दो फ़रिश्ते : Two Angels

Ohlsdorf Cemeteryदो फ़रिश्ते दुनिया में घूम रहे थे और वे एक धनी परिवार के घर में रात गुजरने के लिए रुक गए। वह परिवार बहुत अशिष्ट था और उन्होंने फरिश्तों को मेहमानों के कमरे में ठहरने के लिए मना कर दिया। फरिश्तों को रुकने के लिए उनहोंने घर के बेसमेंट में बनी ठंडी-संकरी जगह दे दी।

कठोर फर्श पर उनहोंने अपना बिस्तर लगाया। बड़े फ़रिश्ते ने दीवार में एक छेद देखा और उसे ठीक कर दिया। जब छोटे फ़रिश्ते ने बड़े फ़रिश्ते से इसका कारण पूछा तो बड़े फ़रिश्ते ने जवाब दिया – “चीज़ें हमेशा वैसी नहीं होतीं जैसी वे दिखती हैं”।

अगली रात वे दोनों एक बहुत गरीब घर में आराम करने के लिए रुके। घर के मालिक किसान और उसकी पत्नी ने उनका स्वागत किया। उनके पास जो कुछ रूखा-सूखा था वह उन्होंने फरिश्तों के साथ बांटकर खाया और फ़िर उन्हें सोने के लिए अपना बिस्तर दे दिया। किसान और उसकी पत्नी नीचे फर्श पर सो गए।

सवेरा होने पर फरिश्तों ने देखा कि किसान और उसकी पत्नी रो रहे थे क्योंकि उनकी आय का एकमात्र स्रोत उनकी पालतू गाय खेत में मरी पड़ी थी।

यह देखकर छोटे फ़रिश्ते ने बड़े फ़रिश्ते से गुस्से से कहा – “आपने यह क्यों होने दिया? पहले आदमी के पास सब कुछ था फ़िर भी आपने उसके घर की मरम्मत करके उसकी मदद की, जबकि दूसरे आदमी ने कुछ न होने के बाद भी हमें इतना सम्मान दिया फ़िर भी आपने उसकी गाय को मरने दिया!”

“चीज़ें हमेशा वैसी नहीं होतीं जैसी वे दिखती हैं” – दूसरे फ़रिश्ते ने जवाब दिया – “जब हम पहले मकान की बेसमेंट में ठहरे थे तब मैंने यह देखा कि दीवार के उस छेद के पीछे स्वर्ण का भंडार था। चूँकि उस घर का मालिक बहुत लालची और लोभी था इसलिए मैंने उस छेद को बंद कर दिया ताकि वह और अधिक धन-संपत्ति न पा सके। इस किसान के घर में हम उसके बिस्तर पर सोये थे। उस समय मृत्यु किसान की पत्नी को लेने के लिए आई थी। वह खाली हाथ नही जा सकती थी इसलिए मैंने उसे किसान की गाय ले जाने के लिए कहा। गौर से देखो तो चीज़ें हमेशा वैसी नहीं होतीं जैसी वे दिखती हैं।”

(~_~)

Two travelling angels stopped to spend the night in the home of a wealthy family. The family was rude and refused to let the angels stay in the mansion’s guest room. Instead the angels were given a small space in the cold basement. As they made their bed on the hard floor, the older angel saw a hole in the wall and repaired it.

When the younger angel asked why, the older angel replied, “Things aren’t always what they seem.”

The next night the pair came to rest at the house of a very poor, but very hospitable farmer and his wife. After sharing what little food they had the couple let the angels sleep in their bed where they could have a good night’s rest.

When the sun came up the next morning the angels found the farmer and his wife in tears. Their only cow, whose milk had been their sole income, lay dead in the field.

The younger angel was infuriated and asked the older angel, “How could you have let this happen? The first man had everything, yet you helped him. The second family had little but was willing to share everything, and you let the cow die.”

“Things aren’t always what they seem,” the older angel replied. “When we stayed in the basement of the mansion, I noticed there was gold stored in that hole in the wall. Since the owner was so obsessed with greed and unwilling to share his good fortune, I sealed the wall so he wouldn’t find it.”

“Then last night as we slept in the farmers bed, the angel of death came for his wife. I gave him the cow instead. Things aren’t always what they seem.”

Sometimes that is exactly what happens when things don’t turn out the way they should. If you have faith, you need to trust that the outcome has a purpose. You just might not know it until some time later…

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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