मन में पत्थर

फा-येन नामक चीनी ज़ेन गुरु ने अपने दो शिष्यों को वस्तुनिष्ठता और विषयनिष्ठता पर तर्क-वितर्क करते सुना। वे इस विवाद में शामिल हो गए और उन्होंने शिष्यों से पूछा – “यहाँ एक बड़ा सा पत्थर है। तुम लोगों के विचार से यह पत्थर तुम्हारे मन के बाहर है या भीतर है?”

उनमें से एक शिष्य ने उत्तर दिया – बौद्ध दर्शन की दृष्टि से सभी वस्तुएं मानस का वस्तुनिष्ठीकरण हैं। अतएव मैं यह कहूँगा कि पत्थर मेरे मन के भीतर है।”

“फ़िर तो तुम्हारा सर बहुत भारी होना चाहिए” – फा-येन ने उत्तर दिया।

(A story/anecdote about Zen Master Fa-yen – in Hindi) (image credit)

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

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