लम्बी उम्र का राज़

प्रसिद्द चीनी दार्शनिक कन्फ़्युशियस से मिलने एक सज्जन आए। दोनों के बीच बहुत सारी बातों पर चर्चा हुई। कन्फ़्युशियस ने उस व्यक्ति के बहुत सारे प्रश्नों के उत्तर भी दिए।

उन सज्जन ने कन्फ़्युशियस से पूछा – “लंबे जीवन का रहस्य क्या है?”

कन्फ़्युशियस यह सुनकर मुस्कुराये। उन्होंने उस व्यक्ति को पास बुलाकर पूछा – “मेरे मुंह में देखकर बताएं कि जीभ है या नहीं।”

उस व्यक्ति ने मुंह के भीतर देखकर कहा – “जीभ तो है।”

कन्फ़्युशियस ने फ़िर कहा – “अच्छा, अब देखिये कि दांत हैं या नहीं।”

उन सज्जन ने फ़िर से मुंह में झाँककर देखा और कहा – “दांत तो एक भी नहीं हैं।”

कन्फ़्युशियस ने पूछा – “अजीब बात है। जीभ तो दांतों से पहले आई थी। उसे तो पहले जाना चाहिए था। लेकिन दांत पहले क्यों चले गए?”

वह सज्जन जब इसका कोई जवाब नहीं दे सके तो कन्फ़्युशियस ने कहा – “इसका कारण यह है कि जीभ लचीली होती है लेकिन दांत कठोर होते हैं। जिसमें लचीलापन होता है वह लंबे समय तक जीता है।”

(कन्फ्यूशियस का चित्र यहाँ से लिया गया है)

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 7 comments

  1. सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi

    सच बता रहा हूं मेरी पड़नानी ने बचपन में कई बार अपनी जीभ दिखाकर यह सीख दी थी। मुझे अब तक वे दृश्‍य ऐसे याद हैं जैसे कल ही की बात हो। एक बात और जब 89 वर्ष की आयु में उनका देहावसान हुआ तो उनके मुंह में न केवल जीभ थी बल्कि सहेजकर रखे गए कुछ साफ सुथरे दांत भी थे। तब मैंने सोचा था कि सलीके से रखे जाएं तो कठोर दांत भी अंत तक साथ निभा सकते हैं। हमारी गलती यह होती है कि कठोरता के कारण हम दांतों को इग्‍नोर करते हैं जबकि वे कोमल मसूड़ों पर टिके होते हैं। 🙂

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