Posts Tagged With: ईश्वर

तीन वृक्षों की कहानी

यह कहानी बहुत पुरानी है. किसी नगर के समीप एक पहाड़ी पर तीन वृक्ष थे. वे तीनों अपने सुख-दुःख और सपनों के बारे में एक दूसरे से बातें किया करते थे. एक दिन पहले वृक्ष ने कहा – “मैं खजाना रखने वाला बड़ा सा बक्सा बनना चाहता हूँ. मेरे भीतर हीरे-जवाहरात और दुनिया की सबसे [...]

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सत्य की एक झलक

सत्य की एक किरण ही पर्याप्त है. ग्रंथों का भार जो नहीं कर पाता है, सत्य की एक झलक वह कर दिखाती है. अंधेरे में रौशनी के लिए प्रकाश का वर्णन करने वाले बड़े-बड़े शास्त्र किसी काम के नहीं, मिट्टी का एक दिया जलाना आना ही पर्याप्त है. Emerson रॉल्फ वाल्डो इमर्सन के व्याख्यानों में [...]

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मनुष्यता से दिव्यता की ओर

तुम्हारी आत्मा, चेतना, और जीवन दिव्यता का अंश है. यह ईश्वर का ही विस्तार है. तुम स्वयं को ईश्वर तो नहीं कह सकते पर ईश्वर से एकात्म्य तुम्हारा जन्मसिद्द अधिकार है. पानी की एक बूँद सागर नहीं हो सकती लेकिन यह सागर से ही निकली है और इसमें सागर के सारे गुण हैं. ~ एकहार्ट [...]

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संयम और संगीत ही साधना है

सुबह जा चुकी है. धूप गर्म हो रही है और मन छाया में चलने को है. एक वृद्ध अध्यापक आये हें. वर्षों से साधना में लगे हैं. तन सूख कर हड्डी हो गया है. आंखें धूमिल हो गयी हैं और गड्ढों में खो गयी हैं. लगता है कि अपनों ने बहुत सताया है और उस [...]

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मन के छिद्र बंद करो

रात्रि बीत गई है और खेतों में सुबह का सूरज फैल रहा है. एक छोटा सा नाला अभी-अभी पार हुआ है. गाड़ी की आवाज सुन चांदनी के फूलों से सफेद बगुलों की एक पंक्ति सूरज की ओर उड़ गई है. फिर कुछ हुआ है और गाड़ी रुक गई है. इस निर्जन में उसका रुकना भला [...]

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