Tag Archives: गुरु-शिष्य
परम सत्य
“लोग अक्सर ही सत्य को भूल क्यों जाते हैं”, यात्री ने गुरु से पूछा. “कैसा सत्य?”, गुरु ने पूछा. “मैं जीवन में कई बार सत्य के मार्ग से भटक गया”, यात्री ने कहा, “और हर बार मैं किसी भांति मार्ग … Continue reading →
जीवन का आनंद
“इस साल मैंने अपने जीवन का पूरी तरह से आनंद लिया”, शिष्य ने गुरु से कहा. “अच्छा?”, गुरु ने पूछा, “क्या-क्या किया तुमने?” “सबसे पहले मैंने गोताखोरी सीखी”, शिष्य ने कहा, “फिर मैं दुर्गम पर्वतों पर विजय पाने के लिए … Continue reading →
चुनाव
शिष्य ने गुरु से पूछा, “यदि मैं आपसे यह कहूं कि आपको आज सोने का एक सिक्का पाने या एक सप्ताह बाद एक हज़ार सिक्के पाने के विकल्प में से एक का चुनाव करना है तो आप क्या लेना पसंद … Continue reading →
मन
“मेरे मन के साथ कुछ गड़बड़ है” शिष्य ने कहा, “मेरे विचार तर्कसंगत नहीं हैं”. गुरु ने कहा, “शांत सरोवर और उफनती नदी, दोनों जल ही हैं” शिष्य गुरु की बात नहीं समझ पाया और मुंह बाए देखता रहा. गुरु … Continue reading →
परिवर्तन
ज़ेन शिष्य ने गुरु से पूछा, “मैं दुनिया को बदलना चाहता हूँ? क्या यह संभव है?” गुरु ने पूछा, “क्या तुम दुनिया को स्वीकार कर सकते हो?” शिष्य ने कहा, “नहीं, मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता. यहाँ युद्ध, गरीबी, … Continue reading →
