प्यारा ब्रैंडन फ़ॉस्टर

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इंटरनेट पर यहाँ-वहां घूमते समय मुझे एक वेबसाईट पर नवम्बर-2008 की यह खबर पढ़ने को मिली जिसे मैं आपके सामने रखना चाहता हूँ.

ब्रेंडन फ़ॉस्टर नामक ग्यारह वर्षीय बालक ने असंख्य लोगों के मन पर अमिट छाप छोड़ दी. 21-नवंबर, 2008 को ब्रेंडन की मृत्यु हो गयी. वह असाध्य ल्यूकीमिया (ब्लड कैंसर) से पीड़ित था. ब्रेंडन हमेशा दूसरों के बारे में सोचता था और उनकी मदद करना चाहता था. कोमो न्यूज़ के रिपोर्टर ने बताया:

ब्रेंडन से मिलकर मुझे ऐसा लगा जैसे इस ग्यारह वर्षीय बालक के भीतर एक बुज़ुर्ग की आत्मा है.

“मुझे लगता है कि मैं एक सप्ताह के भीतर चला जाऊंगा” – उसने शांतिपूर्वक कहा.

जब मैंने उससे पूछा कि ज़िंदगी के साथ सबसे अच्छी बात क्या है, उसने जवाब दिया – “ज़िंदगी का मिलना”.

मैं समझ नहीं सकता कि यह बच्चा जो मेरे बेटे से भी छोटा है, यह किस हिम्मत से अपनी मृत्यु का सामना कर कर रहा है.

“यह तो होता ही है. इट इज़ नैचुरल” – ब्रेंडन ने कहा.

तीन साल पहले डॉक्टरों ने ब्रेंडन को ल्यूकीमिया बताया. हमेशा फटाफट अपना होमवर्क करके खेलने के लिए भागनेवाले लड़के को अपना पूरा समय बिस्तर पर बिताना पड़ा. लेकिन यह रोग उसकी इच्छाशक्ति को परास्त नहीं कर सका.

“मेरा समय बहुत अच्छा बीत रहा है, और जब तक यह पूरा नहीं हो जाता मैं हमेशा खुश रहूँगा” – उसने कहा.

मृत्यु से पहले ब्रेंडन ने कहा कि वह बेघर लोगों के लिए कुछ करना चाहता है. “उनके पास खाने के लिए भी नहीं है” – उसने कहा – “उन्हें सिर्फ खाना और पानी ही तो चाहिए!”

लेकिन ब्रेंडन स्वयं इतना कमज़ोर हो गया था कि अपने हाथ से खा भी नहीं पाता था. उसकी ख़ुशी के लिए स्थानीय निवासियों ने सियाटल के बेघर लोगों को खाना उपलब्ध कराया. लॉस  एंजेल्स के एक टीवी स्टेशन ने एक फ़ूड ड्राइव चलाई. ओहियो में स्कूली बच्चों ने कैन एकत्र किये, फ्लोरिडा ने लोगों ने और कुछ सामान जुटाया. कोमो के दर्शकों ने ‘ट्रक भरो’ का आह्वान किया और दयालु व्यक्तियों ने सात ट्रक अनाज और  साठ हज़ार डौलर जमा करके फ़ूड लाइफलाइन को सौंप दिया.

ब्रेंडन की अंतिम इच्छा ने सभी को द्रवित कर दिया. वह अपनी इच्छा को साकार होते देख सका. “वह यह देखकर बहुत खुश था कि लोगों ने उसकी बात रखने के लिए इतना कुछ किया” – उसकी दादी ने बताया – “उसे इससे बहुत शांति और संतुष्टि मिली कि उसके जीवन का कुछ उद्देश्य था”.

“वह सिर्फ ग्यारह साल की उम्र में ही अपनी धरोहर छोड़ गया” – ब्रेंडन की माँ वेंडी ने कहा – “कोई और व्यक्ति किसी चीज़ की ख्वाहिश करता तो उसे इतना कुछ नहीं मिलता जितना ब्रेंडन को मिल सका”.

मृत्यु के कुछ दिनों पहले ब्रेंडन में ऊर्जा का विस्फोट जैसे हुआ. वह ऑक्सीजन हटाकर पलग से कूद जाता और वीडियो गेम लाने के लिए जाना चाहता. वह अपनी उम्र से बहुत आगे था पर था तो छोटा बच्चा ही.

“ब्रेंडन जैसे बच्चे को पाकर मैं धन्य हो गयी. किसी माँ को इतना अच्छा बच्चा नहीं मिल सकता” – वेंडी ने कहा.

परिवार में सब उसे बी-मैन कहकर बुलाते थे. ब्रेंडन की एक इच्छा यह भी थी कि मधुमक्खियों को बचाने के लिए जंगली फूलों के बीज बिखरे जाएँ. उसने कहीं सुना था कि मधुमक्खियाँ खतरे में हैं.

किसी ने ब्रेंडन की इच्छा का महत्व समझा. एक सेवानिवृत्त पायलट ने अपने साथी पायलटों और फ्लाईट अटेंडेंट्स से कहा कि वे दुनिया भर में फूलों के बीज बिखेरें. बाली से लेकर ब्राजील तक ब्रेंडन के लिए फूल बिखेरे गए.

जब ब्रेंडन से पुछा गया कि उसे क्या अच्छा नहीं लगता तो उसने कहा – “जब कोई निराश हो जाता है”.

ब्रेंडन ने कभी हार नहीं मानी. जीवन के अंतिम क्षणों तक भी वह प्रसन्न और निश्चिन्त रहा.

“अपने सपने पूरे करो. किसी को अपना रास्ता रोकने मत दो” – वह कहता था.


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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 7 comments

  1. vijay

    nishaant ji , aapki saariposts tomain padhte hi rahta hoon aur infact , mera jospiritual blog hai use shurukarne liye aap hi meri prerna ho..

    haan, samay ki kami ke kaaran , main comment nahi de paata hoon , iska dukh hai …

    main is bacche ki katha padhkar bahut bhaavuk ho gaya hoon..

    aap mujhe iski saari links bhej sakte hai kya >

    dhanywaad,.

    aapka

    vijay
    poemsofvijay.blogspot.com
    09849746500

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  2. rafatalam

    निशांत साब पलकें गीली हो गईं प्यारे बच्चे ब्रेंडन की कथा पढ़ कर वोह मोत जिससे राजे -रंक सभी कांपते हैं उस के लिए वोह विलक्षण बालक कहता है यह तो होता ही है. इट इज़ नैचुरल” .सलाम प्यारे बच्चे तुम्हे जहाँ कहीं हो तुम -शायद सुंदर चमकीले तारे या शहद की मिठास या भूके के तृप्ति में .

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