स्टीवन कोवी (Steven Covey) की पुस्तक The 7 Habits of Highly Effective People में एक चित्र है जिसे मैं हमेशा ध्यान में रखता हूँ. बाईं ओर दिए चित्र को देखिये:
इस चित्र में वर्तुलों द्वारा दो क्षेत्र प्रदर्शित किये गए हैं जिनपर हम अपने समय और शक्तियों को केन्द्रित करते हैं. अधिकांश लोग प्रभाव क्षेत्र के बाहर अपने समय और शक्ति को लगाते हैं जो कि चिंताओं का क्षेत्र है. ऐसे लोग आमतौर पर ऐसी बातों पर सोच-विचार करते हैं जिनपर उनका नियंत्रण नहीं होता, जैसे अगले सप्ताह का मौसम या मध्य पूर्व के देशों की दशा. ऐसे ही विषयों पर स्वयं को चिंतन या विवाद में व्यस्त रखकर वे अपने मूल्यवान समय और ऊर्जा को व्यर्थ कर देते हैं.
कोवी के अनुसार सफल व्यक्ति मुख्यतः अपने प्रभाव क्षेत्र के दायरे में ही चिंतन-मनन करते हैं. वे उन बातों की परवाह नहीं करते जिनपर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता. वे अपने समय और सामर्थ्य का निवेश एवं नियोजन उन क्षेत्रों में करते हैं जिनसे वास्तव में कुछ मूल्यवान और महत्वपूर्ण की प्राप्ति हो. अपने प्रभाव क्षेत्र को क्रमशः बढ़ाते हुए वे अधिक शक्तिसंपन्न व प्रभावशाली होते जाते हैं.
आप अपने समय और सामर्थ्य का उपयोग किस प्रकार करते हैं?
यदि आप रोज़ शाम को टीवी पर ख़बरों में बढ़ते अपराध और बिगड़ते हालात को देखकर यह अफसोस करते रहते हैं कि दुनिया रसातल में जा रही है तो आप चिंता के वर्तुल में भ्रमण कर रहे हैं. इसके विपरीत यदि आप प्रभाव क्षेत्र में हैं तो आप ऐसे सकारात्मक प्रयास करते हैं जिनसे लोगों में जागरूकता आये. आप नए विचारों के साथ आगे आते हैं, लोगों को उनकी योग्यताओं और शक्तियों का अहसास कराते हैं, और उनका मार्गदर्शन करते हैं ताकि अधिकाधिक लोगों के जीवन में सुधार आये.
मैं कई लोगों के बीच में वार्ता करने से झिझकता था क्योंकि मेरे भीतर यह भय व्याप्त था कि मैं कुछ भी ठीक से नहीं कह पाऊंगा और सभी मुझे मूर्ख समझेंगे. मैं इतना संकोची था कि किसी गोष्ठी में कुछ पूछने के लिए या अपने विचार रखने के लिए हाथ उठाने से भी हिचकिचाता था. यदि मैं कुछ पूछता भी तो मेरा दिल बेतहाशा धड़कने लगता और मैं खुद से यह पूछता रहता कि मैं कोई बेवकूफी भरा सवाल तो नहीं पूछ रहा हूँ! मैं हमेशा चिंताओं के क्षेत्र में ही फंसा रहता था. किसी तरह मैं उसमें से निकलकर प्रभाव क्षेत्र में जा सका. ऐसा करने के लिए मुझे पब्लिक स्पीकिंग कोचिंग से बड़ी मदद मिली. अपने चिंता क्षेत्र से बाहर निकले बिना मैं लोगों के सामने बिना किसी तैयारी के भाषण देने के बारे में सोच भी नहीं सकता था.
अब मैं आपको यह बताता हूँ कि वे कौन सी बातें (चिंता का क्षेत्र) हैं जिनके बारे में लोग बड़ी चिंता करते हैं. उसके ठीक बाद मैं उन उपायों (प्रभाव क्षेत्र) को इंगित करूंगा जो खराब दशाओं में सुधार ला सकते हैं:
पर्यावरण/प्रदूषण – रिसाइकल करें. कम उपयोग करें. आवश्यकताएं घटाएं.
आय-व्यय/घरेलू खर्च – आमदनी बढ़ाएं. खर्चे कम करें. छोटी-छोटी बचत करें.
स्वास्थ्य – व्यायाम करें. पैदल चलें.
अकेलापन/अवसाद – अपने मेलजोल का दायरा बढ़ाएं. खुशमिजाज़ बनें.
भविष्य – टाइम मशीन बनाएं.
जब भी आप किसी मसले पर काम करें तो खुद से यह ज़रूर पूछें, “मैं इस स्थिति में किस प्रकार सुधार ला सकता हूँ? मैं इसे बेहतर कैसे बना सकता हूँ?”
कुछ नए विचार एकत्र करें और उनपर कार्रवाई शुरू कर दें. यदि आप कुछ नहीं सोच पा रहे हों तो यह अवश्य अनुभव करें कि किसी समस्या के बारे में चिंता करना केवल अपने समय और शक्तियों की बर्बादी है. फिर अपने संसाधनों को उस दिशा में मोड़ दें जहां आप वाकई कुछ करके दिखा सकते हों.
This is a guest post of Niall Doherty of ‘Disrupting the Rabblement’. Niall is on a mission to become a self-employed vagabond, pursuing his passions and helping other people escape mediocrity while he travels the world.


