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जीवन का आनंद

“इस साल मैंने अपने जीवन का पूरी तरह से आनंद लिया”, शिष्य ने गुरु से कहा.

“अच्छा?”, गुरु ने पूछा, “क्या-क्या किया तुमने?”

“सबसे पहले मैंने गोताखोरी सीखी”, शिष्य ने कहा, “फिर मैं दुर्गम पर्वतों पर विजय पाने के लिए निकला. मैंने रेगिस्तान में भी दिन बिताये. मैंने पैराग्लाइडिंग की, और आप यकीन नहीं करेंगे, मैंने…”

गुरु ने हाथ हिलाकर शिष्य को टोकते हुए कहा, “ठीक है, ठीक है, लेकिन यह सब करने के दौरान तुम्हें जीवन का आनंद उठाने का समय कब मिला?”

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नियंत्रण

एक व्यापारी ने ज़ेन गुरु से पूछा, “आप कैसे कह सकते हैं कि हमारे जीवन में नियंत्रण का अभाव है? यह मैं ही निश्चित करता हूँ कि मुझे नींद से कब जागना है, अन्य कोई व्यक्ति मुझे यह करने के लिए नहीं कहता.”

गुरु ने कहा, “यदि मैं तुम्हें प्रतिदिन एक निश्चित रकम दूं जिसे तुम जैसे चाहे खर्च कर सको तो वास्तविक नियंत्रण किसके हाथ में होगा?”

व्यापारी ने कहा, “यदि आप मुझे रकम देंगे तो नियंत्रण आपके हाथ में ही होगा. आप यह क्यों पूछ रहे हैं?”

गुरु ने कहा, “जीवन ने ही तुम्हें हाथ-पैर, आँख, कान, ह्रदयगति, और विचार शक्ति दिया है. तुम किसके नियंत्रण में हो?”

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प्रकाश की एक किरण

अंधकार से भरी रात्रि में प्रकाश की एक किरण का होना भी सौभाग्य है, क्योंकि जो उसका अनुसरण करते हैं, वे प्रकाश के स्रोत तक पहुंच जाते हैं.

एक राजा ने किसी कारण नाराज हो अपने वजीर को एक बहुत बड़ी मीनार के ऊपर कैद कर दिया था. एक प्रकार से यह अत्यंत कष्टप्रद मृत्युदण्ड ही था. न तो उसे कोई भोजन पहुंचाया जाता था और न उस गगनचुंबी मीनार से कूदकर ही उसके भागने की कोई संभावना थी.

वह वजीर जब कैद करके मीनार की तरफ ले जाया जा रहा था, तो लोगों ने देखा कि वह जरा भी चिंतित और दुखी नहीं है, बलिक वह सदा की भांति ही आनंदित और प्रसन्न है. उसकी पत्नी ने रोते हुए उसे विदा दी और उससे पूछा कि वह प्रसन्न क्यों है! उसने कहा कि यदि रेशम का एक अत्यंत पतला सूत भी मेरे पास पहुंचाया जा सका, तो मैं स्वतंत्र हो जाऊंगा और क्या इतना-सा काम तुम नहीं कर सकोगी?

उसकी पत्नी ने बहुत सोचा, लेकिन उस ऊंची मीनार पर रेशम का पतला सूत भी पहुंचाने का कोई उपाय उसकी समझ में नहीं आया. उसने एक फकीर को पूछा. फकीर ने कहा, ‘भृंग नाम के कीड़े को पकड़ो. उसके पैर में रेशम के धागे को बांध दो और उसकी मूछों पर शहद की एक बूंद रखकर उसे मीनार पर, उसका मुंह चोटी की ओर करके छोड़ दो.’

उसी रात्रि यह किया गया. वह कीड़ा सामने मधु की गंध पाकर उसे पाने के लोभ में धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा. उसने अंतत: एक लंबी यात्रा पूरी कर ली और उसके साथ रेशम का एक छोर मीनार पर बंद कैदी के हाथ में पहुंच गया. वह रेशम का पतला धागा उसकी मुक्ति और जीवन बन गया. क्योंकि, उससे फिर सूत का धागा बांधकर ऊपर पहुंचाया गया, फिर सूत के धागे से डोरी पहुंच गई और फिर डोरी से मोटा रस्सा पहुंच गया और रस्से के सहारे वह कैद के बाहर हो गया.

इसलिए, मैं कहता हूं कि सूर्य तक पहुंचने के लिये प्रकाश की एक किरण भी बहुत है. और वह किरण किसी को पहुंचानी भी नहीं है. वह प्रत्येक के पास है. जो उस किरण को खोज लेते हैं, वे सूर्य को भी पा लेते हैं.

मनुष्य के भीतर जो जीवन है, वह अमृत्व की किरण है- जो बोध है, वह बुद्धत्व की बूंद है और जो आनंद है, वह सच्चिदानंद की झलक है.

ओशो के पत्रों के संकलन ‘पथ के प्रदीप’ से. प्रस्तुति – ओशो शैलेन्द्र.

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बाँस की तरह बनो : Be Like the Bamboos

ज़ेन गुरु जंगल की पथरीली ढलान पर अपने एक शिष्य के साथ कहीं जा रहे थे. शिष्य का पैर फिसल गया और वह लुढ़कने लगा. वह ढलान के किनारे से खाई में गिर ही जाता लेकिन उसके हाथ में बांस का एक छोटा वृक्ष आ गया और उसने उसे मजबूती से पकड़ लिया. बांस पूरी तरह से मुड़ गया लेकिन न तो जमीन से उखड़ा और न ही टूटा. शिष्य ने उसे मजबूती से थाम रखा था और ढलान पर से गुरु ने भी मदद का हाथ बढाया. वह सकुशल पुनः मार्ग पर आ गया.

आगे बढ़ते समय गुरु ने शिष्य से पूछा, “तुमने देखा, गिरते समय तुमने बांस को पकड़ लिया था. वह बांस पूरा मुड़ गया लेकिन फिर भी उसने तुम्हें सहारा दिया और तुम बच गए.”

‘हाँ”, शिष्य ने कहा.

गुरु ने बांस के एक वृक्ष को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा और कहा, “बांस की भांति बनो”. फिर उन्होंने बांस को छोड़ दिया और वह लचककर अपनी जगह लौट गया.

“बलशाली हवाएं बांसों के झुरमुट को पछाडती हैं लेकिन यह आगे-पीछे डोलता हुआ मजबूती से धरती में जमा रहता है और सूर्य की ओर बढ़ता है. वही इसका लक्ष्य है, वही इसकी गति है. इसमें ही उसकी मुक्ति है. तुम्हें भी जीवन में कई बार लगा होगा कि तुम अब टूटे, तब टूटे. ऐसे कई अवसर आये होंगे जब तुम्हें यह लगने लगा होगा कि अब तुम एक कदम भी आगे नहीं जा सकते… अब जीना व्यर्थ है”.

“जी, ऐसा कई बार हुआ है”, शिष्य बोला.

“ऐसा तुम्हें फिर कभी लगे तो इस बांस की भांति पूरा झुक जाना, लेकिन टूटना नहीं. यह हर तनाव को झेल जाता है, बल्कि यह उसे स्वयं में अवशोषित कर लेता है और उसकी शक्ति का संचार करके पुनः अपनी मूल अवस्था पर लौट जाता है.”

“जीवन को भी इतना ही लचीला होना चाहिए.”

(~_~)

A Zen Master was walking through the forest with one of his students down a narrow trail, along a steep incline. The student lost his footing and slipped, just as he began falling down the hill the student reached out and grabbed a small bamboo tree. The bamboo bent nearly all the way over as the student continued to hold on tightly. He pulled himself up and brushed himself off with the Zen Masters help.

“Did you notice that when you fell, you grabbed a hold of the bamboo and it bent nearly all the way over and still supported you.” The Zen Master asked.

“Yes,” the student replied. The Zen Master gripped the bamboo and pulled the bamboo over.

“Be like the bamboo,” The Zen Master said as he let go of the bamboo and it sprang back to its up-right position. “It is pushed around by the wind and yet it always bounces back and grows upward, toward the sun, enlightenment. Have you ever felt as though you were going to snap. Have you ever felt as though you were at your breaking point, emotionally?”

“Yes,” the student replied.

“Then bend, do not break, such is the way with bamboo. It endures the stress and finds away to bounce back!” The Zen Master stated. “This is called resilience.”

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ज़िंदगी को मुश्किल बनानेवाले 7 अचेतन विचार

हम लोगों में से बहुत से जन अपने मन में चल रहे फालतू के या अतार्किक विचारों से परेशान रहते हैं जिसका हमारे दैनिक जीवन और कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. ये विचार सफल व्यक्ति को असफल व्यक्ति से अलग करते हैं. ये प्रेम को नफ़रत से और युद्ध को शांति से पृथक करते हैं… ये विचार सभी क्लेशों और युद्दों की जड़ हैं क्योंकि अचेतन एवं अतार्किक विचारधारा ही सभी युद्धों को जन्म देती है.

इस पोस्ट में मैं ऐसे 7 अतार्किक व अचेतन विचारों पर कुछ दृष्टि डालूँगा और आशा करता हूँ कि आपको इस विवेचन से लाभ होगा (यदि आप इनसे ग्रस्त हों, तो:)

1. यदि कोई मेरी आलोचना कर रहा है तो मुझमें अवश्य कोई दोष होगा.

लोग एक-दूसरे की अनेक कारणों से आलोचना करते हैं. यदि कोई आपकी आलोचना कर रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपमें वाकई कोई दोष या कमी है. आलोचना का एक पक्ष यह भी हो सकता है कि आपके आलोचक आपसे कुछ भिन्न विचार रखते हों. यदि ऐसा है तो यह भी संभव है कि उनके विचार वाकई बेहतर और शानदार हों.  यह तो आपको मानना ही पड़ेगा कि बिना किसी मत-वैभिन्य के यह दुनिया बड़ी अजीब जगह बन जायेगी.

2. मुझे अपनी ख़ुशी के लिए अपने शुभचिंतकों की सुझाई राह पर चलना चाहिए.

बहुत से लोगों को जीवन में कभी-न-कभी ऐसा विचार आता है हांलांकि यह विचार तब घातक बन जाता है जब यह मन के सुप्त कोनों में जाकर अटक जाता है और विचलित करता रहता है. यह तय है कि आप हर किसी को हर समय खुश नहीं कर सकते इसलिए ऐसा करने का प्रयास करने में कोई सार नहीं है. यदि आप खुश रहते हों या खुश रहना चाहते हों तो अपने ही दिल की सुनें. दूसरों के हिसाब से ज़िंदगी जीने में कोई तुक नहीं है पर आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आपके क्रियाकलापों से किसी को कष्ट न हो. दूसरों की बातों पर ध्यान देना अच्छी बात है पर उन्हें खुश और संतुष्ट करने के लिए यदि आप हद से ज्यादा प्रयास करेंगे तो आपको ही तकलीफ होगी.

3. यदि मुझे किसी काम को कर लेने में यकीन नहीं होगा तो मैं उसे शुरू ही नहीं करूंगा.

इस विचार से भी बहुत से लोग ग्रस्त दिखते हैं. जीवन में नई चीज़ें करते रहना बढ़ने और विकसित होने का सबसे आजमाया हुआ तरीका है. इससे व्यक्ति को न केवल दूसरों के बारे में बल्कि स्वयं को भी जानने का अवसर मिलता है. हर आदमी हर काम में माहिर नहीं हो सकता पर इसका मतलब यह नहीं है कि आपको केवल वही काम हाथ में लेने चाहिए जो आप पहले कभी कर चुके हैं. वैसे भी, आपने हर काम कभी-न-कभी तो पहली बार किया ही था.

4. यदि मेरी जिंदगी मेरे मुताबिक नहीं चली तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है.

मैं कुछ कहूं? सारी गलती आपकी है. इससे आप बुरे शख्स नहीं बन जाते और इससे यह भी साबित नहीं होता कि आप असफल व्यक्ति हैं. आपका अपने विचारों पर नियंत्रण है इसलिए अपने कर्मों के लिए भी आप ही जवाबदेह हैं. आपके विचार और कर्म ही आपके जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं. यदि आप अपने जीवन में चल रही गड़बड़ियों के लिए दूसरों को उत्तरदायी ठहराएंगे तो मैं यह समझूंगा कि आपका जीवन वाकई दूसरों के हाथों में ही था. उनके हाथों से अपना जीवन वापस ले लें और अपने विचारों एवं कर्मों के प्रति जवाबदेह बनें.

5. मैं सभी लोगों से कमतर हूँ.

ऐसा आपको लगता है पर यह सच नहीं है. आपमें वे काबिलियत हैं जिन्हें कोई छू भी नहीं सकता और दूसरों में वे योग्यताएं हैं जिन्हें आप नहीं पा सकते. ये दोनों ही बातें सच हैं. अपनी शक्तियों और योग्यताओं को पहचानने से आपमें आत्मविश्वास आएगा और दूसरों की सामर्थ्य और कुशलताओं को पहचानने से उनके भीतर आत्मविश्वास जगेगा. आप किसी से भी कमतर नहीं हैं पर ऐसे बहुत से काम हो सकते हैं जिन्हें दूसरे लोग वाकई कई कारणों से आपसे बेहतर कर सकते हों इसलिए अपने दिल को छोटा न करें और स्वयं को विकसित करने के लिए सदैव प्रयासरत रहें.

6. मुझमें ज़रूर कोई कमी होगी तभी मुझे ठुकरा दिया गया.

यह किसी बात का हद से ज्यादा सामान्यीकरण कर देने जैसा है और ऐसा उन लोगों के साथ अक्सर होता है जो किसी के साथ प्रेम-संबंध बनाना चाहते हैं. एक या दो बार ऐसा हो जाता है तो उन्हें लगने लगता है कि ऐसा हमेशा होता रहेगा और उन्हें कभी सच्चा प्यार नहीं मिल पायेगा. प्यार के मसले में लोग सामनेवाले को कई कारणों से ठुकरा देते हैं और ऐसा हर कोई करता है. इससे यह साबित नहीं होता कि आप प्यार के लायक नहीं हैं बल्कि यह कि आपका उस व्यक्ति के विचारों या उम्मीदों से मेल नहीं बैठता, बस इतना ही.

7. यदि मैं खुश रहूँगा तो मेरी खुशियों को नज़र लग जायेगी.

यह बहुत ही बेवकूफी भरी बात है. आपकी ज़िंदगी को भी खुशियों की दरकार है. आपका अतीत बीत चुका है. यदि आपके अतीत के काले साए अभी भी आपकी खुशियों के आड़े आ रहे हों तो आपको इस बारे में किसी अनुभवी और ज्ञानी व्यक्ति से खुलकर बात करनी चाहिए. अपने वर्तमान और भविष्य को अतीत की कालिख से दूर रखें अन्यथा आपका भावी जीवन उनसे दूषित हो जाएगा और आप कभी भी खुश नहीं रह पायेंगे. कोई भी व्यक्ति किसी की खुशियों को नज़र नहीं लगा सकता.

इन अचेतन विचारों से कैसे उबरें?

यह बहुत आसान है. जब भी आपके मन में कोई अचेतन या अतार्किक विचार आये तो आप उसे लपक लें और अपनी विचार प्रक्रिया का अन्वेषण करते हुए उसमें कुछ मामूली फेरबदल कर दें… कुछ इस तरह:

सोचिये कि आप किसी शानदार दिन अपनी प्रिय शर्ट पहनकर जा रहे हैं और एक चिड़िया ने उसपर बीट कर दी. ऐसे में आप सोचेंगे:

“ये @#$% हमेशा मेरे साथ ही क्यों होता है!?”
इसकी जगह आप यह कहें…
“अरे यार… अब तो इस शर्ट को धोना पड़ेगा.”

अपनी बातों में “हमेशा” को खोजें, जो कि अमूमन सही जगह प्रयुक्त नहीं होता. यदि वाकई आपके ऊपर चिड़ियाँ “हमेशा” बीट करतीं रहतीं तो कल्पना कीजिये आप कैसे दिखते. अबसे आप इस तरह की बातें करने से परहेज़ करें. एक और उदाहरण:

“मैं हमेशा ही बारिश में फंस जाता हूँ”… (यदि यह सच होता तो आप इंसान नहीं बल्कि मछली होते).

“मैं/मुझे… कभी नहीं…”{ उदाहरण: “मुझे पार्किंग की जगह कभी नहीं मिलती”… (यदि यह सच होता तो आप अपनी गाड़ी के भीतर ही कैद सुबह से शाम तक घूमते रहते).

“मैं… नहीं कर सकता” {उदाहरण: “मैं दो मील भी पैदल नहीं चल सकता”… (कभी कोशिश की?).

“मुझसे… करते नहीं बनता” {उदाहरण: “मुझसे कई लोगों के सामने बोलते नहीं बनता”… (ऐसा आप अपने परिजनों/दोस्तों याने कई लोगों के सामने ही बोलते हैं).

“कितनी बुरी बात है कि… {उदाहरण: “कितनी बुरी बात है कि सुबह से बारिश हो रही है”… (छोड़िये भी, इतनी भी बुरी बात नहीं है).

इसी तरह के और भी अचेतन व अतार्किक विचार हो सकते हैं जिनकी हमें पहचान करनी है और समय रहते ही उन्हें सकारात्मक विचार से बदल देना है. मुझे आशा है कि इस पोस्ट से आपको अपने जीवन में बदलाव/रूपांतरण लाने के कुछ सूत्र अवश्य मिले होगे. कोई भी बदलाव सहज नहीं होता बल्कि उसके लिए सतत प्रयासरत रहना पड़ता है. यदि पोस्ट में लिखी बातों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने के बाद आप उन्हें अपने जीवन में उतरने का प्रयास करेंगे तो आपको कुछ सफलता ज़रूर मिलगी.

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