सत्य का स्वाद

mangoes

एक राजा ने एक महात्मा से कहा – “कृपया मुझे सत्य के बारे में बताइये. इसकी प्रतीति कैसी है? इसे प्राप्त करने के बाद की अनुभूति क्या होती है?”

राजा के प्रश्न के उत्तर में महात्मा ने राजा से कहा – “ठीक है. पहले आप मुझे एक बात बताइए, आप किसी ऐसे व्यक्ति को आम का स्वाद कैसे समझायेंगे जिसने पहले कभी आम नहीं खाया हो?”

राजा सोच-विचार में डूब गया. उसने हर तरह की तरकीब सोची पर वह यह नहीं बता सका कि उस व्यक्ति को आम का स्वाद कैसे समझाया जाय जिसने कभी आम नहीं खाया हो.

हताश होकर उसने महात्मा से ही कहा – “मुझे नहीं मालूम, आप ही बता दीजिये”.

महात्मा ने पास ही रखी थाली से एक आम उठाया और उसे राजा को देते हुए कहा – “यह बहुत मीठा है. इसे खाकर देखो”.

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There are 16 comments

  1. G Vishwanath

    अंग्रेज़ी में एक कहावत की याद आ गई “The proof of the pudding is in the eating”

    राजन सिन्हाजी ठीक कह रहे हैं।
    “राजा ने पास रखी थाली —-” के बजाय “महात्मा ने पास रखी थाली —” सही होगा।

    शुभकामनाएं
    जी विश्व्नाथ

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  2. G Vishwanath

    निशांतजी,

    सुना है कि Paulo Coelho के किताबों पर इरान में प्रतिबन्ध लग गया है।
    क्या कारण हो सकता है?
    क्या आप जानते है?
    क्या उन्होंने इस्लाम के खिलाफ़ कुछ लिख दिया था?
    यदि सूचना मिली तो अपने इस ब्लॉग पर इसके बारे में कुछ लिखें
    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

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  3. Gyandutt Pandey

    सत्य का स्वाद? यह वैसा ही लगता है जैसे अर्जुन कृष्ण से पूछ रहा हो – स्थितप्रज्ञस्य का भाषा:! स्तितधी कैसे बोलता, खाता, बैठता व्यवहार करता है।

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