Tag Archives: विश्वास

यक़ीन


एक किसान खेत से अपने घर लौट रहा था. उसने रास्ते में एक गधा देखा.

गधे ने किसान से कहा – “सुनो भाई, मैं कोई साधारण गधा नहीं हूँ. ईसा मसीह का जन्म मेरे सामने ही हुआ था. मैं दो हज़ार सालों से इस दुनिया में हूँ और सिर्फ मैं ही इस बात की गवाही दे सकता हूँ.”

विस्मित और भयभीत, किसान सरपट दौड़कर अपने गाँव के चैपल तक गया और वहां पादरी को सारा किस्सा कह सुनाया.

“असंभव!” – पादरी ने हँसते हुए कहा. तब किसान ने उसे दोबारा से पूरी बाद बताई. गधे के कहे एक-एक शब्द को किसान ने दोहराया.

“मैंने कहा न यह नामुमकिन है! कोई भी पशु मनुष्यों की तरह नहीं बोल सकता” – पादरी ने कहा.

“लेकिन आप सिर्फ एक बार मेरे साथ चलकर उसकी बात सुन लीजिये” – किसान अपनी बात पर अड़ा रहा.

पादरी ने कहा – “भाई मुझे तो तुम ही पूरे गधे लग रहे हो जो एक पढ़े-लिखे पादरी की बात को छोड़कर एक गधे पर यकीन कर रहे हो!”

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Tell Your Story… – अपनी कथा कहो…


महान रब्बाई इज़राएल शेम तोव ने देखा कि उनके लोगों के साथ अन्याय हो रहा है और इसे दूर करने का उपाय करने के लिए वे वन में गए. वहां उन्होंने पवित्र अग्नि प्रज्वलित की और अपने धर्मावलम्बियों की रक्षा के लिए परमेश्वर से प्रार्थना की.

और परमेश्वर ने उनकी प्रार्थना सुनकर उन्हें चमत्कार सौंपा.

बाद में उनके शिष्य मेज़रेथ के मैगिद ने भी अपने गुरु के पदचिह्नों का अनुसरण किया. वन में उसी स्थान पर जाकर उसने भी परमेश्वर से कहा – “हे परमपिता, मुझे पवित्र अग्नि प्रज्वलित करना नहीं आता पर मैं शास्त्रोक्त प्रार्थना कहता हूँ… मेरी प्रार्थना सुनो!”

और इस बार भी चमत्कार प्रकट हुआ.

एक और पीढ़ी गुज़र गयी और सोसोव के रब्बाई मोशे-लीब ने जब युद्ध आसन्न देखा तो वन में जाकर परमेश्वर से कहा – “परमपिता, मुझे पवित्र अग्नि प्रज्वलित करना नहीं आता और मैं विधिवत प्रार्थना भी नहीं जानता लेकिन इसी स्थान पर मेरे पुरखों ने आपका स्मरण किया था. हमपर दया करो, प्रभु!”

और ईश्वर ने उसकी सहायता की.

पचास साल बाद रिज़िन के रब्बाई इज़राएल ने अपनी व्हीलचेयर पर बैठकर कहा – “मुझे पवित्र आग जलाना नहीं आता, मैं प्रार्थना भी नहीं जानता और मुझे वन के किसी स्थान का भी कुछ पता नहीं है. मैं केवल इस परंपरा का स्मरण कर सकता हूँ और मुझे आशा है कि ईश्वर मुझे अवश्य सुनेगा”

और इस प्रकार परंपरा का स्मरण मात्र ही संकट को टालने के लिए पर्याप्त था.

मैं इसमें यह जोड़ना चाहूँगा:
अपनी कथा कहो… अपनी परंपरा का स्मरण करो. बहुत संभव है कि तुम्हारे पडोसी तुम्हें समझ नहीं पायें पर वे तुम्हारे मन की शुद्धता को अवश्य देख लेंगे. कथाएं ही वह एकमात्र सेतु रह गईं हैं जो विभिन्न संस्कृति और सभ्यताओं के मनुष्यों को एक सूत्र में जोड़ सकतीं हैं.

(यह कहानी पाउलो कोएलो की इस पोस्ट का स्वतन्त्र अनुवाद है)

The great Rabbi Israel Shem Tov, when he saw that the people in his village were being mistreated, went into the forest, lit a holy fire, and said a special prayer, asking God to protect his people.

And God sent him a miracle.

Later, his disciple Maggid de Mezritch, following in his master’s footsteps, would go to the same part of the forest and say: “Master of the Universe, I do not know how to light the holy fire, but I do know the special prayer; hear me, please!”

The miracle always came about.

A generation passed, and Rabbi Moshe-leib of Sasov, when he saw the war approaching, went to the forest, saying:

“I don’t know how to light the holy fire, nor do I know the special prayer, but I still remember the place. Help us, Lord!”

And the Lord helped.

Fifty years later, Rabbi Israel de Rizhin, in his wheelchair, spoke to God: “I don’t know how to light the holy fire, nor the prayer, and I can’t even find the place in the forest. All I can do is tell this story, and hope God hears me.”

And telling the story was enough for the danger to pass.

And I will add:

Tell your stories. Your neighbors may not understand you, but they will understand your soul. Stories are the last bridge left to allow different cultures to communicate among each other.

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आस्था और विश्वास


everestपर्वतारोहियों का एक दल एक अजेय पर्वत पर विजय पाने के लिए निकला. उनमें एक अतिउत्साही पर्वतारोही भी था जो यह चाहता था कि पर्वत के शिखर पर विजय पताका फहराने का श्रेय उसे ही मिले. रात्रि के घने अन्धकार में वह अपने तम्बू से चुपके से निकल पड़ा और अकेले ही उसने पर्वत पर चढ़ना आरंभ किया. गहरी काली रात में, जब हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था, वह शिखर की ओर बढ़ता रहा. बहुत प्रयास करने के बाद शिखर जब कुछ ही दूर प्रतीत हो रहा था तभी अचानक उसका पैर फिसला और वह तेजी से नीचे की तरफ गिरने लगा. उसे अपनी मृत्यु सामने ही दिख रही थी लेकिन उसकी कमर से बंधी रस्सी ने झटके से उसे रोक दिया. घने अन्धकार में उसे नीचे कुछ नहीं दिख रहा था. रस्सी को जकड़कर ऊपर पहुँच पाना संभव नहीं था. बचने की कोई सूरत न पाकर वह चिल्लाया: – ‘हे ईश्वर… मेरी मदद करो!’

तभी अचानक एक गंभीर स्वर कहीं गूँज उठा – “तुम मुझ से क्या चाहते हो?”

पर्वतारोही बोला – “हे ईश्वर! मेरी रक्षा करो!”

“क्या तुम्हें सच में विश्वास है कि मैं तुम्हारी रक्षा कर सकता हूँ ?

“हाँ ईश्वर! मुझे तुम पर पूरा विश्वास है” – पर्वतारोही बोला.

“ठीक है, अगर तुम्हें मुझ पर विश्वास है तो अपनी कमर से बंधी रस्सी काट दो…..”

यह सुनकर पर्वतारोही का दिल डूबने लगा. कुछ क्षण के लिए वहाँ एक चुप्पी सी छा गई और उस पर्वतारोही ने अपनी पूरी शक्ति से रस्सी को पकड़े रहने का निश्चय कर लिया.

अगले दिन बचाव दल को एक रस्सी के सहारे लटका हुआ पर्वतारोही का ठंड से जमा हुआ शव मिला. उसके हाथ रस्सी को मजबूती से थामे थे और वह धरती से केवल दस फुट की ऊँचाई पर था. यदि उसने रस्सी को छोड़ दिया होता तो वह पर्वतीय ढलान से लुढ़कता हुआ मामूली नुकसान के साथ जीवित बच गया होता.

ईश्वर में सम्पूर्ण आस्था और विश्वास रखना सहज नहीं है. ऐसी दशा में क्या आप अपनी रस्सी छोड़ देते?

(A story of a mountaineer – doubt – submission – in Hindi)

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ईसप की कहानी : विश्वसनीयता बनाये रखें


wolf & sheepईसप की छोटी-छोटी कहानियां महान सत्यों से हमारा परिचय करातीं हैं. हम सभी ने ईसप की वह कहानी पढ़ी है जिसमें एक शरारती लड़का “भेड़िया आया, भेड़िया आया” का शोर मचाकर हमेशा ही गांववालों को डरा देता है. गांव के बाहर जब भेड़ें चरती रहतीं हैं तब वह गांववालों को परेशान करने के लिए शोर मचाता है – “बचाओ, बचाओ! भेड़िया आया, भेड़िया आया”.

शोर सुनकर गांववाले दौड़े-दौड़े वहां पहुंचते हैं पर उन्हें कोई भेड़िया नहीं मिलता. शरारती लड़का उनको परेशान देखकर हंसता है. ऐसा कई बार होता है. बेचारे गांववाले अपनी भेड़ें बचाने के लिए भागते हैं लेकिन हरबार बेवकूफ बन जाते हैं.

एक दिन ऐसा होता है कि वाकई एक भेड़िया वहां आकर भेड़ों के झुंड पर हमला बोल देता है. लड़का अत्यंत भयभीत होकर गांववालों को मदद के लिए पुकारता है – “बचाओ, बचाओ भेड़िया आया, भेड़िया आया”. लेकिन गांववाले उसकी गुहार को शरारत मानकर अनसुना कर देते हैं. वे इसे हरबार की तरह उसकी शैतानी समझकर इसपर विश्वास नहीं करते. लड़के की भेड़ें भेड़िये का शिकार बन जाती हैं.

इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है : जब लोग झूठ बोलते हैं तब वे अपनी विश्वसनीयता खो देते हैं. अपनी विश्वसनीयता खो देने के बाद वे सच भी बोलें तो भी लोग उनका यकीन नहीं करते हैं.

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200px-Thomas_Carlyle_-_Project_Gutenberg_eText_13103“ईमानदार आदमी बनकर देखो और तुम पाओगे कि दुनिया से एक बेईमान कम हो गया है” – थॉमस कार्लाइल

चित्र साभार :फ्लिकर और विकीपीडिया

(A motivational / inspiring fable of Aesop – a boy and his sheep – wolf – in Hindi)

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