बिस्कुट का पैकेट : पॉइंट ऑफ़ व्यू

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मुंबई के अंतर्राष्ट्रीय एअरपोर्ट पर आप अधीरता से अपनी फ्लाईट की प्रतीक्षा कर रहे हैं. आपको भूख भी लग रही है. किसी रेस्टौरेंट में आप जा नहीं सकते इसलिए आप सामनेवाली दूकान से बिस्कुट का एक पैकेट खरीद लेते हैं और उसे अपने ट्रेवल बैग में खोंस देते हैं. अब आप अपने लिए एक उपयुक्त सीट ढूंढते हैं जहाँ आप बैठकर पत्रिका पढ़ सकें और बिस्कुट खा सकें.

एक वृद्ध सज्जन के पास आपको अच्छी सीट मिल जाती है. आप अपना सामान रखते हैं और पत्रिका खोलकर पढने लगते हैं. नीचे झुककर आप अपने बैग से बिस्कुट का पैकेट निकालते हैं. पास बैठे अंकलजी आपको अजीब नज़रों से देखने लगते हैं.

आप बिस्कुट का पैकेट खोलते हैं और अंकलजी की आँखें आपके हाथ पर टिकी रहती हैं. वे आपको बिस्कुट निकालकर अपने मुंह में रखते हुए देखते हैं. अभी तक आपका ध्यान इस ओर ज्यादा नहीं गया है. तभी आपके बिस्कुट के पैकेट की ओर अंकलजी का हाथ बढ़ता है और वे उसमें से एक बिस्कुट निकालकर खा लेते हैं. आपकी हालत अजीब सी है. आप स्तब्ध भी हैं और आश्चर्यचकित भी. आपके मुंह से बोल नहीं फूटते. अब अंकलजी एक कदम और आगे बढ़ गए हैं. जब-जब आप पैकेट से एक बिस्कुट निकालते हैं तब-तब वह एक बिस्कुट आपके पैकेट से ले लेते हैं.

अपने मन में आप अंकलजी के लिए क्या बात सोच रहे हैं? “पागल, सनकी बुड्ढा!” “लालची”

“बड़ा ही बदतमीज आदमी है”. आप अपने घर या दफ्तर पहुँचने के बाद ऐसी किसी आदमी के बारे में लोगों को बताने के लिए कौन से शब्दों का चुनाव करेंगे?

इस बीच आप और अंकलजी, दोनों एक-एक करके आपके पैकेट से बिस्कुट खाना जारी रखते हैं. अब तो पैकेट में सिर्फ एक ही बिस्कुट बचा है!

लो! अंकलजी ने तो वह बिस्कुट भी ले लिया! लेकिन एक बात उन्होंने अच्छी करी, उन्होंने उस बिस्कुट को बीच में से तोड़कर आधा खा लिया और आधा आपको दे दिया. बिस्कुट खा लेने के बाद वे उठे और कुछ भी कहे बिना वहां से चले गए.

अब आप वहां बैठे सोच रहे हैं – “क्या ऐसा वाकई हुआ है?” – आप किम्कर्तव्य-विमूढ़ भी हैं और आपकी भूख भी शांत नहीं हुई. “चलो एक पैकेट बिस्कुट और ले लिया जाए” – ऐसा सोचकर आप दूकान तक जाते हैं और एक और बिस्कुट का पैकेट खरीद लाते हैं. अपनी सीट पर बैठे हुए जब आप बिस्कुट का पैकेट खोलते हैं तभी आपकी निगाह आपके बैग पर जाती है.

आपके बैग में बिस्कुट का एक पैकेट ठीक वहीँ पर खोंसा हुआ है जहाँ आपने उसे पहले रखा था. पैकेट साबुत है. अ़ब आप यह जान गए कि पहले जब आप बिस्कुट का पैकेट लेने के लिए झुके थे तब आपने गलती से अंकलजी के बैग से ‘उनका’ बिस्कुट का पैकेट निकाल लिया था.

अब आप अंकलजी के बारे में क्या सोचेंगे? “सज्जन? सहनशील? उदार?” देखिये, आपकी बनाई गयी मान्यताएं कैसे पल भर में ध्वस्त हो जाती हैं! अब आप चीज़ों को नए पॉइंट ऑफ़ व्यू से देखने लगते हैं.

अपने पॉइंट ऑफ़ व्यू को बदलने का समय आ गया है. चीज़ें वैसी नहीं होतीं जैसी वे दिखती हैं. जो कुछ घटित हो रहा है उसपर बहुत अधिक ध्यान न दें… उसके पीछे भी बहुत कुछ छिपा हो सकता है.

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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