कला, कलाकार, और रचनात्मकता

Backalley Art, Philly


कुछ नया नहीं सोच पा रहे? बेहतर विचार नहीं आ रहे? रचनात्मकता से कोसों दूर अनुभव कर रहे हैं? आपके लिए मैं लेकर आया हूँ महान कलाकारों द्वारा कला और रचनात्मकता के सम्बन्ध में कहे गए अप्रतिम कथनों का संकलन. कला क्या है? कला के महान रूप को रचनेवाले कलाकार को क्या प्रेरित करता है? और भी बहुत कुछ:-

“सागरतट पर खड़े होकर लहरों को ताकने से तुम पार नहीं जा सकते”. – रवीन्द्रनाथ टैगोर

“जब मैं कला के किसी रूप को आंकता हूँ तो मैं उसे ईश्वर की रची किसी वस्तु जैसे फूल या वृक्ष के साथ रखकर देखता हूँ. यदि दोनों में द्वंद्व होता है तो यह कला नहीं है” – मार्क शागाल

“किसी महान कलाकार को एक औसत कलाकार से जो बातें पृथक करतीं हैं वे हैं: पहली – उसकी चैतन्यता और कोमलता; दूसरी – उसकी कल्पना; और तीसरी – उसकी उद्यमिता” – जॉन रस्किन

“कला हमारे जीवन से रोज़मर्रा की धूल को झाड़ देती है”.
“कलाकार एक पात्र है जिसमें हर जगह से भावनाएं आकर गिरतीं है: आकाश से, पृथ्वी से, रद्दी से, गुज़रती हुई आकृति से, मकड़ी के जाले से”.
“मैं हमेशा वही चीज़ें करता हूँ जो मैं नहीं कर सकता. तभी तो मैं उन्हें कर पाता हूँ!”
“बचपन में मैं राफाएल की तरह चित्र बना सकता था लेकिन बच्चे की तरह चित्र बनाना सीखने में मेरी पूरी ज़िंदगी लग गयी”. – पाब्लो पिकासो

“मैं आँखें बंद कर लेता हूँ ताकि देख सकूं”. – पॉल गौगाँ

“यदि मैं इसे शब्दों में कह सकता तो मैं चित्र ही क्यों बनाता? – एडवर्ड हॉपर

“ज़िंदगी बहुत बड़ा कैनवास है और तुम इसपर जितना रंग फेंक सकते हो, फेंक दो!” – डैनी काये

“कला हमें अपनी ओर खींचती है क्योंकि यह हमारे भीतर के रहस्यों को उजागर करती है” – ज्यां लुक गोदार

“हर चीज़ में परिपूर्णता की खोज में जुटे कलाकारों को किसी चीज़ में कुछ नहीं मिलता”. – यूजीन देलाक्रोआ

“किसी भी कलाकार को उसके श्रम का नहीं अपितु उसके अवलोकन का पारिश्रमिक दिया जाता है” – जेम्स व्हिसलर

“मौलिकता की परवाह मत करो! तुम जब चाहो तभी इससे छुटकारा पा सकते हो.” – रॉबर्ट हैनरी

“कलाकार की प्रारंभिक रचनाएँ उसकी रुचियों और अभिवृत्तियों को दर्शाती हैं. इनमें से कुछ तो सुसंगत होतीं है और कुछ में द्वंद्व दिखता है. स्वीकरण और बहिष्करण के साथ आगे बढ़ते हुए कलाकार की निरीक्षण की प्रवृत्तियां स्पष्ट होने लगतीं हैं. उसकी असफलताओं का मोल उसकी सफलता से कमतर नहीं होता: किसी गलत निर्णय पर चलकर वह किसी विषयवस्तु की पुष्टि कर सकता है जबकि कई बार उसे यह पता भी नहीं होता कि वह विषयवस्तु क्या है” – ब्रिजेट रिली

“संग्रहालय में टंगी पेंटिंग को दुनिया में सबसे कठोर टिप्पणियां झेलनी पडतीं हैं”. – अज्ञात

(Quotes on art, artist, and creativity – in Hindi)

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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