शब्दों पर बने मुकुट

torah
जब हज़रत मूसा यहूदी बाइबल के कुछ खास हिस्सों को लिखने के लिए स्वर्ग पधारे तब ईश्वर ने उनसे तोरा* के कुछ शब्दों के ऊपर छोटे-छोटे मुकुट बना देने के लिए कहा.

मूसा ने ईश्वर से पूछा – “हे परमपिता, आपने ये मुकुट किसलिए बनवाये हैं?”

ईश्वर ने कहा – “क्योंकि अब से सैंकड़ों पीढ़ियों के बाद अकिवा नामक एक व्यक्ति इनकी व्याख्या करेगा.”

मूसा ने ईश्वर से पूछा – “क्या आप अकिवा द्वारा की गयी व्याख्या मुझे दिखा सकते हैं?”

ईश्वर ने मूसा को भविष्य का दर्शन कराया. वहां रब्बाई अकिवा अपनी कक्षा में शिष्यों को पढ़ा रहा था. एक शिष्य ने अकिवा से पूछा – “रब्बाई, पुस्तक में कुछ शब्दों के ऊपर मुकुट किसलिए बनाए गए हैं?”

“मैं नहीं जानता” – अकिवा ने उत्तर दिया – “और मुझे लगता है कि हज़रत मूसा को भी इनके बारे में पता नहीं रहा होगा. उन्होंने ऐसा शायद यही बताने के लिए किया होगा कि ईश्वर के कुछ कार्यों के बारे में कुछ नहीं जानते हुए भी हम उसके विवेक पर भरोसा कर सकते हैं.”

* तोरा यहूदियों के धार्मिक ग्रन्थ हैं.

(पाउलो कोएलो की कहानी – A story of Paolo Coelho – in Hindi)

When Moses ascended to Heaven to write a certain part of the Bible, the Almighty asked him to place small crowns on some letters of the Torah. Moses said: “Master of the Universe, why draw these crowns?” God answered: “Because one hundred generations from now a man called Akiva will interpret them.”

“Show me this man’s interpretation,” asked Moses.

The Lord took him to the future and put him in one of Rabbi Akiva’s classes. One pupil asked: “Rabbi, why are these crowns drawn on top of some letters?”

“I don’t know.” Replied Akiva. “And I am sure that not even Moses knew. He did this only to teach us that even without understanding everything the Lord does, we can trust in his wisdom.”

पुनर्जीवन : Resurrection

ghost hour (2)

नववर्ष की पूर्वरात्रि को अपने घर जाते समय रब्बाई का सामना एक प्रेत से हो गया. रब्बाई उसे देखकर भयभीत था. उस व्यक्ति की मृत्यु उस दिन सुबह ही हुई थी और रब्बाई ने ही उसका अंतिम संस्कार करवाया था.

“तुम तो मर चुके हो!” – भय से जकड़े हुए रब्बाई ने उससे पूछा – “तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”

प्रेत ने कहा – “रब्बाई, आज की रात कुछ आत्माओं को दुबारा जन्म लेने के लिए भेजा गया है. मैं भी उनमें से एक हूँ.”

“और तुम्हें वापस क्यों भेजा गया है?” – रब्बाई ने पूछा.

“रब्बाई, तुम यह जानते हो कि मैंने पृथ्वी पर सत्य और परोपकार से पूर्ण जीवन जिया था…” – प्रेत ने कहा.

“फिर भी तुम्हें दोबारा जन्म लेने के लिए भेज दिया गया?” – रब्बाई ने उसे टोकते हुए कहा.

“हाँ” – प्रेत बोला – “मरने से ठीक पहले मेरे मन में यह विचार आ रहे थे कि मैंने सदैव आदर्श जीवन जिया है और कभी गलत मार्ग पर नहीं चला. यह सोचकर मेरे मन में पवित्र होने का अहंकार आ गया और उसी क्षण मेरी मृत्यु हो गयी. ऊपर जाने पर मुझे अपनी इस गलती को सुधारने के लिए वापस भेज दिया गया.”

यह कहते ही प्रेत अंतर्ध्यान हो गया और रब्बाई इस अनूठे घटनाक्रम पर विचार करते हुए घर आ गया. कुछ ही समय के भीतर उसकी पत्नी ने एक बालक को जन्म दिया. वह बालक बड़ा होकर रब्बाई वोल्फ कहलाया. उसे अहंकार कभी छू भी न सका.

(A Jewish story in Hindi)

(~_~)

It was New Year’s night, and the Rabbi was walking to his home when he met a shadowy figure. He was stunned to see that it was a man of the city who had recently died!
“What are you doing here?” the Rabbi asked, “you are supposed to be dead.””Rabbi, you know,” replied the ghost, “that this is the night when souls reincarnate on earth. I am such a soul.”

“And why were you sent back again?”
“I led a perfectly blameless life here on earth,” the dead man told him.
“And yet,” remarked the Rabbi, “you were forced to be born here again?”
“Yes,” said the other, “when I passed on I thought about everything I had done and I found it so good; I had done everything just right. My heart swelled with pride, and just then I died. So I was sent back to pay for that.”The figure disappeared and the Rabbi, pondering, went on to his home. Shortly after, a son was born to his wife. The child became Rabbi Wolf, who was an extremely humble man.

क्षमा : Forgiveness

Wailing Wall by Dainis Matisons

चेरनोबिल के रब्बाई नाहुम को उनका पड़ोसी दुकानदार अपशब्द आदि कहकर अपमानित करता रहता था. एक समय ऐसा आया कि दुकानदार का धंधा मंदा चलने लगा.

“इसमें ज़रूर रब्बाई का हाथ है. वही ईश्वर से प्रार्थना करके अपना बदला निकाल रहा है” – उसने सोचा. फिर वह नाहुम के पास अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने गया.

“मैं तुम्हें उसी भावना से क्षमा करता हूँ जिस भावना के वशीभूत होकर तुम क्षमा मांगने आये हो” – रब्बाई ने दुकानदार से कहा.

लेकिन दुकानदार का धंधा गिरता ही गया और अंततः वह बर्बाद हो गया. नाहुम के अनुयाइयों ने उससे दुकानदार के बारे में पूछा.

“मैंने उसे क्षमा कर दिया था परन्तु वह अपने मन में मेरे प्रति घृणा का पालन-पोषण करता रहा. इसके परिणामस्वरूप उसकी अच्छाई भी दूषित हो गयी और उसे मिला दंड कठोर होता गया.”

(~_~)

The Rabbi Nahum of Chernobyl was always being insulted by a shopkeeper. One day, the latter’s business began to go badly.

“It must be the Rabbi, who is asking for God’s revenge,” he thought. He went to ask for Nahum’s forgiveness.

“I forgive you in the same spirit you ask for forgiveness.” replied the Rabbi.

But the man’s losses just kept increasing, until he was reduced to misery. Nahum’s horrified disciples went to ask him what had happened.

“I forgave him, but he continued to hate me deep down in his heart.” said the Rabbi. “Therefore, his hatred contaminated everything he did, and God’s punishment became more and more severe.”

प्यार और तक़रार

pesach ritualsरब्बाई इयाकोव की पत्नी उससे बहस करने के लिए सदा मौके की फ़िराक़ में रहती थी.  लेकिन इयाकोव उसके उकसाव पर कभी ध्यान नहीं देता था और हमेशा शांत रहता.

फिर एक रात भोजन के समय ऐसा हुआ कि मेहमानों के सामने अपनी पत्नी से गरमागरम तक़रार करके इयाकोव ने सभी को हैरत में डाल दिया.

“क्या हुआ रब्बाई?” – किसी ने पूछा – “तुमने बहस-मुबाहिसे में नहीं पड़ने की आदत छोड़ दी क्या?”

“मुझे यह लगने लगा था कि मेरी पत्नी को ऐसे मौकों पर मेरा चुप रहना ही सबसे ज्यादा अखरता है. भोजन पर उससे तक़रार करके मैंने उसकी भावनाओं को बदल दिया. इसके मूल में उसके प्रति मेरा प्रेम ही है. अब वह यह समझ गई है कि मैं उसकी बातें सुनता हूं.”

(A motivational / inspirational Jewish story about arguing and loving – in Hindi)

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