दो घड़े

quinault riverएक मिट्टी का घड़ा और एक पीतल का घड़ा नदी किनारे घाट पर रखे हुए थे। नदी की धारा ने उन्हें नदी में खींच लिया और वे नदी में उतराते हुए बहने लगे। मिट्टी का घड़ा पानी की बड़ी-बड़ी लहरों को देखकर चिंतित हो गया। पीतल के घड़े ने उसे चिंतित देखकर दिलासा दिया – “परेशान मत हो, किसी भी संकट में मैं तुम्हारी सहायता करूँगा”।

“अरे नहीं!” – मिट्टी का घड़ा भयभीत स्वर में बोला – “कृपा करके मुझसे जितना दूर रह सकते हो उतना दूर रहना! मेरे भय का वास्तविक कारण तुम ही हो। भले ही लहरें मुझे तुमसे टकरा दें या तुम्हें मुझसे टकरा दें, टूटना मुझे ही है।”

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 5 comments

  1. Anonymous

    hi…nice to go through your blog…well written…by the way which typing tool are you using for typing in Hindi…?now a days typing in an Indian Language is not a big task…recently i was searching for the user friendly Indian Language typing tool and found ..” quillpad “. do u use the same…?heard that it is much more superior than the Google’s indic transliteration..!?expressing our feelings in our own mother tongue is a great experience…so it is our duty to save, protect,popularize and communicate in our own mother tongue…try this, http://www.quillpad.inJai…Ho….

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  2. सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi

    यह भय शायद कमजोर और ताकतवर का नहीं बल्कि दो भिन्‍न स्‍वभाव के लोगों के बीच का होना चाहिए। जैसे कि कटोरी और लहसुन वाला उदाहरण है। कटोरी को लहसुन पर रखा जाए या लहसुन को कटोरी पर। बदबू लहसुन की ही रहेगी। 🙂 यहां भी कुछ ऐसा ही होना चाहिए। कम से कम मानव व्‍यवहार के संबंध में …

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