रब्बाई इयाकोव की पत्नी उससे बहस करने के लिए सदा मौके की फ़िराक़ में रहती थी. लेकिन इयाकोव उसके उकसाव पर कभी ध्यान नहीं देता था और हमेशा शांत रहता.
फिर एक रात भोजन के समय ऐसा हुआ कि मेहमानों के सामने अपनी पत्नी से गरमागरम तक़रार करके इयाकोव ने सभी को हैरत में डाल दिया.
“क्या हुआ रब्बाई?” – किसी ने पूछा – “तुमने बहस-मुबाहिसे में नहीं पड़ने की आदत छोड़ दी क्या?”
“मुझे यह लगने लगा था कि मेरी पत्नी को ऐसे मौकों पर मेरा चुप रहना ही सबसे ज्यादा अखरता है. भोजन पर उससे तक़रार करके मैंने उसकी भावनाओं को बदल दिया. इसके मूल में उसके प्रति मेरा प्रेम ही है. अब वह यह समझ गई है कि मैं उसकी बातें सुनता हूं.”
(A motivational / inspirational Jewish story about arguing and loving – in Hindi)













