Tag Archives: ईश्वर

The Tale of Three Trees – तीन वृक्षों की कहानी

यह कहानी बहुत पुरानी है. किसी नगर के समीप एक पहाड़ी पर तीन वृक्ष थे. वे तीनों अपने सुख-दुःख और सपनों के बारे में एक दूसरे से बातें किया करते थे. एक दिन पहले वृक्ष ने कहा – “मैं खजाना … Continue reading

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सत्य की एक झलक

सत्य की एक किरण ही पर्याप्त है. ग्रंथों का भार जो नहीं कर पाता है, सत्य की एक झलक वह कर दिखाती है. अंधेरे में रौशनी के लिए प्रकाश का वर्णन करने वाले बड़े-बड़े शास्त्र किसी काम के नहीं, मिट्टी … Continue reading

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मनुष्यता से दिव्यता की ओर

तुम्हारी आत्मा, चेतना, और जीवन दिव्यता का अंश है. यह ईश्वर का ही विस्तार है. तुम स्वयं को ईश्वर तो नहीं कह सकते पर ईश्वर से एकात्म्य तुम्हारा जन्मसिद्द अधिकार है. पानी की एक बूँद सागर नहीं हो सकती लेकिन … Continue reading

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संयम और संगीत ही साधना है

सुबह जा चुकी है. धूप गर्म हो रही है और मन छाया में चलने को है. एक वृद्ध अध्यापक आये हें. वर्षों से साधना में लगे हैं. तन सूख कर हड्डी हो गया है. आंखें धूमिल हो गयी हैं और … Continue reading

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मन के छिद्र बंद करो

रात्रि बीत गई है और खेतों में सुबह का सूरज फैल रहा है. एक छोटा सा नाला अभी-अभी पार हुआ है. गाड़ी की आवाज सुन चांदनी के फूलों से सफेद बगुलों की एक पंक्ति सूरज की ओर उड़ गई है. … Continue reading

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