आशीर्वाद : Blessings

alice popkorn photo treeरेगिस्तान में एक फकीर भूखा-प्यासा, थका-मांदा ठोकरें खा रहा था. किस्मत से उसे रसीले फलों से लदा हुआ एक बड़ा छायादार पेड़ मिल गया. पेड़ के नीचे एक महीन जलधारा भी फूट रही थी.

फकीर ने रसीले फल खाए, शीतल जल पिया और ठंडी छाँव में विश्राम किया.

वहां से चलने से पहले फकीर ने उस पेड़ से पूछा – “ऐ प्यारे पेड़, मैं तुझे क्या आशीर्वाद दूं?”

“क्या मैं यह कहूं कि तेरे फल बहुत मीठे हों? वे तो पहले से ही बहुत मीठे हैं!”

“क्या मैं यह कहूँ कि तेरी छाँव बहुत घनी हो? वह तो बहुत घनी और शीतल है!”

“क्या मैं यह कहूँ कि तुझे भरपूर पानी मिले? पानी का सोता तो तेरी जड़ों के पास ही फूट रहा है!”

“तुझे तो मैं एक ही आशीर्वाद दे सकता हूँ, प्यारे पेड़, कि तेरे बीजों से पनपनेवाले सारे पेड़ तुझ जैसे ही हों!”

(पाउलो कोएलो के ब्लॉग से – From the blog of Paulo Coelho)

(~_~)

A holy-man was travelling through the desert, hungry, thirsty, and tired, when he came upon a tree bearing luscious fruit and affording plenty of shade, underneath which ran a spring of water. He ate of the fruit, drank of the water, and rested beneath the shade.

When he was about to leave he turned to the tree and said: ‘Tree, oh, tree, with what should I bless you?’

“Should I bless you that your fruit be sweet? Your fruit is already sweet.”

“Should I bless you that your shade be plentiful? Your shade is plentiful. That a spring of water should run beneath you? A spring of water runs beneath you.”

“There is one thing with which I can bless you: May it be God’s will that all the trees planted from your seed should be like you…”

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 5 comments

  1. rafat alam

    निशांत जी मुझे कई बार लगता है जीवन दर्शन एक ही स्थान पर आ जाते है -मुझे नानक देव जी की घटना ध्यान आ रही है -नानक जी किसी गावं गये सत्कार हुआ ,अशीर्वाद दिया खुशबू समान दूर दूर फेल जाओ .दूसरे गावं उनका अनादर हुआ कहा कुए समान यही रहो ,शीशों ने पूछा महाराज यह उलटी बात क्या .नानक जी ने कहा सज्जन लोग जहाँ जायेंगे सज्जनता फलायेंगे और दुर्जन दुर्जनता इस लिए दुर्जन लोगों को वही रहने का अशीर्वाददिया है .क्या पता में गलत हूँ .पर आपकी सुंदर पोस्ट के लिए थैंक्स

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  2. हिमांशु

    मैं सहज ही आपके ब्लॉग पर प्रकाशित इन कथाओं से अनुप्रेरित हो जाया करता हूँ !

    यह तो मेरी भी शुभाकांक्षा है इस ब्लॉग के लिये कि सतत यहाँ प्रेरणा के कुछ सुन्दर फूल खिलते रहें, अंकित होती रहें ये प्रेरक कथाएं !

    आभार ।

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