स्व में होना ही दुःख-निरोध है

रात्रि घनी हो रही है. आकाश में थोड़े से तारे हैं और पश्चिम में खंडित चांद लटका हुआ है. बेला खिली है और उसकी गंध हवा में तैर रही है. मैं एक महिला को द्वार तक छोड़कर वापस लौटा हूं. में उन्हें जानता नहीं हूं. कोई दुख उनके चित्त को घेरे है. उसकी कालिमा उनके […]

न सुख, न दुख, केवल समभाव

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फूल आते हैं, चले जाते हैं. कांटे आते हैं, चले जाते हैं. सुख आते हैं, चले जाते हैं. दुख आते हैं, चले जाते हैं. जो जगत के इस ‘चले जाने’ के शाश्वत नियम को जान लेता है, उसका जीवन क्रमश: बंधनों से मुक्त होने लगता है. एक अंधकारपूर्ण रात्रि में कोई व्यक्ति नदी तट से […]

The Apprentice Angel – दर्द के क़तरे

एक दिन एक नन्हा फ़रिश्ता किसी बुज़ुर्ग फ़रिश्ते के पास कुछ वक़्त गुज़ारने के लिए गया. वे दोनों यूं ही धरती पर किसी शहर के व्यस्त बाज़ार में आ गए. वे अदृश्य थे, उन्हें कोई भी नहीं देख सकता था. बुज़ुर्ग फ़रिश्ते ने नन्हे फ़रिश्ते से कहा – “क्या तुम कुछ काम की चीज़ देखना […]

दूसरों के दुःख : Others’ Sorrows

हिमालय के पर्वतों पर कहीं एक ज्ञानी महात्मा रहते थे. अनुयाइयों और श्रृद्धालुओं द्वारा बहुत तंग किये जाने के कारण उन्होंने पर्वतों पर ही एकाकी और सरल जीवन व्यतीत करना बेहतर समझा. लेकिन उसकी प्रसिद्धि इतनी अधिक थी कि उनके दर्शनों के लिए लोग नदियाँ और घाटियाँ पार करके चले आते. लोग यह मानते थे […]

अपने-अपने सलीब : Burden of Cross

अम्ब्रिया (इटली) के एक गाँव में एक आदमी रहता था जो हमेशा अपने दुखों का रोना रोते रहता था. वह ईसाई था और उसे यह लगता था कि उसके कंधों पर रखा सलीब ही सबसे भारी है. एक रात सोने से पहले उसने ईश्वर से प्रार्थना की – “प्रभु, मेरे दुखों का भार कुछ कम […]

दुःख की रग

घर में टी वी बहुत कम देखा जाता है. मुझे तो वैसे भी बहुत कम समय मिलता है. पत्नी को भी सीरियलों का चस्का नहीं है. पहले कुछ देख भी लेती थी पर वह भी मैंने उसके देखते समय कुड़-कुड़ करके कम करा दिया. बच्चे कार्टून और गाने देखना पसंद करते हैं लेकिन देखते समय […]