इंजीनियर और मैनेजर में अंतर

hot air balloon


एक औरत गर्म हवा के गुब्बारे में ऊपर उड़ी और रास्ता भटक गई. बहुत नीचे खेतों में उसे एक आदमी दिखाई दिया और वह गुब्बारे को नीचे ले आई और उसने आदमी से चिल्लाकर पूछा – “श्रीमानजी, क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं? मैंने एक घंटे पहले अपने एक दोस्त से मिलने का वादा किया था लेकिन मैं रास्ता भटक गई हूँ और मुझे नहीं मालूम कि मैं किस जगह पर हूँ!”

आदमी ने उससे कहा – “आप एक गर्म हवा के गुब्बारे में जमीन से लगभग 30 फीट की ऊँचाई पर 40 से 41 डिग्री अक्षांश और 59 से 60 डिग्री देशांश के बीच में हैं!”

“क्या आप इंजीनियर हैं?” – औरत ने उससे पूछा.

“हाँ!” – आदमी ने कहा – “आपने यह कैसे जाना?”

“देखिये” – औरत ने कहा – “आपने मुझे जो कुछ भी बताया वह तकनीकी रूप से सही है लेकिन मुझे नहीं मालूम कि मैं इस जानकारी का क्या करूँ, और सच बात तो यह है कि मैं अभी भी भटकी हुई हूँ! खैर, आपसे मुझे कुछ मदद तो मिली नहीं बल्कि मुझे कुछ देर और हो गई!”

आदमी ने नीचे से कहा – “आप शायद किसी कंपनी में मैनेजर हैं”.

“हाँ! – औरत ने आश्चर्य से कहा – “लेकिन आपको यह कैसे पता चला?”

“सीधी सी बात है!” – आदमी बोला – “आपको यह नहीं पता कि आप कहाँ हैं या आप कहाँ जा रही हैं. भीतर बहुत सारी गर्म हवा भरी होने के कारण आप उस ऊँचाई तक पहुँच गई हैं. आपने वह वादा किया जिसे पूरा करने के बारे में आप कुछ नहीं जानतीं हैं और नीचे वालों से आप यह उम्मीद करतीं हैं कि वे आपकी समस्या का समाधान कर देंगे. और तो और, आप अपनी हालत और बेवकूफी के लिए दूसरों को दोषी ठहराने को तत्पर हैं!?

(A funny story about a manager and an engineer – in Hindi)

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There are 13 comments

  1. venus kesari

    “आपको यह नहीं पता कि आप कहाँ हैं या आप कहाँ जा रही हैं. भीतर बहुत सारी गर्म हवा भरी होने के कारण आप उस ऊँचाई तक पहुँच गई हैं. आपने वह वादा किया जिसे पूरा करने के बारे में आप कुछ नहीं जानतीं हैं और नीचे वालों से आप यह उम्मीद करतीं हैं कि वे आपकी समस्या का समाधान कर देंगे. और तो और, आप अपनी हालत और बेवकूफी के लिए दूसरों को दोषी ठहराने को तत्पर हैं!?

    सटीक विश्लेषण
    वीनस केसरी

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    1. Nishant

      नीलम जी, इस ब्लौग पर पोस्ट की जाने वाली हलके-फुल्के अंदाज़ की कहानी भी किसी न किसी विचार या सत्य को उद्घाटित करती है. कभी-कभी ऐसी पोस्टों को प्रकाशित करने में कोई हर्जा नहीं है जो केवल मनोरंजन ही करती हो. मूल रूप में यह ब्लौग गंभीर पोस्टों के लिए ही है.

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      1. nilam

        Kripya bachav ki mudra apanakar kutark na kare. AAp behad achcha kaam kar hai, isme koi sandeh nahi hain, aavshakata hain ek baar phir se sahi focus apanane ki. Yahan Engineer aur Manager dono ko jo aap bura kah rahe hain voh un nirashawadiyo ke vachan hain jinke anusaar ghar baidhne se achcha koi kaam nahi hain aur veh tamam sansaar me buraiya khojate phirate hain! Mujhe yaad hain aapki zen katha, zahan par ek 80 saal ka vridhdh apni jivan se behad khush hain.
        Khush rahna, dusaro ko badava dena ye to niti hai, par dusaro ki buraiya karna mean mekh nikalana ye aniti ka hi rup hain.

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