“मेरे मन के साथ कुछ गड़बड़ है” शिष्य ने कहा, “मेरे विचार तर्कसंगत नहीं हैं”.
गुरु ने कहा, “शांत सरोवर और उफनती नदी, दोनों जल ही हैं”
शिष्य गुरु की बात नहीं समझ पाया और मुंह बाए देखता रहा.
गुरु ने अपने कथन की व्याख्या की, “तुम्हारे सबसे शुद्ध, सचेत, उन्नत विचार और सबसे विकृत, दूषित, भद्दे विचार – तुम्हारा मन ही इनका सृजन करता है.”
Thanx to John Weeren for this story



