हिंदीज़ेन का एक साल पूरा हुआ – यहाँ मस्ती टपकती है:)

आज इस ब्लॉग को एक साल पूरा हो गया है. वैसे तो यह ब्लॉग एक साल से भी पुराना है. पहले ब्लौगर पर चल रहा था, फिर ०1-मई-2009 से इसे वर्डप्रेस के कस्टम डोमेन पर स्थापित कर दिया. एक साल या लगभग डेढ़ साल, इस बीच इसमें अब तक 300 से अधिक पोस्टें छप चुकी हैं. ज्यादातर तो कहानियां और लेख हैं. हाल में छपने लायक सामग्री मिलने में कुछ कमी आने लगी और समय भी कम मिलने लगा तो अच्छी कविताओं को भी पोस्ट करने लगा हूँ. अभी भी बहुत से ऐसे लेख और कहानियां हैं जिन्हें यहाँ पोस्ट किया जा सकता है पर मन कहता है कि वे ‘हिन्दीज़ेन’ के स्तर के अनुरूप नहीं हैं. ‘हिन्दीज़ेन’ की पोस्टों में विशिष्ट सुगंध और फ्लेवर है जिसे ब्लॉग के नियमित पाठक अनुभव कर सकते हैं.

साल भर में कुल जमा 1500 कमेन्ट पोस्टों पर किये गए. वर्डप्रेस का अपना स्टेट काउंटर बताता है कि एक साल में लगभग 99,000 विजिट इसमें दर्ज की गयी हैं और इसमें मेरी विजिट शामिल नहीं हैं. यदि यह विज़िटें एक लाख का आंकड़ा पार कर जातीं तो एक पोस्ट इसी पर ठेली जा सकती थी. “एक साल में एक लाख विजिट!” – खैर, हर स्टेट काउंटर का मीटर अलग-अलग चलता है. एक साल में क्लस्टरमैप का विजिट काउंटर लगभग 28,000 विजिट दर्ज करता है. यह 24 घंटे में एक आई पी एड्रेस को एक विजिट मानकर चलता है. इतनी विजिट इसने लगभग 100 देशों से दर्ज की हैं. अज़रबैजान और लिचेंस्टीन जैसे मुल्कों से भी एक-एक विजिट दर्ज हैं. कौन भलामानस होगा वह, गलती से आ गया होगा. माहवार चार्ट देखने पर लगता है कि विजिट थमी हुई सी हैं पर यह इतनी बड़ी बात नहीं कि अपना खून जलाया जाय.

क्लस्टरमैप ने लगभग 100 देशों से 27,811 विज़िट दर्ज की

विजिट्स क्रमशः बढ़ती जा रहीं हैं

इसके अलावा कुछ और आंकड़े भी हैं. ब्लॉग का डैशबोर्ड बताता है कि चिट्ठाजगत की तुलना में कई गुना अधिक विज़िटर ब्लॉगवाणी से आते हैं. बहुत से पाठक विकीपीडिया से भी आते हैं क्योंकि उसके कई लेखों में मैंने ब्लॉग की लिंक दी हुई है. आंकड़े आकर्षक हैं? शायद हाँ. शायद नहीं. इस ब्लॉग पर काम करने के बजाय यदि कुछ और कर रहे होते तो क्या होता! कुछ न भी कर रहे होते तो क्या होता! ये सब दिल को बहलाने की बातें हैं. हर व्यक्ति को वह करने की आजादी होना चाहिए जो उसे अच्छा लगता हो और जिससे दूसरों को अच्छा न लगे तो बुरा भी न लगे. इस कसौटी पर तो ‘हिन्दीज़ेन’ खरा उतरता है न?

चिटठाजगत की तुलना में ब्लॉगवाणी से दस गुना अधिक विजिटर आते हैं

तो आज ‘हिन्दीज़ेन’ की पहली सालगिरह है. ये ऐसा ब्लॉग है जो लाओत्जु की तरह बूढ़ा ही पैदा हुआ था. जन्मते ही इसने प्रौढ़ता को प्राप्त कर लिया. एक साल का होने पर दूसरा कोई ब्लॉग जहाँ जवानी के नशे में चूर रहता है वहीं ‘हिन्दीज़ेन’ खुद को और बूढ़ा महसूस करने लगा है. कम-से-कम मुझे तो ऐसा ही लगता है.

तो अब क्या किया जाय! छोटों के जन्मदिन पर केक काटते हैं, जवान के जन्मदिन पर अब बोतल खोलने का रिवाज़ है, और बूढ़ों के जन्मदिन पर… छोड़िये भी.

ब्लॉगों पर फौलोवर्स की संख्या का भी बखान करता दूं. ब्लागस्पाट की तरह वर्डप्रेस के ब्लॉगों पर फौलोवर्स का विजेट लगाना संभव नहीं है पर फेसबुक का नेटवर्कडब्लॉग एप्लीकेशन इस ब्लॉग के फकत 99  फौलोवर्स गिनाता है. अच्छी बात है. चलते-चलते, एक बात और. ब्लॉग का डैशबोर्ड बताता है कि सर्च करके यहां आने वाले बहुत से विज़िटर ‘काम कथाएं’ और ‘मस्ती टपकती’ ढूंढते हुए यहां आ जाते हैं. ‘काम कथाएं’ तो मुझे समझ में आता हैं पर यह ‘मस्ती टपकती’ क्या बला है?

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 12 comments

  1. aradhana

    सालगिरह की बहुत-बहुत बधाइयाँ ! आपने जो आँकड़े बताये हैं, उनको पढ़ना कभी-कभी बड़ा मज़ेदार होता है… मैंने भी देखा है कि सर्च इंजन में लोग अजीब से शब्द डालकर खोजते हैं, कुछ शब्द तो ऐसे हैं कि बताने में शर्म आती है… खैर तकनीक का सभी लोग अपने-अपने ढंग से इस्तेमाल करते हैं.
    हिन्दीजेन निश्चित ही एक अलग तरह का ब्लॉग है, इसका अपना एक स्तर है, कुछ उच्च कोटि की रचनाएँ पढ़ने को मिलती हैं…ये ब्लॉग ऐसे ही चलता रहे (मस्ती टपकाते हुये) यही शुभकामना है.

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