Walking on Water – पानी पर चलना

stone water

तीन संन्यासियों ने एक साथ बैठकर ध्यान करने का निश्चय किया. वे एक छोटे तालाब के पास बैठ गए और अपना आसन जमाने के बाद ध्यान करने लगे.

अचानक ही उनमें से एक उठा और बोला – “मैं अपनी चटाई लाना भूल गया हूँ!” – फिर वह चमत्कारिक रूप से तालाब में उतरा और पानी की सतह पर चलते हुए उस पार अपनी कुटिया तक चला गया.

जब वह लौटा तब दूसरा संन्यासी उठ गया और बोला – “मैं अपनी धोती सुखाने के लिए टांगना भूल गया!” – फिर वह भी तालाब के पानी में उतरा और पानी पर चलता हुआ अपनी कुटिया तक गया और उसी प्रकार वापस आ गया.

तीसरे संन्यासी ने जब दोनों को यह चमत्कार करते देखा तो उसने भी अपनी क्षमताओं को परखने का निर्णय कर दिया. उसने अपने मन में कहा – “क्या तुम लोग मेरे से भी अधिक शक्ति-संपन्न हो?” – “मैं भी वह सब कर सकता हूँ जो तुम दोनों करके दिखा सकते हो!” – उसने चिल्लाकर कहा और तालाब की ओर चल दिया.

पानी पर पैर रखते ही वह छपाक से गिर पड़ा.पहले प्रयास में मिली असफलता से विचलित हुए बिना वह तालाब से बाहर आया और उसने दोबारा प्रयत्न किया लेकिन वह फिर से गिर गया. उसने बारंबार पानी पर चलने का प्रयास किया पर हर बार वह पानी में गिरा और डूबते-डूबते बचा. अपने आसनों पर बैठे शेष दोनों संन्यासी यह सब होता देखते रहे.

कुछ समय बाद उनमें से एक उठकर दुसरे संन्यासी के पास गया और बोला – “क्या हम उसे बता दें कि तालाब में पत्थर कहाँ-कहाँ लगे हैं?”

* * * * * * * * * *

Three monks decided to practice meditation together. they sat by the side of a lake and closed their eyes in concentration.

Then suddenly, the first one stood up and said, “I forgot my mat.” He steeped miraculously onto the water in front of him and walked across the lake to their hut on the other side.

When he returned, the second monk stood up and said, “I forgot to put my other underwear to dry.” He too walked calmly across the water and returned the same way. The third monk watched the first two carefully in what he decided must be the test of his own abilities. “Is your learning so superior to mine? I too can match any feat you two can perform,” he declared loudly and rushed to the water’s edge to walk across it. He promptly fell into the deep water.

Undeterred, the monk climbed out of the water and tried again, only to sink into the water. Yet again he climbed out and yet again he tried, each time sinking into the water. This went on for some time as the other two monks watched.

After a while, the second monk turned to the first and said, “Do you think we should tell him where the stones are?”

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 7 comments

  1. G Vishwanath

    करीब चालीस साल पहले, मुमबई में ब्लिट्ज़ पत्रिका में एक हठ योगी के बारे में समाचार छपा था। उसका दावा था कि power of mind over matter से, वह पानी पर चल सकता था।

    इसे आजमाने के लिए एक सार्वजनिक प्रदर्शन का आयोजन किया गया था।
    एक पानी की टंकी का निर्माण हुआ और उसमे पानी भरा गया।
    मीडिया वालों के भीड जम गई, सब अपने कैमेरा के साथ तमाशा देखने आए थे।

    देश भर में पब्लिसिटी हुई थी।
    आखिर D Day आई।
    योगी पानी में पैर रखते ही पानी में जा गिरे।
    उसने बहाना बनाके कह दिया कि ऐन वक्त पर उसकी concentration में बाधा आ गई थी और फ़िर कभी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगा और एक मौका और माँगा था।

    शर्म के मारे, ब्लिट्ज़ के संपादक ने पाठकों से माफ़ी माँगी।
    उसे फ़िर कभी मौका मिला ही नहीं।

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  2. कमल वलेरा

    समाज को एक नयी समज के तरफ इशारा करता प्रसंग आज के जमाने मे तथा कथित साधुओ की भिङ जनता का भला करने पे तुली हे ओर नये नये चमत्कार दिखाने का दावा करते हे अब उसे कोन समजाए कि अगर वाकिइ कोइ शकित हे उनके पास तो देश कि आधी आबादि जो भुखमरे से पिङित हे उनका भला करके दिखाए

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