सकारात्मकता की राह पर…

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मैं बहुत ज्यादा पौज़िटिव शख्स नहीं हूँ. मौके-बेमौके मैं झुंझला जाता हूँ और मुझसे काम निकलवाने के लिए घर में और दफ्तर में, दोनों जगह सामनेवाले को अक्सर मेरे सर पर सवार रहना पड़ता है. मेरे पाठकों को यह लग सकता है कि इस बेहद प्रेरक और मोहक ब्लॉग को दो सालों से भी ज्यादा समय से चलाने के बाद भी मैं यह क्यों कह रहा हूँ – लेकिन यह सच है. इसके बावजूद जब मैं अपनी तुलना तीन साल पहले के निशांत से करता हूँ तो मुझे बहुत ख़ुशी होती है क्योंकि मैंने इस बीच स्वयं में बहुत सार्थक परिवर्तन का अनुभव किया है. मेरा बात-बात पर खीझना, कमियां निकालना और गुस्सा करना कम हुआ है, मैं अपनी चीज़ों की हिफाज़त करने लगा हूँ और उन्हें ठीक से रखता-सहेजता हूँ. सबसे अच्छी बात तो यह है कि मेरा खर्च कम हुआ है और मैं अधिक संतोषी जीव बन गया हूँ. जीवन में इसी प्रकार के पौज़िटिव परिवर्तन पहले आ जाते तो बहुत अच्छा होता लेकिन अभी भी कोई देर तो नहीं हुई है!

लेकिन अभी बहुत कुछ है जिसकी ओर ध्यान देना ज़रूरी है. ज़िंदगी, नौकरी, नाते-रिश्ते, और भागमभाग – इन सबके चलते मन में बहुत सी नकारात्मकता और कड़वाहट रह जाती है जो हमारी तरक्की और ख़ुशी के रास्ते में आड़े जाती है. ऐसे में मुझे श्री प्रवीण पाण्डेय जी की वह बात बहुत याद आती है जो उन्होंने पिछले महीने मुझे दिल्ली में कही थी. सरल और सौम्य व्यक्तित्व के स्वामी प्रवीण जी ने सच ही कहा था कि हमारे कथनों और वचनों में उपस्थित थोड़ी सी भी नकारात्मकता हमें पीछे धकेलती है. यदि मैं बेहतर लेखन नहीं कर पा रहा तो स्वयं से यह कहते रहना कि ‘मैं अच्छा नहीं लिख सकता’ स्वयं को नकारात्मक सुझाव देना है. तो फिर ऐसे में क्या कहना चाहिए? ‘मैं अच्छा लिखूंगा’ या ‘मैं अच्छा लिख सकता हूँ’ हमारे मनस को प्रेरित करता है. एक थैरेपी भी होती है जिसे ऑटोसजेस्टिव थैरेपी कहते हैं. इसमें बस इतना ही ध्यान रखना होता है कि कोई नकारात्मक विचार मन पर हावी न होने पाए. असाध्य रोगों से लड़ रहे कुछ व्यक्तियों का जीवट इतना सशक्त होता है कि वे अतिविकट परिस्थितियों में भी कई बार मौत के करीब जाकर भी पूर्णतः स्वस्थ हो जाते हैं जबकि बहुत से भीरुमना व्यक्ति मामूली चोटों और खरोंचों से ही नहीं उबर पाते.

मुझे भी यह लगने लगा है कि ह्रदय और मन में सकारात्मकता का होना सफलता पाने के लिए बहुत ज़रूरी है. सफलता – क्या और क्यों? इस विषय पर तो जाने कितना लिखा जा सकता है. सफलता और सफल होने  के सबके अर्थ भिन्न हो सकते हैं. मेरे लिए सफल होने के मानी ये हैं कि मैं आत्मिक, पारिवारिक, और आर्थिक मोर्चों पर कितना परिपक्व हूँ – यदि मैं किन्ही चीज़ों को पाना चाहता हूँ तो उन्हें पाने की दिशा में मैं कितना प्रयत्न कर सकता हूँ या कितना खतरा उठा सकता हूँ. यदि कुछ सोचा हुआ आशातीत मेरे साथ घटित न हो तो उस दशा में मेरी प्रतिक्रिया क्या होगी – मेरी सफलता का प्रत्यय इन्हीं प्रश्नों से जुड़ा है.

सकारात्मकता जीवन को रूपांतरित कर सकती है. इसे केवल इस वेबसाईट की कहानियां या कोई दूसरी किताब पढ़कर ही अपने जीवन में नहीं उतारा जा सकता. इसके लिए कुछ छोड़ना, कुछ जतन करना, कुछ अपनाना भी पड़ता है. पिछले पंद्रह वर्षों से सकारात्मकता और प्रेरक विचारों की पुस्तकों की रिकौर्ड़तोड़ बिक्री हुई है पर लाखों पाठक अपने में वह बदलाव नहीं ला सके जिसकी वे अपेक्षा करते थे. ऐसा होने के पीछे कई कारण और परिस्तिथियाँ हैं पर इस पोस्ट में उनकी चर्चा नहीं की जा रही है. सकारात्मकता और प्रेरणा पर मेरे प्रिय ब्लौगर द्वारा लिखे गए सूत्र मैं यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ. मुझे इनकी उपादेयता अनुभूत होती है और आपके लिए भी ये समान रूप से उपयोगी होंगे.

* ‘मैं यह नहीं कर सकता’, खुद से यह कहने के बजाय स्वयं को समझाएं कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है.

* यह ध्यान दें कि आप खुद से क्या बातें करते रहते हैं.

* नकारात्मक विचारों को मच्छर की तरह मसल दें.

* उनकी जगह सकारात्मक विचारों को उड़ान भरता देखे.

* आपके पास जो कुछ भी है उससे प्रेम करें.

* अपने जीवन, परिजन, और स्वास्थ्य के लिए आभारी रहें.

* आपके पास जो है उसपर ध्यान दें, जो नहीं हो उसकी चिंता नहीं करें.

* दूसरों से अपनी तुलना नहीं करें.

* लेकिन उनसे प्रेरणा ज़रूर लें.

* आलोचना को खुले दिल से स्वीकार करें.

* लेकिन निंदकों को नज़रंदाज़ कर दें.

* बुरी बातों में भी अच्छाई छुपी हो सकती है.

* असफलता रास्ते का वह पत्थर है जिसपर खड़े होकर सफलता की ओर बढ़ा जा सकता है.

* उन लोगों की बीच रहें जो पौज़ितिव तरंगें बिखेरते हों.

* शिकायत कम करें, मुस्कुराएँ ज्यादा.

* यह कल्पना करें कि आप दिनों-दिन निखरते जा रहे हैं.

* और अगले चरण में वही व्यक्ति बन जाएँ.

* सबसे पहले अपनी आदतों पर ध्यान दें, फिर आपके पास दूसरी बातों पर ध्यान देने के लिए पर्याप्त समय होगा.

“आप कहीं भी जाएँ और मौसम कितना भी खराब क्यों न हो, अपना सूरज अपने साथ लेकर चलें”.

“मुझे पसंदीदा जूते नहीं मिलने का मलाल था… लेकिन फिर मैंने सड़क पर एक शख्स देखा जिसके पैर ही नहीं थे”.

“यदि आपको यह लगता है कि हर दिन बुरा दिन है तो क्या आप कभी एक दिन को खोकर देखना चाहेंगे?”

“हर दिन अच्छा नहीं होता लेकिन हर दिन कुछ-न-कुछ अच्छा ज़रूर होता है”.

“यदि आपको कुछ नापसंद हो तो उसे बदल दें. यदि आप उसे बदल नहीं सकते तो उसके बारे में सोचने का तरीका बदल दें.”

“हर बात में सिर्फ दोष ढूँढने वाले व्यक्तियों को ही ज़िंदगी में वह सब मिल पाता है जो वह ढूंढना चाहते हैं”.

“हर विचार एक बीज है. यदि आप आम खाना चाहते हों तो बबूल का बीज मत बोइये”.

“हम सभी गटर में हैं लेकिन हम लोगों में से कुछ की आँखें ऊपर आकाश में तारों को ताकती रहतीं हैं”.

“वह धन्य है जिसके मन में कोई चाह नहीं है, क्योंकि वह कभी भी निराश नहीं होगा”.

“पराजय तभी कड़वी होती है जब आप उसका स्वाद चखना चाहते हों”.

“नकारात्मक मनोदशा रखना ही एकमात्र विकलांगता है”.

“स्वर्ग की चाबी सबके पास है, दुर्भाग्यवश नरक का ताला भी उसी से खुल जाता है”.

(इस पोस्ट का कुछ अंश लियो बबौटा की इस पोस्ट से लिया गया है)

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 20 comments

  1. nirmla.kapila

    निशांत जी सच मे आपके ब्लाग पर आ कर एक शान्ति सी मिलती है और बोध कथायें पढ कर जीनी के लिये सूत्र मिलते हैं। बहुत दिन बाद आ पाई हूँ और लगता है बहुत कुछ खो दिया है। पढूँगी सब कुछ। धन्यवाद और शुभकामनायें।

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  2. sandhya

    नमस्कार जी , आपको संक्रांति की ढेरो शुभकामनायें . बहुत ही सरल , ईमानदारी से लिखा हुआ लेख जिसे मै अपने बेटे के कमरे में प्रिंट नक़ल कर रखना चाहूंगी और जिसे कम से कम एक बार वह मनन जरूर करे . धन्यवाद्

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  3. वाणी गीत

    कैसा भी दुखी इंसान यदि थोड़ी देर जबरदस्ती मुस्कुराये तो धीरे धीरे मुस्कुराना उसका स्वाभाव हो जाता है , और फिर वह दिल से मुस्कुराने लगता है …बहुत कुछ ऐसा ही सकारात्मक सोच का मामला भी है …
    वाकई संग्रहणीय पोस्ट है !

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  4. रंजना

    शरीर सञ्चालन के लिए हवा पानी अन्न आदि की आवश्यकता होती है,पर जीवन चलाने के लिए सात्विक सकारात्मक विचार सोच की आवश्यकता होती है,क्योंकि मन मस्तिष्क का आहार सोच और विचार ही होता है..साधन नहीं,सकारात्मक नकारात्मक मनोदशा ही जीवित रहते सुख दुःख रूपी स्वर्ग या नर्क जीवन में बिछाती है…

    आपकी प्रेरणादायक पोस्ट मुझे सदैव खींचकर आपके ब्लॉग तक ले आती है..और यहाँ से जाने से पहले आपके लिए मन से स्वतः ही अनंत शुभकामना और आभार निकल जाता है…

    सदा ऐसे ही रहे…सकारात्मकता का प्रसार करते रहें…

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  5. rafat alam

    निशांत जी ये सब कॉपी कर अपने पास भी रखलिया है समय समय पर अवसादपलों में उर्जा लेने के लिए और आपके साथ प्रवीण जी की सलाह बहुत अच्छी लगी – * ‘मैं यह नहीं कर सकता’, खुद से यह कहने के बजाय स्वयं को समझाएं कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है.
    * यह ध्यान दें कि आप खुद से क्या बातें करते रहते हैं.
    * नकारात्मक विचारों को मच्छर की तरह मसल दें.
    * उनकी जगह सकारात्मक विचारों को उड़ान भरता देखे.
    * आपके पास जो कुछ भी है उससे प्रेम करें.
    * अपने जीवन, परिजन, और स्वास्थ्य के लिए आभारी रहें.
    * आपके पास जो है उसपर ध्यान दें, जो नहीं हो उसकी चिंता नहीं करें.
    * दूसरों से अपनी तुलना नहीं करें.
    * लेकिन उनसे प्रेरणा ज़रूर लें.
    * आलोचना को खुले दिल से स्वीकार करें.
    * लेकिन निंदकों को नज़रंदाज़ कर दें.
    * बुरी बातों में भी अच्छाई छुपी हो सकती है.
    * असफलता रास्ते का वह पत्थर है जिसपर खड़े होकर सफलता की ओर बढ़ा जा सकता है.
    * उन लोगों की बीच रहें जो पौज़ितिव तरंगें बिखेरते हों.
    * शिकायत कम करें, मुस्कुराएँ ज्यादा.
    * यह कल्पना करें कि आप दिनों-दिन निखरते जा रहे हैं.
    * और अगले चरण में वही व्यक्ति बन जाएँ.
    * सबसे पहले अपनी आदतों पर ध्यान दें, फिर आपके पास दूसरी बातों पर ध्यान देने के लिएपर्याप्त समय होगा.
    “आप कहीं भी जाएँ और मौसम कितना भी खराब क्यों न हो, अपना सूरज अपने साथ लेकर चलें”.
    “मुझे पसंदीदा जूते नहीं मिलने का मलाल था… लेकिन फिर मैंने सड़क पर एक शख्स देखा जिसके पैर ही नहीं थे”.
    “यदि आपको यह लगता है कि हर दिन बुरा दिन है तो क्या आप कभी एक दिन को खोकर देखना चाहेंगे?”
    “हर दिन अच्छा नहीं होता लेकिन हर दिन कुछ-न-कुछ अच्छा ज़रूर होता है”.
    “यदि आपको कुछ नापसंद हो तो उसे बदल दें. यदि आप उसे बदल नहीं सकते तो उसके बारे में सोचने का तरीका बदल दें.”
    “हर बात में सिर्फ दोष ढूँढने वाले व्यक्तियों को ही ज़िंदगी में वह सब मिल पाता है जो वह ढूंढना चाहते हैं”.
    “हर विचार एक बीज है. यदि आप आम खाना चाहते हों तो बबूल का बीज मत बोइये”.
    “हम सभी गटर में हैं लेकिन हम लोगों में से कुछ की आँखें ऊपर आकाश में तारों को ताकती रहतीं हैं”.
    “वह धन्य है जिसके मन में कोई चाह नहीं है, क्योंकि वह कभी भी निराश नहीं होगा”.
    “पराजय तभी कड़वी होती है जब आप उसका स्वाद चखना चाहते हों”.
    “नकारात्मक मनोदशा रखना ही एकमात्र विकलांगता है”.
    “स्वर्ग की चाबी सबके पास है, दुर्भाग्यवश नरक का ताला भी उसी से खुल जाता है”…..आनंद आ गया बहुत धन्यवाद

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  6. के पॉजिटिव

    “आप सकारात्मक है,अगर आपके कदम सकारात्मकता में है |”
    सकारात्मक सोच रखना और सकारात्मक जीवन जीना यह इस बात पर निर्भर करता है की, क्या आप एक आशावादी व्यक्ति है,या निराशावादी | क्युकी आशावादी व्यक्ति ही वे होते है जो असफलता में भी सफलता में बदल डालते है,तो मुसीबतों को भी नए और अवसर खोज निकलते है|
    निशांत जी- आप युही सकारात्मक लेख लिखते रहें, और ज़रूरत मंद लोगो तक अपने ताकतवर और सकारात्मक सन्देश पहुचाते रहें इसके लिए मै प्रार्थना करूँगा…
    सकारात्मकता का एक सन्देश ये भी पड़े…
    http://www.k-positive.in/?p=425

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