पिकासो के रोचक संस्मरण – भाग 2

pablo picasso


पाब्लो पिकासो की महान सफलता उनके स्कूल शिक्षकों के लिए बहुत बड़ा आघात थी. पिकासो ने दस वर्ष की अवस्था में स्कूल छोड़ दिया था क्योंकि उन्हें पढने-लिखने में दिक्कत होती थी. वे वर्णमाला के अक्षर याद नहीं रख पाते थे.

* * * * *

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजियों ने पेरिस को अपने कब्जे में ले लिया था. पिकासो के पेरिस वाले अपार्टमेन्ट में एक दिन खुफिया गेस्टापो पुलिसवाले आ घुसे. उन्होंने कमरे की दीवार के सहारे खड़ी पेंटिंग ‘गेर्निका’ को देखा जिसमें स्पेनिश गृहयुद्ध के दौरान जर्मन लड़ाकू विमानों द्वारा बास्क राजधानी पर बमबारी का चित्रण किया गया है (यह चित्र इसी श्रृंखला की पहली कड़ी में देखें).

एक पुलिस अधिकारी ने गेर्निका को देखकर पिकासो से पूछा – “ये तुम्हारा काम है?”

“नहीं” – पिकासो ने कहा – “ये तुम्हारा काम है”.

* * * * *

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पिकासो के चित्र बड़ी ऊंची कीमत पर बिक रहे थे. एक धनी अमेरिकी महिला पिकासो के स्टूडियो में चित्र खरीदने के लिए आई.

एक अमूर्त पेंटिंग को देखकर उसने पिकासो से पूछा – “यह पेंटिंग क्या दिखाती है?”

पिकासो ने कहा – “दो लाख डॉलर”.

* * * * *

एक दिन पिकासो दक्षिणी फ्रांस में समुद्र तट पर अपने एक मित्र के साथ सुस्ता रहे थे. एक छोटा लड़का उनके पास एक कागज़ लेकर आया. पिकासो समझ गए कि लड़के के माता-पिता किसी बहाने उनका औटोग्राफ हासिल करना चाहते थे.

पिकासो ने लड़के का निवेदन नहीं ठुकराया, लेकिन उन्होंने कागज़ लेकर फाड़ दिया और लड़के की पीठ पर एक आकृति बनाकर अपने हस्ताक्षर कर दिए.

“मुझे लगता है” – पिकासो ने अपने मित्र से कहा – “अब वे उसे कभी नहीं नहलायेंगे.”

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किसी ने एक बार पिकासो से पूछा कि उनकी सबसे प्रिय पेंटिंग कौन सी है.

पिकासो ने कहा – “अगली”.

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१९०६ में पिकासो ने गर्त्रूद स्टीन नामक एक लड़की की पेंटिंग बनाई थी और वह उसे उपहार में दे दी. कई सालों बाद करोड़पति अमेरिकी कला संग्रहकर्ता अलबर्ट बार्न ने गर्त्रूद से पूछा कि वह पेंटिंग बनवाने के लिए उसने पिकासो को कितनी रकम दी.

“कुछ नहीं” – गर्त्रूद ने कहा – “उन्होंने तो वह मुझे उपहार में दे दी थी”. यह सुनकर अलबर्ट बार्न स्तब्ध रह गए.

बाद में गर्त्रूद ने पिकासो को इस बारे में बताया. पिकासो ने मंद-मंद मुस्कुराते हुए कहा – “वह नहीं समझ पायेगा कि उन दिनों बिक्री और उपहार में बहुत मामूली अंतर होता था.”

* * * * *

१९४० का समय था. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपने शहरों पर जर्मन आक्रमण के भय से यूरोप में कलाकार पलायन करने से पहले अपनी कलाकृतियाँ बहुत कम दामों पर बेच रहे थे.

पेगी गुगेन्हीम नामक धनी अमेरिकी महिला नगर-नगर घूमते हुए महँगी कलाकृतियाँ औने-पौने दामों में खरीद रही थी. पिछले कुछ महीनों से वह प्रतिदिन एक पेंटिंग खरीदती आ रही थी. पिकासो के पेरिस वाले स्टूडियो में आने पर उसने कलाकार को अपने प्रशंसकों से घिरा पाया.

उसे वहां आया देखकर लोगों ने उसे रास्ता दिया. उसके हांथों में एक लिस्ट थी जो कला के जानकारों ने तैयार की थी. लिस्ट में खरीदने लायक कलाकृतियों के नाम लिखे थे. उसमें उन कलाकारों के नाम भी थे जिनकी पेंटिंग और शिल्प को खरीदने का वह निर्णय कर चुकी थी. यह सब उसके लिए एक सनक बन चुकी थी. पिकासो का नाम भी उस लिस्ट में था.

पिकासो ने उसे वहां आया देखा. बहुत देर तक तो वे उसे नज़रंदाज़ करते रहे, फिर उसके पास गए और उन्होंने उससे कहा – “मैडम, आप शायद गलत जगह आ गईं हैं. अंतर्वस्त्रों की दुकान सामनेवाली बिल्डिंग में है.”

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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