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The Apprentice Angel – दर्द के क़तरे


एक दिन एक नन्हा फ़रिश्ता किसी बुज़ुर्ग फ़रिश्ते के पास कुछ वक़्त गुज़ारने के लिए गया. वे दोनों यूं ही धरती पर किसी शहर के व्यस्त बाज़ार में आ गए. वे अदृश्य थे, उन्हें कोई भी नहीं देख सकता था. बुज़ुर्ग फ़रिश्ते ने नन्हे फ़रिश्ते से कहा – “क्या तुम कुछ काम की चीज़ देखना चाहोगे?”

नन्हे फ़रिश्ते ने कहा – “जैसा आप चाहें.” वह जानता था कि जब भी बुज़ुर्ग फ़रिश्ते ने उसे कोई ‘काम की चीज़’ दिखाई तब उसे कुछ नया सीखने को मिला.

वे दोनों बाज़ार की एक कॉफ़ी-शॉप में कॉफ़ी पी रहे एक आदमी के पीछे जाकर बैठ गए. अगले ही पल वहां शैतान आया. वह भी अदृश्य था. वह कॉफ़ी पीनेवाले आदमी के पास बैठ गया.

नन्हा फ़रिश्ता समझ गया कि उसे मिलने वाला सबक अब करीब ही था. बुज़ुर्ग फ़रिश्ते ने उससे कहा – “चलो, हम शैतान के सामने जाकर बैठ जाते हैं.”

यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि फ़रिश्ते तो शैतान को देख और महसूस कर सकते हैं पर शैतान उन्हें नहीं देख सकता. अगर शैतान ने फरिश्तों को देख लिया होता तो वह अपनी उस हरकत को अंजाम नहीं देता जिसके लिए वह कॉफ़ी-शॉप में आया था.

शैतान आदमी के सर के करीब गया और उसने आदमी के कान में कुछ फुसफुसाकर कहा जिसे सुनते ही नन्हा फ़रिश्ता बोल उठा – “ओह, अब मैं सब समझ गया!”. – बुज़ुर्ग फ़रिश्ते ने उसकी पुष्टि करी – “हाँ, तो तुम अब जान गए न?”

नन्हे फ़रिश्ते ने शैतान को आदमी के कान में यह फुसफुसाते हुए सुना था – “इस दर्द को बाँटते चलो”. – यह कहकर शैतान ने आदमी को दर्द के कुछ कतरे दे दिए.

कॉफ़ी पीने के बाद वह आदमी दुकान से बाहर चला गया. दोनों फ़रिश्ते भी उसके पीछे चल दिए. आदमी जब अपनी कार तक पहुंचा तो उसने पाया कि किसी ने उसकी कार से बिलकुल सटा कर अपनी कार खड़ी कर दी थी और उसकी कार को निकाल पाना बहुत मुश्किल था. आदमी के मुंह से गालियों की बौछार निकल पडी और उसने दूसरी कार के टायर पर अपनी लात दे मारी.

उस आदमी के भीतर जब यह क्रोध उबाल ले रहा था तभी एक औरत उसके करीब से गुज़री. उस औरत ने आदमी की कोई बात नहीं सुनी लेकिन आदमी का दर्द औरत तक पहुँच गया और उसे पता ही नहीं चला कब वह दर्द उसके ज़हन में जज़्ब हो गया.

औरत के भीतर दर्द के पहुँचते ही उसकी निगाह सामने स्टोर में काम कर रही उसकी सहकर्मी पर पड़ी. उसकी सहकर्मी ने पिछले दिन उसे कोई बात कह दी थी जो उसे नागवार गुज़री थी पर वह कुछ कर न सकी. सहकर्मी को देखते ही उसे अपने भीतर उसके लिए नफरत उबलती-सी लगने लगी क्योंकि ‘उसी जाहिल के कारण उसका दिमाग अभी भी ख़राब बना हुआ था’.

दूसरी ओर, स्टोर के भीतर मौजूद सहकर्मी ने बाहर औरत के चेहरे पर अपने लिए बहुत रूखापन और नफरत पहचान ली. बाहर मौजूद औरत के दर्द ने नया ठिकाना तलाश लिया. स्टोर के भीतर मौजूद औरत को सहसा याद आ गया कि उसके बेटे ने परीक्षा में बहुत बुरे अंक प्राप्त किये हैं. उसने तय कर लिया कि घर पहुँचने पर वह अपने बेटे की अच्छी खबर लेगी.

अपनी योजना को साकार होता देख शैतान मंद मुस्कान बिखेरता हुआ चला गया. जो दर्द उसने पहले आदमी को दिया था वह उससे अनभिज्ञ निर्दोष मनुष्यों के भीतर से बदस्तूर गुज़रता रहा.

(गाई फिनले की कहानी – a story of Guy Finley)

One day, a little angel who wanted to be a big angel was spending some time with a more seasoned angel. They were invisibly walking down a busy city street, and the older angel said to the apprentice angel: “Would you like to hear something amazing?”

The little angel said, “I don’t know,” because he knew that whenever the older angel asked him things like this, he was about to receive a certain spiritual shock. The little angel finally said, “Well, all right, what is it?”

They proceeded down the street and into a little coffee shop, and in there was a man drinking his coffee. As the two angels took a seat, in walked a devil (also moving about invisibly). The devil sauntered in and sat right next to the man drinking his coffee.

The little angel knew that he was getting close to the lesson at this point, and the senior angel said, “Come on over here.”

Now, angels can see devils but devils can’t see angels, so this devil couldn’t see the two angels watching him. If he could have seen them, then he never would have done what he was about to do, because everything that angels learn about what devils are doing gives angels the opportunity to teach human beings how to be smarter than devils.

So, this devil leans over to the man sitting there in the coffee shop, and the angels lean forward to hear something that the devil whispers into the man’s ear. The little angel falls back and says, “Ah ha! I see now. This explains so much.” The senior angel confirms, “That’s right.”

What the little angel heard the devil whisper in the man’s ear was this: “Take this pain and pass it along.” With those words, the devil gave that man a little bit of pain.

The angels followed the man as he walked down the street. When he got to his car, he found that somebody had parked his car too close to his, making it very hard for him to get out of his parking space. A string of oaths came out of the man’s mouth as he contemplated banging his car into the offending car.

Then, just as he lets out that stream of violent energy, a woman walking down the street nearby — who actually didn’t hear what the man said — did exactly what the devil had told the man to do, which was to “take this pain and pass it along. ” That woman picked up the man’s pain and never even knew it, never saw it, never felt it go into her.

The moment that pain entered into the woman walking down the street, she looked in a store window and saw a co-worker who had said something to her yesterday. Now she knew why she was in pain because there was “the idiot that made her feel that way.”

The woman in the shop looked out and saw the woman looking in with a scowl on her face (that she didn’t know she had on her face), and felt the pain that woman was passing along to her. The minute the woman in the store felt it, she began to think of her son who had gotten bad grades and who continued to resist the education that was necessary, and she made up her mind that when she got home, she was going to “ground him and really show him something”, and to the devil’s delight, the pain was passed along endlessly to unsuspecting human beings.

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