“मैं यह कर दिखाऊँगा!”

michelangeloइतिहास ऐसे महान विशेषज्ञों से भी भरा हुआ है जिन्हें इस बात पर पूर्ण विश्वास था कि दूसरे व्यक्तियों के विचार, योजनायें, और उद्देश्य कभी भी साकार रूप नहीं ले सकते, लेकिन सफलता उन्होंने ही पाई जिन्होंने अपने मन में सदैव यह कहा – “मैं यह कर दिखाऊँगा।”
इटालियन शिल्पकार अगोस्टिनो डी’एंटोनियो ने संगमरमर के बड़े से खंड पर काम करना शुरू किया लेकिन वह अपनी रचना को मूर्त रूप न दे सका। उसने यह निष्कर्ष निकाला – संगमरमर के शिल्प नहीं बन सकते। दूसरे शिल्पकारों ने भी ऐसे ही प्रयास किए लेकिन वे भी थक-हार कर बैठ गए। माइकलएंजेलो ने संगमरमर के पत्थर में अपार संभावनाएं तलाश लीं और ऐसे बेजोड़ शिल्प बनाये जो ५०० साल बाद भी विस्मित कर देते हैं। उसकी बनाई गई डेविड की मूर्ती अपनी निपट नग्नता में भी चमत्कृत करती है। माइकलएंजेलो ने जब संगमरमर की कुख्याति के बारे में सुना तो उसने स्वयं से यही कहा – “मैं यह कर सकता हूँ, मैं यह कर दिखाऊँगा।”
स्पेन के जानकारों ने कहा कि कोलंबस का भारत को ढूँढने का नया और छोटा रास्ता सम्भव ही नहीं है। स्पेन के राजा और रानी ने विशेषज्ञों की बातों को अनसुना कर दिया क्योंकि कोलंबस ने अपार आत्मविश्वास से कहा था – “मैं यह कर सकता हूँ”। और उसने कर दिखाया। यह बात और है कि वह अमेरिका खोज बैठा।
यहां तक कि थॉमस अल्वा एडिसन ने अपने मित्र हेनरी फोर्ड को मोटरकार बनाने का विचार त्यागने के लिए कहा था क्योंकि उनके अनुसार कार का कोई भविष्य नहीं था। एडिसन ने तो फोर्ड को अपने साथ काम करने के लिए भी कहा। लेकिन फोर्ड अपनी धुन के पक्के थे और अपने कार के सपने को पूरा करने में लगे रहे। उनकी बनाई पहली कार में रिवर्स गियर नहीं था क्योंकि उन्हें इसका ख्याल ही नहीं था लेकिन यह गलती पता चलते ही उन्होंने कारों में ताबड़तोड़ बेहतर परिवर्तन कर डाले। उन्होंने आधुनिक परिवहन का नक्शा ही बदल डाला। कारों की सफलता ने अन्य वाहनों के अविष्कार का मार्ग प्रशस्त किया।

“भूल जाओ” – मैडम क्यूरी को बड़े-बड़े वैज्ञानिकों ने सलाह दी। उनके अनुसार रेडियम जैसा तत्व हो ही नहीं सकता था। लेकिन मैडम क्यूरी ने उनसे कहा – “मुझे खुद पर भरोसा है”।

और ऑरविल तथा विल्बर राइट बंधुओं को कौन भूल सकता है! उनके दोस्तों, पत्रकारों, रक्षा विशेषज्ञों, यहाँ तक कि उनके पिता ने भी उड़ने वाले विमान बनाने के विचार का मजाक उड़ाया। “ये विमान नहीं बल्कि पैसा उड़ाने का मूर्खतापूर्ण विचार है! उड़ना सिर्फ़ पक्षियों के लिए छोड़ दो!” – “माफ़ करें” – राइट बंधुओं ने कहा। ‘’ये हमारा सपना है और हम इसे हकीकत में बदल देंगे”। परिणामस्वरूप, उत्तरी कैलिफोर्निया में किट्टी हॉक नामक एक छोटे से समुद्रतट पर कुछ सेकेंडों के लिए उनका विमान सिर्फ़ बारह मीटर ऊपर उड़ा और मानव की उड़ान ने फिर थमने का नाम न लिया।

अंत में, यदि ऊपर दिये गये प्रसंगों ने आपके मन में उत्साह की विद्युत प्रवाहित की हो तो ज़रा बेंजामिन फ्रेंकलिन के कष्टों के बारे में सोचें। उन्हें आसमान की बिजली के साथ अपने दुस्साहसी प्रयोग को न करने के लिए चेतावनी दी गई थी। लोगों ने कहा – “कितने समय और साधनों की बरबादी है!” लेकिन फ्रेंकलिन का प्रयोग सफल रहा। वाकई, आसमानी बिजली को अपनी उंगलियों पर महसूस करने के प्रयोग में जान भी जा सकती थी लेकिन फ्रेंकलिन की बात तो सच साबित हो गई।

अब आप क्या करेंगे? थक-हार कर बैठ जायेंगे या खुद से कहेंगे – “मैं कर सकता हूँ, मैं कर दिखाऊँगा”।

Advertisements

About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 5 comments

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s