ख़ुदी को कर बुलंद इतना…

Erik-Weihenmayer-Blind-adventurer

(यह पोस्ट पाउलो कोएलो के ब्लॉग से लेकर पोस्ट की गयी है) जीवन में हमें सदैव स्थापित मानकों और रूपकों के सहारे ही चलने की आदत हो जाती है. मुझे हैम्बर्ग में एक पाठक मिला जो जीवन के उन्नयन से जुड़ा अपना अनुभव मुझसे बांटना चाहता था. उसने मेरे होटल का पता ढूंढ निकाला और […]