Posts Tagged With: जागरण
स्वयं से पूछो, “मैं कौन हूं?”
”मैं कौन हूं?” जो स्वयं से इस प्रश्न को नहीं पूछता है, उसके लिए ज्ञान के द्वार बंद ही रह जाते हैं. उस द्वार को खोलने की कुंजी यही है. स्वयं से पूछो कि ”मैं कौन हूं?” और जो प्रबलता से और समग्रता से पूछता है, वह स्वयं से ही उत्तर भी पा जाता है. [...]
हम सोये ही हुए हैं!
स्मरण रहे कि मैं मूर्छा को ही पाप कहता हूं. अमूर्च्छित चित्त-दशा में पाप वैसे ही असंभव है, जैसे कि जानते और जागते हुए अग्नि में हाथ डालना. जो अमूच्र्छा को साध लेता है, वह सहज ही धर्म को उपलब्ध हो जाता है. संत भीखण के जीवन की घटना है. वे एक रात्रि प्रवचन दे [...]

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