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15 सबक

इस पोस्ट में ज़िंदगी के लिए ज़रूरी सबक दिए गए हैं जिसे मैंने प्रसिद्द ब्लॉग प्लगइन – आईडी (pluginid.com) से लिया है. इस तरह की पोस्टें हिंदीज़ेन पर पहले भी आ चुकी हैं पर हर पोस्ट में कुछ-न-कुछ अलग तो होता ही है. वैसे भी, अच्छी बातें जितनी ज्यादा पढ़ने को मिलें उतना ही बेहतर. यदि उनपर अमल नहीं कर पायें तो मन पे कोई बोझ न रहे – बस एक हौसला और एक उम्मीद बनी रहे कि देरसबेर हमें नकारात्मकता से निकलना ही है ताकि हम भी कुछ बेहतर कर सकें, बेहतर बन सकें. ये हैं ज़िंदगी जीने के लिए ज़रूरी पंद्रह सबक:

  1. तुम्हारे बारे में लोग कुछ भी कहते रहें, उससे तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए. लोगों का क्या है, वे तुम्हारे सामने या फिर पीठे पीछे कुछ-न-कुछ कहते ही रहेंगे.
  2. यदि तुम लोगों से सहृदयता से पेश आओगे तो वे तुम्हें अच्छाई से ज़रूर नवाजेंगे. यह बात 99% लोगों पर ठीक बैठती है.
  3. कभी-कभी तुम्हारी सलाह और सुझाव सकारात्मक और प्रोत्साहक होने के बाद भी लोग तुम्हें सुनने के लिए तैयार नहीं होंगे. तुम्हें इस स्थिति को स्वीकार करना है और सामनेवाले के प्रतिरोध को दिल से नहीं लगाना है.
  4. तुम्हारे सामने यह विकल्प है कि तुम किसी भी बात को सकारात्मक लो या नकारात्मक लो. तुम अपने इस अधिकार का सदैव उपयोग करो ताकि तुम्हारा जीवन खुशहाल रहे.
  5. ऐसे लोग हमेशा मौजूद रहेंगे जो तुम्हें पीछे धकेलना चाहेंगे. ऐसा उनकी असुरक्षा की भावना के कारण है. वे यह नहीं चाहते कि वे ठहरे हुए पानी की तरह गंदला जाएँ और दूसरे लोग आगे निकल जाएँ.
  6. आज, इस वक़्त, यही तुम्हारी ज़िंदगी है. तुम इसका जितना फायदा उठा सकते हो उठा लो. तुम अपने आसपास मौजूद लोगों का दिन खुशगवार बना सकते हो और ठान लो तो लाखों-करोड़ों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश भी कर सकते हो.
  7. तुम अपनी राह के कंटकों और अवरोधों को नए नज़रिए से देखो. वे तुम्हारे लिए रुकने का संकेत नहीं हैं बल्कि तुम्हें यह बताते है कि तुम किसी चीज़ को कितनी शिद्दत से पाना चाहते हो.
  8. तुम सदैव वह काम करो जिसे तुम करते आये हो, भले ही तुम्हें एक-जैसे परिणाम मिलें. यह कॉमन सेन्स है पर बहुत से लोग एक ही गति पर चलकर अलग-अलग मंजिल पर पहुँचने की उम्मीद करते हैं. ऐसे लोग बहुत कम लेकिन बहुत प्रसिद्द हैं और वे इसे पागलपन कहते हैं.
  9. किसी से ईर्ष्या करने पर किसी और को नहीं वरन तुम्हें ही सबसे ज्यादा नुकसान होगा. अपने समय और ऊर्जा को किसी बेहतर काम में लगाओ.
  10. यदि तुम्हें यात्रा में आनंद नहीं आ रहा है तो शायद तुम गलत लेन में चल रहे हो. पिछले चौराहे तक जाने में झिझको नहीं और दोबारा कोशिश करो. गलत राह पर दूर तक बढ़ते चले जाने से बेहतर यही है.
  11. अपने अहंकार को कहीं आड़े नहीं आने दो. जिन चीजों को तुम पसंद करो उन्हें लपक लो और जिन लोगों से प्रेम करो उन्हें यह जताओ. अवसर चूकने के लिए यह जीवन बहुत छोटा है. यदि लोग इस बात के लिए तुम्हारे आलोचना करें तो… यह उनकी समस्या है, तुम्हारी नहीं.
  12. पुरानी कहावत है कि जिससे तुम पिंड छुडाना चाहते हो वही तुम्हारे गले पड़ता है. अतीत और भविष्य के सारे पछतावों से छुटकारा पाने के लिए यह ज़रूरी है कि तुम किसी से भी एक सीमा से अधिक न बंधो और स्वयं को शनैः-शनैः मुक्त करते जाओ. हर किसी को सब कुछ नहीं मिलता.
  13. तुम्हारे जीवन में जो कुछ भी घटित होता हो उसपर पैनी निगाह रखो. अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को सीमायें नहीं लांघने दो. तुम्हारी जागरूकता ही बदलते वक़्त उतार-चढ़ाव के साथ तुम्हें संयत रख सकेगी.
  14. तुम्हारी समस्या जैसी भी हो, यह बहुत संभव है कि दूसरों के जीवन में भी वैसी ही समस्या आई हो और उन्होंने इसका कोई हल निकाल लिया हो. अपने मन को दिलासा दो कि तुम अकेले नहीं हो और तुम्हारी दिक्कतों का भी कोई-न-कोई हल कहीं ज़रूर होगा.
  15. हर उस बात पर सवाल उठाओ जो तुम कहीं भी पढ़ते या सुनते हो, यहाँ तक कि इन पंद्रह बिन्दुओं पर भी. महत्वपूर्ण विचारों को हम बहुधा इस लिए नहीं समझ पाते क्योंकि हम उनमें छुपे हुए सत्य को देख ही नहीं पाते हैं.
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A Letter to My Son, on Starting Out In Life – जीवन की राहों में : पिता का पत्र

लियो बबौटा मेरे प्रिय ब्लौगर हैं. इस ब्लौग पर मैंने उनकी कुछ बेहतरीन पोस्टें अनूदित करके पोस्ट की हैं. उनके ब्लौग की सम्पूर्ण सामग्री पर वे किसी प्रकार का अधिकार नहीं रखते. अपने ब्लौग ज़ेनहैबिट्स में वे रचनात्मकता और उत्पादकता बढ़ानेवाले लेख लिखते हैं और दूसरे ब्लौग मिनिमलिस्ट में संतुष्टि अर्जित करने के सूत्र प्रस्तुत करते हैं. कुछ समय पूर्व ‘पिता-दिवस’ के अवसर पर उन्होंने अपने तीन-वर्षीय पुत्र के लिए एक पत्र लिखा था जिसका स्वतन्त्र अनुवाद मैंने किया है. आशा है आपको यह पसंद आएगा.

प्यारे सेथ,

अभी तुम तीन साल के ही हो और उम्र के इस मुकाम पर तुम कुछ भी पढ़ नहीं सकते… और समझ भी नहीं सकते कि मैं तुम्हें इस चिठ्ठी में क्या बताने जा रहा हूँ. मैं बहुत सी बातों के बारे में सोच रहा हूँ जैसे तुम्हारे सामने तुम्हारा पूरा जीवन पड़ा हुआ है.. और ज़िंदगी ने मुझे भी बहुत कुछ सिखाया है, और यह भी कि एक पिता के रूप में मैं क्या करूँ कि तुम ज़िंदगी के इम्तिहानों का सामना कर सको.

आज तुम्हें शायद इस चिठ्ठी में लिखी बातें समझ में नहीं आयें लेकिन एक दिन तुम इन्हें समझ पाओगे और मुझे उम्मीद है कि तुम्हें इनके महत्व और मूल्य को जान जाओगे.

तुम बहुत छोटे हो और अभी ज़िंदगी अपनी तमाम दुश्वारियों, नाकामियों, उदासी, अकेलेपन, बैचैनी, और जोखिमों को तुमपर उतारने के मौके तलाश रही है. अभी तुमने दिन-रात खटनेवाले कामों में खुद को नहीं झोंका है जिनके लिए कोई शुक्रिया का एक शब्द भी नहीं कहता. अभी तुमने रोज़मर्रा पड़नेवाले पत्थरों की बौछार को नहीं झेला है.

अभी तुम जिस दौर में हो उसके लिए शुक्रगुजार रहो. ये तुम्हारी ज़िंदगी के सबसे शानदार लम्हे हैं. आगे तुम्हारी ज़िंदगी में और भी रंग-भरे मौसम आयेंगे, जिनकी धूप-छाँव से भी तुम्हें दो-चार होना होगा.

मैं उम्मीद करता हूँ कि मैं तुम्हें अपनी ज़िंदगी के सिखाये सबक राह में बताता चलूँगा. हर सलाह की तरह तुम मेरी बातों को भी नाप-तौलकर ही मानना. यह ज़रूरी नहीं है कि जो कुछ मेरे लिए अच्छा रहा हो वह तुम्हारे लिए भी वैसा ही हो.

ज़िंदगी निर्मम भी हो सकती है

तुम्हें ऐसे लोग भी मिलेंगे जो अच्छे नहीं हों. वे तुम्हें सिर्फ इसलिए भी सता सकते हैं कि तुम भले बच्चे हो. वे तुम्हें गिरा सकते हैं, चोट भी पहुंचा सकते हैं.

इन लोगों से निपटने के तरीके सीखने के अलावा तुम इनका कुछ ख़ास नहीं बिगाड़ सकते. तुम ऐसे लोगों को अपना दोस्त बनाना जो तुम्हारी परवाह करें और तुम्हारे भीतर हौसला और ख़ुशी पैदा करें. जब तुम्हें ऐसे दोस्त मिलें, तुम उन्हें खजाने की तरह अहतियात से अपने करीब रखना, उनके साथ वक़्त गुजारना, उनसे प्रेम करना.

ज़िंदगी में ऐसे कई मौके आयेंगे जब सफलता तुमसे दूर होगी और दिल में निराशा घर कर लेगी. ज़िंदगी में सब कुछ हमेशा तुम्हारे हिसाब से नहीं होगा. यह भी ऐसी बात है जिससे जूझना तुम्हें सीखना होगा. इससे पहले कि ये तुम्हें अपने बोझ तले दबा दें, तुम उन्हें परे धकेल देना. असफलता का सामना करना और उससे अपने सपने सच कर दिखाने की सीख लेना. अपनी कमजोरियों को अपनी ताक़त में बदल देना. फिर तुम ज़िंदगी में बहुत बेहतर करोगे.

कभी ऐसा भी होगा कि जिनको तुम चाहोगे वे तुमसे दूर हो जायेंगे और तुम्हारा दिल टूट जायेगा. मैं तो चाहता हूँ कि ऐसा न हो लेकिन ये सबके साथ होता है. इसमें भी तुम कुछ ख़ास नहीं कर सकते बजाय इसके कि तुम ज़िंदगी की राह पर आगे बढ़ चलो. अपने दर्द को सीढ़ी बनाकर तुम अच्छी चीज़ों की ओर चल पड़ना, इनसे भी तुम्हें कुछ सबक ज़रूर मिलेंगे.

जीवन को स्वीकार करते रहो

हाँ, यह सच है कि ज़िंदगी में दुःख-दर्द कदम-कदम पर आते रहते हैं… लेकिन तुम इनके कारण ज़िंदगी से मुंह नहीं मोड़ना. ज़िंदगी से भागना नहीं, किसी कोने में मत दुबकना. नई बातों, अनुभवों, और लोगों का स्वागत करना.

हो सकता है कि तुम्हारा दिल दस बार टूट जाए, लेकिन अपने जीवनसाथी की खोज में ग्यारहवीं बार कोशिश करना. यदि तुम ज़िंदगी में प्यार को आने से रोक दोगे तो शायद तुम उसे खो बैठोगे. जब तुम्हें वह मिल जाएगी तब तुम्हें ज़िंदगी मुकम्मल लगने लगेगी.

तुम भी अक्सर ऐसे लोगों से टकराओगे जो तुम्हें झुन्झलायेंगे और चोट पहुंचाएंगे. ऐसे दर्ज़नों शख्स से मिलने के बाद ही तुम्हें सच्चे दोस्त मिलेंगे. यकीनन, खुद को बंद कर लेने से, नए लोगों को दरकिनार कर देने से तुम्हारी ज़िंदगी में कुछ दर्द कम होगा लेकिन यदि तुम ऐसा करोगे तो उन बेजोड़ लोगों से कैसे मिलोगे जो ज़िंदगी के तूफानों में तुम्हारी हिफाज़त करेंगे?

तुम ज़िंदगी में कई बार हारोगे लेकिन यदि तुम बार-बार कोशिश नहीं करोगे तो कामयाबी की चोटी पर पहुँचने के बाद के अहसास को खो दोगे. असफलता हमारी राह का वह पत्थर है जिसपर पैर रखकर हम कामयाबी के कुछ करीब पहुँच जाते हैं.

ज़िंदगी कोई रेस नहीं है

स्कूल, कॉलेज, और ऑफिस में तुम्हें पीछे धकेलनेवाले बहुतेरे लोग मिलेंगे. वे हमेशा महंगी कार, कपड़े, फोन, और बड़े घर के पीछे भागते रहेंगे. उनके लिए ज़िंदगी एक दौड़ है – उनके लिए ख़ुशी के मानी यह हैं कि वे अपने साथियों से ज्यादा खुश रह सकें.

और तुम जानते हो कि खुश रहने का रहस्य क्या है? ख़ुशी का रहस्य इसमें है कि ज़िंदगी कोई रेस नहीं है. ये एक यात्रा है. यदि तुम इस यात्रा में दूसरों को नीचा दिखाने, प्रभावित करने की कोशिश करोगे तो सिर्फ अपना वक़्त ही बर्बाद करोगे. इसके बजाय इस यात्रा को खुशमय बनाओ. इसे सीखने, बदलने, खुश रहने, और प्यार करने की यात्रा बनाना.

अच्छी कार, बड़ा घर, और कोई दूसरी दुनियावी चीज़… यहाँ तक कि ऊंची कमाई वाली नौकरी की भी ख्वाहिश नहीं करना. इनका मोल रत्ती भर भी नहीं है और ये तुम्हें सच्ची ख़ुशी नहीं दे सकतीं. इन सबको पा लेने से तुम्हारी ख्वाहिशें कम नहीं होंगी बल्कि बढ़ जाएँगी. तुम जितना हो उसमें ही संतुष्ट रहने की आदत डालना – जितना वक़्त तुम इन चीज़ों के पीछे भागने में लगाओगे उसे उस काम में लगाना जिसे करने से तुम्हें ख़ुशी मिले.

अपने शौक पूरे करना. उस नौकरी में खुद को मत झोंकना जिसका मकसद सिर्फ बिल चुकाना हो. जिन नौकरी को तुम नापसंद करो उसके लिए ज़िंदगी बर्बाद करने में कोई तुक नहीं है.

प्रेम ही एकमात्र नियम है

वह कौन सा एक शब्द है जिसके लिए तुम ज़िंदगी जियो? वह शब्द है ‘प्रेम’. शायद तुम्हें यह अजीब लगे पर यह एक शब्द ही जीवन का एकमात्र नियम है.

कुछ लोगों के लिए सफलता ही ज़िंदगी का कायदा होगी. उनकी ज़िंदगी बोझिल, नाखुश, और सतही होगी.

कुछ लोग खुद को ही हर चीज़ से बड़ा मानेंगे – वे चाहेंगे कि उन्हें ही हमेशा सब कुछ सबसे पहले मिले. उनकी ज़िंदगी में अकेलापन होगा, वे खुश नहीं रहेंगे.

और कुछ ऐसे भी होंगे जिनके लिए जिन्दगी नेकी का ही दूसरा नाम होगी. ऐसे लोग दूसरों को सच्चाई का रास्ता दिखायेंगे और अपनी बात को नहीं मानने वालों की निंदा करेंगे. यकीनन, वे दूसरों का भला चाहते हैं पर उनका तरीका निगेटिव है. अंततः वे अपनी नेकी के साथ ही अकेले पड़ जायेंगे. अपनी ही नेकी की गठरी ताज़िंदगी ढोते रहना दर्दनाक है.

तुम्हारे जीवन में बस प्रेम ही एकमात्र नियम हो. अपने माता-पिता, पत्नी, बच्चों, दोस्तों से दिल की गहराई से प्रेम करो. वे जो मांगे उन्हें दो. उनके प्रति रूखापन और कठोरता मत बरतो. उन्हें अपनी आत्मा में स्थान दो.

सिर्फ अपने परिजनों से ही नहीं बल्कि अपने पड़ोसियों, सहकर्मियों, और अजनबियों से भी प्रेमपूर्ण व्यवहार करो. मनुष्य होने के नाते सभी तुम्हारे भाई-बहन हैं. सभी से मुस्कुराते हुए मिलो. अपनी वाणी मधुर रखो. विनयशील बनो. मदद का हाथ बढ़ाओ.

सिर्फ अपने पड़ोसियों और अजनबियों से ही नहीं बल्कि अपने शत्रुओं से भी प्रेम करो. उससे भी प्रेम करो जिन्होंने तुम्हें चोट पहुंचाई हो, तुम्हारा दिल तोड़ा हो. उनकी आत्मा विदीर्ण है, उन्हें तुम्हारे प्रेम की ज़रुरत है.

और सबसे बढ़कर, खुद से प्रेम करो. दूसरे तुम्हारी आलोचना करें तो खुद के प्रति निर्ममता मत बरतो. यह कभी मत सोचो कि तुम बदसूरत या कमअक्ल या प्यार के काबिल नहीं हो… बल्कि यह सोचो कि तुम एक बेहतरीन इंसान हो और तुम्हारे हिस्से में भी बेपनाह खुशियाँ और प्रेम है. तुम जैसे हो वैसे ही खुद को प्रेम करो.

आखिर में, तुम्हें यह पता होना चाहिए कि मैं तुमसे प्रेम करता हूँ और हमेशा करता रहूँगा. तुम्हारी जीवनयात्रा बहुत अपरिमित, अस्पष्ट, और दुरूह होने जा रही है पर यह बड़ी विहंगम यात्रा है. मैं इस यात्रा में सदैव तुम्हारे साथ रहने का प्रयास करूंगा. ईश्वर तुम्हारा मार्ग प्रशस्त करे. शुभाशीष.

प्रेम,

तुम्हारे पापा.

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चीन के बांस की शिक्षा

chinese bamboosचीन के बांस को उगाना बड़ा दुरूह कर्म है. इसका छोटा सा बीज लेकर आप इस बोते हैं और साल भर तक इसे पानी और खाद देते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता.

दूसरे साल भी आप इसे पानी और खाद देते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता.

तीसरे साल भी आप इसे पानी और खाद देना ज़ारी रखते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता. अब आप झल्ला जाते हैं.

चौथे साल भी आप इसे पानी और खाद देना ज़ारी रखते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता. यह सब आपको बेहद उकता देता है.

पांचवें साल भी आप इसे पानी और खाद देना जारी रखते हैं. अब आपको कुछ हलचल प्रतीत होती है… देखते ही देखते आपका चीनी बांस का छौना छः हफ्तों में 90 फीट बढ़ जाता है. यह सच है!

* * * * * * * * * ** * * * *

जिंदगी जीना भी चीनी बांस उगाने जैसा ही काम है.
यह कभी-कभी मनुष्य को तोड़ देता है. हम सब कुछ सही करते जाते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता.

लेकिन वे लोग जो सब कुछ सही करते रहते हैं और हताश या निराश नहीं होते, उन्हें जिंदगी देरसबेर ईनाम ज़रूर देती है.

चित्र साभार – फ्लिकर

(Lessons from a Chinese bamboo – in Hindi)

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तीन तारोंवाला वायलिन और ज़िंदगी

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व्हाइट हाउस में वायलिन बजाते हुए इत्ज़ाक पर्लमान

18 नवंबर 1995 को न्यू यॉर्क के लिंकन सेंटर के एवरी फ़िशर हॉल में वायलिन वादक इत्ज़ाक पर्लमान स्टेज पर पर वायलिन बजाने के लिए आया.

स्टेज तक पहुंचना – और चलकर पहुंचना पर्लमान के लिए कोई मामूली उपलब्धि नहीं है. बचपन में पोलियो का शिकार हो जाने के कारण उसके दोनों पैर बेकार हो गए. वह दोनों पैरों में बंधे लोहे के ब्रेस और बैसाखियों के सहारे चलता है. एक-एक मुश्किल कदम उठाते हुए उसे स्टेज तक चलकर जाते देखना सभी को द्रवित कर देता है.

उसने दर्दभरे कदम उठाए, लेकिन शान से, और वह अपनी कुर्सी तक पहुंच गया. बहुत आहिस्ता से वह कुर्सी पर बैठा. अपनी बैसाखियां उसने टिका दीं. अपने पैरों में बंधे कब्जे खोले. एक पैर को हाथों से उठाकर कुर्सी के नीचे अटकाया और दूसरे पैर को सामने फैला दिया. फिर उसने नीचे झुककर अपना वायलिन उठाया और उसे ठोड़ी के नीचे दबाया. सर हिलाकर उसने कंडक्टर को इशारा किया और वायलिन बजाने लगा.

उसके नियमित श्रोता इस क्रियाकलाप के आदी हो चुके हैं. वे शांति से उसे स्टेज तक चलकर जाते और कब्जे खोलकर कुर्सी पर सहज होते देखते हैं. दर्शकों के चेहरों पर उस समय आदर मिश्रित विस्मय उमड़ आता है. वे वादन शुरू होने की प्रतीक्षा करते हैं.

वादन शुरू होने के कुछ पलों के भीतर ही एक गड़बड़ हो गई. पर्लमान ने मुखड़ा बजाना खत्म किया ही था कि उसके वायलिन का एक तार टूट गया. वायलिन में चार तार होते हैं और चारों से ही वायलिन बनता है. तार टूटने की गोली चलने जैसी कड़ाके की आवाज़ के साथ सभी चौंक गए. सभी जानते थे कि अब क्या होगा.

ऐसा होने पर हम जानते हैं कि कलाकार की प्रतिक्रिया क्या होगी. शायद वह अपने कब्जे वापस बांधे और बैसाखियां उठाकर घिसटता हुआ दूसरा वायलिन लेने के लिए स्टेज से उतर जाए. या वह वहीं पर किसी से नया तार या दूसरा वायलिन बुलवा ले, या वह कार्यक्रम को कुछ टाल दे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. पर्लमान कुछ पलों तक शांत बैठा रहा, फिर उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और कंडक्टर को शुरू करने का इशारा किया.

वादन वहीं से शुरू हुआ जहां से उसने छोड़ा था. उस दिन उसने ऐसी ऊर्जा, शुद्धता और शुचिता से वायलिन बजाया जैसा उसके किसी श्रोता ने पहले कभी नहीं सुना था.

यहां यह कहना ज़रूरी नहीं है लेकिन कोई भी इस बात को समझ सकता है कि किसी सिम्फ़नी में तीन तारों वाला वायलिन बजाना नामुमकिन है. मैं (निशांत) इस बात violin broken stringको जानता हूं क्योंकि बहुत साल पहले मैं वायलिन बजाया करता था. लेकिन उस रात पर्लमान ने शायद इस बारे में नहीं सोचा.

आप वहां होते तो उसके मन-मष्तिष्क में पल-प्रतिपल जन्म ले रहीं स्वर लहरियों को उमड़ते-घुमड़ते देख सकते थे. एक समय उसने वायलिन के तीन तारों के स्वाभाविक सुरों को खंडित कर दिया ताकि वे उन स्वरों को उत्पन्न कर सकें जिनके लिए वे बने ही नहीं हैं.

कार्यक्रम की समाप्ति पर सभागार में अपूर्व मौन बिखरा हुआ था. फिर सभी उपस्थित अपना हर्ष व्यक्त करने के लिए खड़े हो गए. हर कोने से उठती तालियों की आवाज़ और वाहवाही से हॉल गूंज उठा. अपनी खुशी को बाहर निकलने का मौका देने के लोग जो करना चाहते थे कर रहे थे – चीख रहे थे, आंसू पोंछ रहे थे…

पर्लमान उठा. उसने माथे से पसीना पोंछा. वायलिन की बो (कमानी) को उठाकर उसने लोगों को शांत होने के लिए इशारा किया और गर्वीले नहीं बल्कि विचारपूर्ण स्वर में कहा – “आप जानते हैं, कभी-कभी कलाकार का काम यह खोजना हो जाता है कि जो संगीत उसने पहले कभी नहीं बजाया है उसमें से वह क्या कुछ निकाल सकता है”.

कितनी सशक्त अभिव्यक्ति है! जब से मैंने इसे पढ़ा है यह मेरे मन में घूम रही है. और शायद केवल कलाकारों के लिए नहीं बल्कि हम सब के लिए यह जीवन की एक परिभाषा भी है.

ज़िंदगी भर पर्लमान ने चार तारोंवाले वायलिन पर ही संगीत उत्पन्न किया लेकिन एक भरे हुए सभागार में बीच वादन के दौरान उसके पास तीन ही तार बचे. तब उसने उस रात तीन तारों से ही वादन किया… और वह संगीत अधिक सुंदर, अधिक पवित्र, अधिक स्मरणीय था… उसके चार तारोंवाले संगीत से कहीं ज्यादा.

तो फिर अब इस आपाधापी और उलझन भरी दुनिया में हमारे सामने बस एक ही उपाय बच रहता है कि हमारे पास जितना कुछ है उसी से हम दिव्य संगीत की रचना करें. जब पास कुछ न बचे तो उस संगीत को तलाशें जो कहीं बचा रह गया है.

चित्र साभार – विकीपीडिया और फ्लिकर

(An inspiring / motivational anecdote of Itzhak Perlman in Hindi)

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जीवन का अर्थ

fruit biteविद्यारम्भ से पहले एक शिष्य अपने गुरु से सभागार में वार्तालाप करने के लिए आया. वह हर बात के बारे में आश्वस्त हो लेना चाहता था.

शिष्य ने पूछा – “क्या आप मुझे बता सकते हैं कि मानव जीवन का उद्देश्य क्या है?”

“नहीं” – गुरु ने उत्तर दिया.

“आप कम-से-कम जीवन का अर्थ तो बता ही सकते हैं!?”

“नहीं”.

“अच्छा. तो यह बताएं कि मृत्यु क्या है और जीवन के बाद कौन सा जीवन है”.

“मैं यह सब नहीं बता सकता”.

वह शिष्य चिढ़कर विद्यालय छोड़कर चला गया. बाकी शिष्यों को लगा कि उनके गुरु का अपमान हो गया. कुछ को यह भी लगने लगा कि उनके गुरु ज्ञानी नहीं हैं.

गुरु अपने शिष्यों के मन में चल रहे द्वंद्व को भांप गए. वे बोले – “उस जीवन की प्रकृति और उसके अर्थों व उद्देश्यों को जानकार क्या करोगे जब तुमने जीवन जीना प्रारंभ ही न किया हो! सामने रखे भोजन के विषय में अटकलें लगाने से बेहतर होगा कि उसे चखकर देख लिया जाए”.

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जीवन विचार से नहीं बल्कि अनुभव से मिलता है – अन्थोनी डिमेलो

चित्र साभार – फ्लिकर

(A motivational / inspiring story about the purpose of life – in Hindi)

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