दो मार्ग : Two Streets

armenian village


पूर्वी आर्मीनिया के एक छोटे से कस्बे में दो समानांतर मार्ग थे जिन्हें क्रमशः उत्तरी और दक्षिणी मार्ग कहते थे. कहीं दूर से आया एक यात्री दक्षिणी मार्ग से होता हुआ उत्तरी मार्ग पर आ गया. उत्तरी मार्ग पर लगे बाज़ार के दुकानदारों ने यह देखा कि यात्री बहुत दुखी था और उसकी आँखों में आंसू थे.

“लगता है दक्षिणी मार्ग पर किसी की मृत्यु हो गयी है” – एक कसाई ने कपड़े बेचनेवाले से कहा – “देखो, दक्षिणी मार्ग से आने वाला यात्री कितना दुखी है!”

पास में ही खड़े एक बच्चे ने ये बात सुन ली. अपने अबोधपन में बच्चा यह जानता था कि मृत्यु बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और ऐसा सोचकर वह ज़ोरों से रोने लगा. उसे रोते देखकर मार्ग में मौजूद दूसरे बच्चे भी रोने लगे.

एकाएक ये सब घटित होता देखकर यात्री हैरान-परेशान हो गया. उसने अपने हाथ में रखा प्याज फेंक दिया और वहां से चला गया. दरअसल, कच्चा प्याज खाने के कारण ही उसकी आँखों में आंसू आ रहे थे.

दूसरी ओर, इतने सारे बच्चों के एक साथ रोने की आवाजें सुनकर उनकी माँ बाहर निकल आईं. बाहर आनेपर उन्होंने देखा कि कसाई, कपड़े बेचने वाला और दुसरे दुकानदार दक्षिणी मार्ग पर घटित त्रासदी पर शोक व्यक्त कर रहे थे.

और अफवाहें फैलतीं गईं. कस्बे में दोनों मार्गों पर सैकड़ों मकान थे और दोनों मार्गों के रहवासी अब यह जान गए थे कि दूसरे मार्ग पर दुखद घटना हो गयी थी. बड़े-बुजुर्गों को अनिष्ट की आशंका सताने लगी लेकिन वे स्थिति की गंभीरता समझते थे इसलिए उन्होंने यह तय किया कि कोई भी इस बारे में किसी से कोई बात नहीं करेगा. इस तरह हालात और बिगड़ गए.

दक्षिणी मार्ग पर रहनेवाले एक अंधे व्यक्ति को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था. वह अंततः पूछ बैठा – “हमारा नगर तो बहुत खुशहाल रहता था! अब यहाँ इतनी उदासी क्यों छाई है?”

“उत्तरी मार्ग पर बड़ी दुखद घटना हो गयी है” – किसी ने उसे बताया – “सारे बच्चे रो रहे हैं और बड़े लोग शोकाकुल हैं. सालों के बाद नगर में आया एक यात्री भी रोता हुआ लौट गया. शायद वहां कोई महामारी फ़ैल गयी है.”

जल्द ही दोनों मार्गों पर यह अफवाह फ़ैल गयी कि दूसरे मार्ग पर महामारी फ़ैल गयी है. चूंकि यात्री दक्षिणी मार्ग से रोता हुआ आया था इसलिए उत्तरी मार्ग के वासी मानते थे कि दक्षिणी मार्ग पर दुखद घटना घटित हुई है. दूसरा दिन होने से पहले दोनों मार्गों के वासी अपने घरों को छोड़कर रातोंरात पूर्वी और पश्चिमी दिशा पर मौजूद पहाड़ों पर चले गए.

प्याज खाने के कारण अपनी आँखों में आंसू लिए यात्री के उस कस्बे को छोड़ देने के बाद कई सदियाँ गुज़र चुकी हैं. वहां से करीब ही दो नई बस्तियां बस गईं जिन्हें लोग पूर्वी और पश्चिमी मार्ग कहते हैं. इन मार्गों पर रहनेवाले लोग आज भी एक दूसरे से बात नहीं करते. सदियों पहले हुई घटना ने उनके दरमियां कभी न भरनेवाली एक खाई बना दी थी.

(~_~)

In eastern Armenia there was a little village with two parallel streets, called North Way and South Way, respectively. A traveler from afar walked down South Way, and soon resolved to visit the other street; however, as soon as he entered it, the merchants noticed that his eyes were filled with tears.

“Someone must have died on South Way,” said the butcher to the textile salesman. “That poor stranger, who just came from there, look how he cries!”

A child heard the comment, and as he knew what a sad thing someone dying is, he began to cry hysterically. Before long, all the children in that street were crying. Startled, the traveler decided to leave immediately. He threw away the onions he was peeling in order to eat them – that being the reason his eyes were filled with tears – and went off. However, the mothers, worried by their children’s weeping, soon went to find out what had happened, and discovered that the butcher, the textile salesman and – by this time – several other merchants, were all deeply concerned about the tragedy which had occurred on South Way.

More rumors began to spread; and since the town hadn’t many inhabitants, everyone on both streets knew that a terrible thing had happened. The adults began to fear the worst; but, since they were worried about the gravity of the tragedy, they decided not to ask anything, so as not to make matters worse.

A blind man who lived on South Way and didn’t understand what was going on, decided to speak up: “Why such sadness in this town, which as always been such a happy place?” “Something terrible happened on North Way,” answered one of the inhabitants.

“The children are crying, the men frown, mothers send their sons home, and the only traveler to pass through town for many years, left with his eyes filled with tears. Perhaps the plague has hit the other street.” Before long, rumors of an unknown deadly disease spread through the town. And since all the weeping had begun when the traveler visited South Way, the inhabitants of North Way were sure that that was where it had begun.

Before nightfall, people from both streets abandoned their houses and left for the mountains of the East. Centuries later, that ancient village where a traveler passed peeling onions continues abandoned to this day.

Not far away, two settlements emerged, called East Way and West Way. Their inhabitants, the descendants of the former inhabitants of the village, still do not speak to each other, for time and legends placed a great barrier of fear between them.

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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