भी मुश्किल थे. उस दिनों मैं बहुत सी व्यक्तिगत समस्याओं का सामना कर रहा था. मेरा वैवाहिक जीवन सुखद नहीं था, और हम दोनों एक-दूसरे से दूर होते जा रहे थे. एक दिन मेरी पत्नी ऑफिस से घर आयी और हिम्मत जुटाकर अपनी आँखों में आंसू लिए हुए, उसने खुले दिल से बात करने के लिए कहा. उसने कहा, “मैं तुम्हें अब प्यार नहीं करती”. आज तक ये मेरे द्वारा सुने गए सबसे कष्टप्रद शब्द हैं और निस्संदेह दिल को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाते हैं, लेकिन इसी के एक महीने के भीतर, मैंने दिल को इससे भी ज्यादा आहत करनेवाली खबर सुनी.

मेरा दोस्त क्रिस, जिसके साथ खींची फोटो मैंने आपको अभी दिखाई थी, वह कुछ समय से मानसिक रोग से लड़ रहा था. और आप लोगों में से वे जिनके जीवन को मानसिक रोग ने किसी भी तरह से प्रभावित किया है, वे समझ सकते हैं कि यह कितना चुनौतीपूर्ण है. एक रविवार की रात को मैंने उससे फोन पर 10:30 बजे बात की. हमने एक टीवी कार्यक्रम के बारे में बात की जो हमने उस शाम को देखा था. सोमवार की सुबह मुझे पता चला कि क्रिस इस दुनिया में नहीं रहा. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उसने आत्महत्या कर ली. वह समय मेरे लिए बहुत कठिन था.

ऐसे ही काले बादल मेरी ज़िंदगी पर छाये हुए थे, और ऐसे में कुछ भी बेहतर करने के बारे में सोचना बहुत मुश्किल लग रहा था, तब मैंने यह तय किया कि मुझे कैसे भी करके सकारात्मक चीज़ों पर ही ध्यान देना चाहिए. तो एक रात मैं जब काम से वापस आया, मैंने अपना कम्प्युटर चालू किया, मैंने एक छोटी सी वेबसाईट 1000awesomethings.com बनाई. मैं स्वयं को सरल, सहज, सार्वत्रिक छोटी-छोटी खुशियों की याद दिलाना चाहता था जिन्हें हम पसंद करते हैं, पर जिनके बारे में हम ज्यादा बात नहीं करते — वे चीज़ें जैसे होटल में वेटरों द्वारा कुछ कहे बिना ही मुफ़त में ज्यादा सर्व कर देना, किसी विवाह भोज में सबसे पहले भोजन करने का आमंत्रण मिलना, ड्रायर से हाल में ही निकला गरम अंडरवियर पहनना, और जैसे ही ग्रोसरी स्टोर में एक बंद पड़ा भुगतान काउंटर खुल जाता है तो लपक के उस लाइन में सबसे पहले नंबर पर खड़े हो जाना – भले ही हम पिछली लाइन में सबसे पीछे खड़े थे, वहां फ़ौरन झपट्टा मारना.

1000 awesome thingsसमय बीतते-बीतते मुझे यह सब अच्छा लगने लगा. आप जानते हैं कि हर दिन नए ब्लॉग बन रहे हैं. और मेरा ब्लॉग भी उन 50,000 में से एक था. मेरी माँ को छोड़कर उसे कोई नहीं पढता था. हांलांकि मुझे यह कहना चाहिए कि मेरे ब्लॉग का ट्रेफिक रॉकेट की तरह 100% बढ़ गया जब मेरी माँ ने मेरे पिता को इसे पढ़ने के लिए सुझाया. जब इसपर रोजाना दसियों हिट्स आने लगीं तो मैं उत्साहित हो गया. फिर मुझे इसपर दर्ज़नों, सैंकड़ों, हज़ारों, और फिर लाखों हिट्स मिलने शुरू हो गए तो मैं और अधिक जोश में आ गया. यह और अधिक विशाल और विस्तृत होता गया. और फिर एक दिन मुझे एक फोन आया, और फोन के दूसरे सिरे पर किसी ने मुझसे कहा, “आपको दुनिया के सबसे शानदार ब्लॉग का पुरस्कार मिला है”. ये कुछ ऐसा था जैसे ये कोई फ़र्जी फोन कॉल हो! आप किस अफ्रीकी देख में अपना सारा पैसा भिजवाना चाहते हैं? लेकिन यह सच था और मैं हवाई जहाज पे सवार हुआ, और कुछ ही समय के भीतर मैं सारा सिल्वरमैन, जिम्मी फैलन, और मार्था स्टीवर्ट के साथ रेड कारपेट पर चल रहा था. और इस तरह मैं बैस्ट ब्लॉग के लिए वेबी अवार्ड लेने के लिए स्टेज पर चढ़ा. और इस सबसे होने वाली हैरत और विस्मय तब छोटी पड़ गयीं जब टोरंटो लौटने पर मुझे मेरे मेलबौक्स में 10 प्रकाशन एजेंटों के प्रस्ताव मिले जो इसे किताब के रूप में छापने के लिए मुझसे मिलना और बात करना चाहते थे. हम अगले साल में कूद पड़ें तो मेरी किताब “The Book of Awesome” लगातार बीस हफ़्तों तक नंबर एक की बैस्ट सैलर बन चुकी थी.

देखिये, मैंने कहा था कि आज मैं आपको तीन बातें बताना चाहता हूँ. मैंने कहा था कि मैं आपको ‘शानदार’ (Awesome) कहानी बताना चाहता था, मैं आपको ‘A’ से शुरू होनेवाली उन तीन चीज़ों के बारे में बताकर आपकी सोच को जागृत करना चाहता था. तो मैं आपको उन तीन चीज़ों के बारे में बताता हूँ.  पिछले कुछ सालों के दौरान, मुझे अच्छे से सोच-विचार करने के लिए समय नहीं मिल सका. पर हाल ही में मुझे थोड़ा ठहरकर सोचने का अवसर मिला और मैंने खुद से पूछा: पिछले कुछ सालों में ऐसा क्या हुआ जिससे न केवल मेरी वेबसाईट प्रसिद्द हो गयी, बल्कि मुझमें भी विकास हुआ. फिर मैंने अपने व्यक्तित्व के अनुसार मुख्यतः तीन चीज़ें चुनीं, जिन्हें मैं तीन A’s कहता हूँ. वे हैं attitude (नजरिया), awareness (जागरूकता) और authenticity (प्रमाणिकता). मैं आपको इन तीनों के बारे में संक्षेप में बताऊंगा.

attitude quoteनजरिया के बारे में, देखिये, हम सभी गिरते-पड़ते हैं, और चोट खाते हैं. हम लोगों में से कोई भी भविष्य का कथन नहीं कर सकता, लेकिन एक बात हम जानते हैं वह यह है कि हमारी योजनाओं के अनुसार कुछ नहीं होता. हम सभी भरपूर ख़ुशी और मजे के साथ अपने पास कॉलेज से निकलने, शादियों में डांस करने, और डिलीवरी रूम के भीतर से स्वस्थ बच्चे के चिल्लाकर रोने जैसे गर्वीले लम्हों पर मुस्कुराते हैं, लेकिन इन बेहतरीन लम्हों के बीच कहीं कोई दर्द, कोई कसक भी बनी रहतीं हैं. यह दर्दनाक है और इसके बारे में बात करना अच्छा नहीं लगता, पर किसी का पति उसे छोड़ सकता है, किसी की प्रेमिका बेवफा निकल सकती है, आपका सिरदर्द किसी भयानक बीमारी में तब्दील हो सकता है, या सड़क पर कोई गाड़ी आपके कुत्ते को टक्कर मार सकती है.

ये कोई अच्छा विचार नहीं है, पर आपके बच्चे बुरे लोगों के साथ या गलत जगहों में फंस सकते हैं. आपकी माँ को कैंसर हो सकता है, आपके पिता बेहद स्वार्थी निकल सकते हैं. और ऐसा भी हो सकता है कि यह ज़िंदगी आपको अंधे कुँए में धकेल दे, और आपके पेट में निवाला न हो या दिल में कोई बीमारी घर कर ले. और जब कभी ऐसे बुरी ख़बरें आपको झकझोर दें, ऐसे दर्द आपको पछाड़ दें, तब मैं यह उम्मीद करता हूँ कि आपके पास हमेशा दो विकल्प होने चाहिए. पहला, आप दबें, टूटें, गिरें, और खाक में मिल जाएँ, या दूसरा, आप शोक मनाएं और उठकर भविष्य को नयी दृष्टि से देखें. बड़ा नजरिया रखने का संबंध दूसरे विकल्प से है, और इसका चयन करने से है भले यह कितना ही कठिन हो. आपको कितनी ही गहरी चोट क्यों न लगी हो, आगे बढ़ने के विकल्प का चुनाव करना भविष्य की ओर नन्हा कदम बढ़ाने जैसा ही है.

अब हम जागरूकता की बात करेंगे. मुझे तीन-वर्षीय बच्चों के साथ खेलना पसंद है. मैं उनके दुनिया देखने के तरीके को पसंद करता हूँ, क्योंकि वे इससे पहली बार मुखातिब हो रहे हैं. सड़क के किनारे रेंगते कीड़े को वे जिस कौतूहल से देखते हैं वह मुझे अच्छा लगता है. मुझे अच्छा लगता है जब वे बेसबाल के पहले गेम में हैरत से मुंह बाए हुए, हॉटडॉग्स और पीनट्स खाते हुए अपनी आँखें गेंद पर टिकाकर हांथों में दास्ताने पहनकर बल्ले की दरार को टटोलते हैं. मुझे अच्छा लगता है जब वे पिछवाड़े में देर-देर तक फूल चुनते हैं और फिर उन्हें थैंक्सगिविंग डिनर के लिए सैंटरपीस पर सजाते हैं. मैं दुनिया को देखने के उनके तरीके को पसंद करता हूँ, क्योंकि वे इस दुनिया को पहली बार देख रहे हैं. मन में जागरूकता का भाव जगाने का संबंध अपने भीतर उस तीन-वर्षीय बालक का अनुभव करने से है. क्योंकि हम सभी किसी समय तीन साल के थे. तीन-वर्षीय वह बच्चा अभी भी हमारा ही अंश है. वे सब यहीं हैं. और जागरूक होने का तात्पर्य यह याद करने में है कि हमने भी हर वस्तु कभी सबसे पहली बार देखी थी. तो ऐसा कभी पहले हुआ था जब आपने ऑफिस से घर लौटते समय सड़क पर लगातार कई हरी लाइटें पार कीं. ऐसा भी कभी पहली बार ही हुआ जब आप बेकरी के भीतर गए और उसकी नायाब गंध ने आपका मन मोह लिया, या ऐसा पहली बार हुआ जब आपको पुरानी जैकेट की जेब में 20 डॉलर का नोट मिल गया और आप चहक उठे, “मुझे पैसे मिले!”

तीसरी बात है प्रामाणिकता. इसे बताने के लिए मैं आपको एक कहानी सुनाना चाहूँगा. चलिए हम अतीत में 1932 में जाते हैं जब जॉर्जिया के एक मूंगफली फ़ार्म में, रूजवेल्ट ग्रीयर नामक एक बालक का जन्म हुआ. रूजवेल्ट ग्रीयर को लोग रोजी ग्रीयर भी बुलाते थे, वह जब बड़ा हुआ तो NFL फुटबाल लीग में 300 पौंड वजनी छः फुट पांच इंच लंबा लाइनब्रेकर बना. इस फोटो में उसने 76 नंबर की शर्ट पहनी है. यहाँ इस चित्र में वह “चार-खूंखार” (Fearsome Foursome) में से एक है. ये चारों 1960 के दशक में L.A. Rams में थे जिनसे भिड़ना बहुत खतरनाक था. वे फुटबाल के प्रेमी खिलाड़ी थे जिनका शौक था फ़ुटबाल के मैदान में कंधों से कंधे मिलाकर लोगों की हड्डियाँ चटकाना.

rosey grierलेकिन रोजी ग्रीयर का एक और शौक था, अपने दिल की गहराइयों से, उसे नीडलपॉइंट (बुनाई-कढ़ाई) करना पसंद था. उसे बुनाई-कढ़ाई से प्रेम था. वह कहता था कि उसे इससे शांति मिलती थी, सुकून मिलता था, इसने उसके दिल से उड़ान का डर निकल दिया और हसीनाओं से दोस्ती करने में मदद की. यह सब उसने ही कहा था. उसे इस सबसे इतना प्रेम था कि NFL से रिटायरमेंट लेने के बाद उसने बुनाई-कढ़ाई क्लब ज्वाइन कर लिया. और उसने एक किताब भी लिखी, “पुरुषों के लिए रोजी ग्रीयर की नीडलपॉइंट पुस्तक” (Rosey Grier’s Needlepoint for Men). इस किताब के शानदार कवर पर, यदि आप गौर करें, वह स्वयं का चेहरा ही काढ़ रहा है.

इस कहानी में मुझे यह पसंद है कि रोज़ी ग्रीयर असल में बहुत प्रामाणिक, बहुत जेनुइन आदमी है. और वास्तविक प्रामाणिकता ऐसी ही होती है. इसका अर्थ है कि भीतर से आप जैसे हैं उसमें ख़ुशी पायें. और मुझे लगता है कि जब आप प्रामाणिक होते हैं तब आप अपने दिल की राह पर चलते हैं, और आप उन स्थानों, परिस्थितियों, और वार्तालापों में रूझान लेते हैं जिन्हें आप पसंद करते हैं और जिनका आप आनंद लेना चाहते हैं. आप उन लोगों से मिलते हैं जिनसे बातें करना आपको अच्छा लगता है. आप उन जगहों पर जा आते हैं जिनका आप सपना देखते हैं. आप अपने दिल की मानते हैं
और संतृप्त, संतुष्ट अनुभव करते हैं. यही इन तीन बातों का सार है.

समापन से पहले मैं आपको मेरे माता-पिता के कनाडा आगमन के दौरान ले जाना चाहूँगा. मैं नहीं जानता कि बीस साल की उम्र के दौरान किसी नए देश में जाकर रहने की अनुभूति कैसी होती है. मुझे नहीं मालूम, क्योंकि मैंने ऐसा कभी नहीं किया. लेकिन मेरी कल्पना है कि मैं ऐसा बड़े खुले नज़रिए के साथ करूंगा. मैं कल्पना करता हूँ कि ऐसे में हमें अपने परिवेश के प्रति बहुत चौकस रहना पड़ता है और इस नयी दुनिया के छोटे-छोटे करिश्मों का मोल आंकना पड़ता है जो हम देखनेवाले हैं. मुझे यह भी लगता है कि हमें बहुत प्रामाणिक रहना पड़ता है, हमें अपने प्रति ईमानदार रहना पड़ता है ताकि हम नए परिवर्तनों का बेहतरी से सामना कर सकें. मैं अपनी TEDTalk को दस सैकंड के लिए रोकना चाहूँगा क्योंकि हमें जीवन में यह करने के मौके बार-बार नहीं मिलते, और मेरे माता-पिता पहली पंक्ति में बैठे हुए हैं. यदि उन्हें बुरा न लगे, तो मैं चाहता हूँ कि वे खड़े हों. और मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूँ.

buffetजब मैं बड़ा हो रहा था, मेरे पिता अक्सर मुझे अपने कनाडा आगमन के पहले दिन के किस्से सुनाया करते थे. पहले दिन की बातें बताते थे. यह बहुत रोचक कहानी है, क्योंकि हुआ यह कि वे टोरंटो एयरपोर्ट पर विमान से उतरे, और एक नौन-प्रौफिट समूह ने उनका स्वागत किया, जिसे, मुझे यकीन है, इस कमरे में मौजूद कोई व्यक्ति ही चलाता है. और इस नौन-प्रौफिट समूह ने कनाडा आनेवाले आप्रवासियों के स्वागत में एक भोज का आयोजन किया था. और मेरे पिता बताते हैं कि विमान से उतरने के बाद वे सीधे उस भव्य भोज में पहुंचे. वहां पर ब्रेड थी, डिल का बारीक अचार, जैतून, और छोटे सफ़ेद प्याज भी थे. वहां टर्की और हैम के कोल्ड-कट रोल थे, भुने हुए बीफ के कोल्ड-कट रोल, और छोटे-छोटे चीज़ क्यूब्स भी थे. वहां पर टूना सलाद सैंडविच, और एग सलाद सैंडविच थे, और सालमन सलाद सैंडविच भी थे. वहां लाजान्या था, कैसेरोल थे, ब्राउनीज़ थीं, बटर टार्ट्स थे, पाईज़ भी थीं, तरह-तरह की पाईज़ थीं! और जब मेरे पिता मुझे यह बताते हैं, वे कहते हैं, “मजेदार बात यह थी कि ब्रेड को छोड़कर मैंने उनमें से कोई भी चीज़ पहले कभी देखी भी नहीं थी! मुझे पता नहीं था कि कौन सी डिश मीटवाली और कौन सी शाकाहारी थी; मैं जैतून को पाईज़ के साथ खा रहा था. “मैं यकीन ही नहीं कर सकता था कि वहां इतनी तरह की चीज़ें हो सकतीं थीं!”

जब मैं पांच साल का था, तब मेरे पिता मुझे ग्रॉसरी स्टोर तक शॉपिंग के लिए लेकर जाते थे. और वे वहां फलों और सब्जियों पर लगे स्टीकर्स को आश्चर्य से देखते थे. वे कहते थे, “देखो, यकीन नहीं होता कि ये आम मैक्सिको से आये हैं! और ये सेब साउथ अफ्रीका से यहाँ तक आये हैं. क्या तुम यकीन कर सकते हो कि ये खजूर मोरक्को के हैं?” वे फिर कहते, “क्या तुम्हें पता है कि मोरक्को कहाँ है?” और मैं कहता, “मैं तो सिर्फ पांच साल का हूँ और मुझे यह भी नहीं पता कि हम कहाँ हैं. क्या यह A&P स्टोर है?” फिर वह कहते, “मुझे भी नहीं पता कि मोरक्को कहाँ है, चलो मिलकर ढूंढें”. तो खजूर खरीदकर हम दोनों घर वापस चले गए. और हमने सच में शेल्फ से एटलस निकाली, और इसमें तबतक ढूंढते रहे जब तक हमें वह रहस्यमय देश नहीं मिल गया. और जब हमने उसे ढूंढ लिया, तब मेरे पिता ने कहा, “क्या तुम यकीन कर सकते हो कि वहां कोई आदमी पेड़ पर चढ़ा, उसने खजूर तोड़े, उन्हें ट्रक में रखा, और बंदरगाह तक लेकर आया, फिर वे जहाज में तैरते हुए अटलांटिक सागर के पार आ गए,  यहाँ उन्हें दूसरे ट्रक में उतारकर हमारे घर के बाहर उस छोटे से ग्रोसरी स्टोर तक लाया गया, ताकि वे इसे 25 सेंट्स में बेच सकें”. और मैंने कहा, “मुझे यकीन नहीं होता!” मेरे पिता बोले, “मुझे भी यकीन नहीं होता! ये बातें कितनी अद्भुत हैं! खुश रहने के लिए दुनिया में बहुत सी चीज़ें हैं!”

जब मैं ठहरकर इसके बारे में सोचता हूँ तो उन्हें सही पाता हूँ; यहाँ खुश रहने के लिए बहुत सी चीज़ें हैं. जहाँ तक हम जानते हैं, केवल हम ही पूरे ब्रह्माण्ड में इस पृथ्वी पर ऐसी प्रजाति हैं जो इतनी सारी ऐसी चीज़ों का अनुभव कर सकते हैं. मेरा मतलब है, केवल हम ही स्थापत्य और कृषि के बारे में जानते हैं. केवल हमें ही आभूषणों और लोकतंत्र के बारे में पता है. हमारे पास वायुयान हैं, हाइवे लेन हैं, इंटीरियर डिजाइन और राशियों के चिह्न हैं. हमारे पास फैशन पत्रिकाएं हैं और घरेलू पार्टियों के दृश्य हैं. हम भयानक दैत्यों वाली डरावनी फ़िल्में देख सकते हैं. हम शास्त्रीय संगीत और धुंआधार गिटार वादन सुन सकते हैं. हमारे पास, किताबें, स्वल्पाहार, रेडियो तरंगें, खूबसूरत दुल्हनें और रोलरकोस्टर सवारी हैं. हम निर्मल चादरों पर सो सकते हैं. हम फ़िल्में देखने जा सकते हैं और अच्छी सीट पा सकते हैं. हम बेकरी की गंध महसूस कर सकते हैं, बारिश में बाल तर कर सकते हैं, बबल पैक फोड़ सकते हैं और, चोरी से एक झपकी ले सकते हैं.

appleहमारे पास इतना कुछ है, पर इसका मजा लेने के लिए बमुश्किल 100 साल ही मिलते हैं. यही बात सबसे बुरी है. ग्रोसरी स्टोर पर बैठा कैशियर, फैक्ट्री का फोरमैन, हमारी गाड़ी से सटाकर गाड़ी चलाते ड्राइवर, भोजन के वक़्त फोन करनेवाले कॉल सेंटर कर्मी, हमें पढ़ा चुके हर शिक्षक, हमारे करीब जागने वाले शख्स, हर देश के राजनेता, हर फिल्म के कलाकार, हमारे परिवार का हर व्यक्ति, हर व्यक्ति जिससे आप प्यार करते हैं, इस कमरे में मौजूद हर आदमी, और आप 100 सालों के भीतर चल बसेंगे. ज़िंदगी बहुत खूबसूरत है पर हमें इसे मीठा बनानेवाले छोटे-छोटे लम्हों का लुत्फ़ उठाने और इसका अनुभव लेने के लिए बहुत कम समय मिलता है. और यही वह समय है, और ये लम्हें छूटते जा रहे हैं, ये लम्हे हमेशा, हमेशा, हमेशा, पल भर में बिखर जाते हैं.

आप आज जितने जवान फिर कभी नहीं होंगे. इसलिए मेरा विश्वास है कि यदि जीवन में आप बड़ा नजरिया रखकर, आगे बढ़ने का तय करके, जिंदगी की हर दुश्वारियों से लड़कर, अपनी दुनिया में हो रही हलचल की जागरूकता के साथ अपने भीतर के तीन-वर्षीय बालक को गले से लगायेंगे और अपने प्रति ईमानदार और प्रामाणिक रहकर जीने के लिए ज़रूरी छोटे-छोटे सुख उठाएंगे, और आप जैसे हैं उसी में ख़ुशी तलाशकर उन कामों को अंजाम देंगे जिन्हें दिल से करने में आप भरपूर आनंद पाते हैं, तो मुझे लगता है कि आप परिपूर्ण और संतुष्टिदायक जीवन जियेंगे और मेरी नज़र में ऐसी ज़िंदगी वाकई शानदार और कमाल की होगी.

धन्यवाद.

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 10 comments

  1. arvind mishra

    निशांत जी आपके इस काम ने मुझे कायल कर दिया …
    यह बहुत काम की जानकारी आपने निःस्वार्थ भाव से अपने ब्लॉगर मित्रों से शेयर की…बहुत आभार!
    थ्री ऐ का फार्मूला याद रहेगा -अनुवाद बहुत सहज है ..समझ सकता हूँ बड़ी मेहनत किया होगा आपने ..
    ऐसे शख्स को भी सुनना पड़ गया ,वह भी पत्नी से की वो उसे प्यार नहीं करती ….
    मैं सोच रहा हूँ उसकी पत्नी की भी कुछ खोज खबर ली जाय -वुड यू प्लीज हेल्प?

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    1. Nishant

      मैं सोच रहा हूँ उसकी पत्नी की भी कुछ खोज खबर ली जाय -वुड यू प्लीज हेल्प?

      छोड़िये भी मिश्र जी, नहीं तो परदेस की नारियां भी आपके पीछे हाथ धोकर पड़ जायेंगीं 🙂

      Like

  2. Rajiv

    शानदार पोस्ट निशांत जी,
    एक से बढ़ के एक उदाहरण , बेहद रोचक प्रसंग
    ध्यान देनी वाली बातें हैं, अगर आप छोटी छोटी बातों से खुश होना सीख ले तो जिंदगी कभी भी आपको निराश नहीं कर सकती
    ~R

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  3. dr.bhoopendra singh

    bandhu,I can understand the labour that u put for all these good things that u present.I ahve a proposal for u.We should arrange the matter copyright free in shape of book.I will edit it ,arrange it and make it presentable.You will add pictures,graphs etc to add spice to the content.
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    WITH REGARDS,
    DR.BHOOPENDRA

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  4. विवेक गुप्ता

    बहुत प्रेरणादायक कहानी. या कहें कि सत्यकथा. हम सब तक पहुंचाने के लिए आपका आभार. जीवन की सार्थकता इसी में है कि ठोकर लगने के बाद आप और भी अच्छे हो जाएं. लेकिन बहुत सारे लोग बुरे बनने का विकल्प चुनते हैं. अपनी मुश्किलों के लिए दुनिया से बदला लेना चाहते हैं. नील हम सब के लिए मिसाल हैं. आभार.

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