पैसे से आप यह सब नहीं खरीद सकते

“यदि आपके पास ऐसा कुछ नहीं है जिसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता तो आप धनी नहीं हैं” – गार्थ ब्रुक

१ – प्यार की पहली छुअन – इसके बारे में क्या कहूँ:)

२ – सच्चे प्यार का अहसास – यह अहसास कि आपने सही व्यक्ति से विवाह किया:)

३ – सुन्दरता – क्योंकि सुन्दरता तो देखनेवाले की आंखों में होती है

४ – सच्ची दोस्ती – वे लम्हे जब दोस्त आपके साथ थे जब आपको उनकी ज़रूरत थी

५ – मानसिक शान्ति – जीवन में तृप्ति और संतोष के पल

६ – पहली बार कुछ नया करने जा रहे बच्चे (या बड़े) की आँखों की चमक

७ – किसी दिलचस्प वाक़ये को सुनाने का मज़ा

८ – खुशी – बहुत बड़ी चीज़

९ – सफलता – जिसे आप करना चाहते हैं उसी को करने का अवसर मिलना

१० – ज़िन्दगी का एक पल – जो एक बार जाता है तो कभी वापस नहीं आता

११ – बच्चे की किलकारियां

१२ – राह में अचानक बिछड़े हुए से मुलाकात

१३ – लक्ष्य को पाने अहसास

१४ – पहली बारिश में मिटटी से उठती सोंधी महक

१५ – बहुत अच्छा वार्तालाप – मुश्किल ही होता है

१६ – अप्रत्याशित बधाई – जिसकी या जिससे उम्मीद न की हो

१७ – अपने विचारों को साकार होते देखना

१८ – अचानक ही भूला-बिसरा गीत कानों में पड़ना

१९ – रस्ते में फिसलकर संभलनेवाले का यह जताना जैसे कुछ हुआ ही न हो:)

२० – रिमझिम बारिश में सहसा सूरज का किरणें बिखेर देना

२१ – सही वक़्त पर सही जगह पर होना

२२ – किशोरावस्था का प्यार – जब दुनिया सहसा बदल जाती है

२३ – बचपन की यादें – जब दुनियादारी कोसों दूर थी

२४ – दोस्तों के साथ बैठकर बीते दिनों को याद करना

२५ – उमंग-उत्साह – अपने दिल के कहने पर चलना

२६ – घर के कबाड़ में पुराने फोटो और उपहार मिल जाना

२७ – बहुत दिनों बाद घर आने पर होने वाला अहसास

२८ – दूसरों से पहले किसी चुटकुले का मतलब समझ कर हंस देना

२९ – ख़ुद में कोई छुपा हुआ हुनर

३० – किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना

३१ – भरे-पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना खाना

३२ – अपने बिस्तर की गर्माहट

३३ – प्रकृति के साथ एकात्म का भाव

३४ – घर – पैसे से मकान खरीद सकते हैं, लेकिन उसे घर नहीं बना सकते because home is where the heart is

३५ – दिमाग का खुलापन

३६ – लोगों को बेवकूफियां करते देखना

३७ – प्रेमी के साथ सूरज को उगते और डूबते देखना

३८ – लहरों के मंथन का शोर

३९ – “I love you”

४० – जब किसी को आपका जन्मदिन याद रह जाए

४१ – उस खोयी हुई चीज़ का मिल जाना जिसके मिलने की आस टूट चुकी हो

४२ – कला के लिए प्रेरणा

४३ – प्यारे से अजनबी की आँखों से ऑंखें मिल जाना

४४ – जादू की झप्पी

४५ – बिना किसी की परवाह किए गाते रहना

४६ – सर्दी में मुंह से निकलने वाली भाप जिसे देखकर बच्चे खुशी से उछलते हैं

४७ – स्वीकार कर लिए जाने का अहसास

४८ – बादलों में आकृतियां देखना

४९ – नवजात को हाथों में उठाना

५० – यह यकीन कि आप किसी पर भरोसा कर सकते हैं

५१ – आग जलाकर उसके इर्द-गिर्द दोस्तों के साथ बैठना

५२ – दो बुजुर्गों को प्यार में डूबे देखना

५३ – चांदनी रात का नशीलापन

५४ – झील में पानी पर पत्थरों को उछालना

५५ – दूर कहीं बिजली चमकती देखना

५६ – यह जानना कि आप जब लौटेंगे तो वह वहीं मिलेगी

५७ – वसंत का आगमन

५८ – उसे सोते हुए देखना:)

५९ – यह जानना कि जो आप लिखते हैं उसे कोई पढता भी है

६० – कमेन्ट पाना 🙂

ऐसी हज़ार बातें हो सकती हैं! आपको क्या लगता है?

(यह पोस्ट यहाँ से लेकर अनूदित/परिवर्तित की गई है)

Photo by Priscilla Du Preez on Unsplash

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There are 22 comments

  1. सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi

    कई दिनों से यहां आया नहीं। कारण स्‍पष्‍ट है पीडीएफ फाइल डाउनलोड कर ली है और रोज पढ़ रहा हूं। इस बीच यहां का खजाना और बढ़ गया। इस पोस्‍ट की मूल प्रति देखी थी। बहुत सुंदर अनुवाद दिया है। आभार। एक बात और पीडीएफ फाइल में दोनों की बच्‍चों की फोटो बहुत खूबसूरत है। ऐसा लगा मुफ्त कहानियों के साथ दो फूल और मिले हैं। यानि मुफ्त में भी दोगुना। 🙂 हर कथा के लिए आभार निशांत जी।

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    1. Nishant

      प्रिय डॉक्टर भूपेंद्र जी,

      शायद आप कमेन्ट करते समय आपसे पूछे जाने वाले नाम, ई-मेल और वेबसाइट के नियम के बारे में पूछ रहे हैं. ई-मेल पता भरना ज़रूरी है ताकि स्पैमिंग पर नियंत्रण रखा जा सके. यह वर्डप्रेस का मुख्य सेक्योरिटी फीचर है, हांलाकि इसे डिसेबल किया जा सकता है लेकिन इसे बरकरार रखना ज्यादा उपयुक्त है. वेबसाईट भरने का सुझाव ऑप्शनल है. अगर आप अपने घर पर ही ब्लॉगिंग या नेट सर्फिंग करते हैं तो मेरी जानकारी में दूसरी बार यदि आप ब्लौग पर आयेंगे तो आपको वे खाने भरे हुए मिलेंगे और आपको केवल अपना कमेन्ट ही लिखना होगा. आभार.

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    1. Nishant

      भाई रवि कुमार, आपके कमेन्ट के द्वारा मैं आपके ब्लौग हो आया… इतने सुन्दर चित्र और इतनी गहरी कवितायेँ. अपने पिता के मुख से धूमिल का नाम सुनता रहता था, कविता आज पढ़ी.

      आपकी ब्लॉगिंग काबिलेतारीफ है. आपको जानकार अच्छा लगा.

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  2. संजय ग्रोवर

    हुज़ूर आपका भी …एहतिराम करता चलूं ……..
    इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ

    ये मेरे ख्वाब की दुनिया नहीं सही, लेकिन
    अब आ गया हूं तो दो दिन क़याम करता चलूं
    -(बकौल मूल शायर)

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  3. संगीता पुरी

    बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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