धार्मिकता – भेद से अभेद में छलांग

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मैं ईश्वर भीरु नहीं हूँ. भय ईश्वर तक नहीं ले जाता है. उसे पाने की भूमिका अभय है. मैं किसी अर्थ में श्रद्धालु भी नहीं हूँ. श्रद्धा मात्र अंधी होती है. और अंधापन परम सत्य तक कैसे ले जा सकता है? मैं किसी धर्म का अनुयायी भी नहीं हूँ, क्योंकि धर्म को विशेषणों में बाटना […]

स्व में होना ही दुःख-निरोध है

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रात्रि घनी हो रही है. आकाश में थोड़े से तारे हैं और पश्चिम में खंडित चांद लटका हुआ है. बेला खिली है और उसकी गंध हवा में तैर रही है. मैं एक महिला को द्वार तक छोड़कर वापस लौटा हूं. में उन्हें जानता नहीं हूं. कोई दुख उनके चित्त को घेरे है. उसकी कालिमा उनके […]

सत्य का स्वरूप – Bodhidharma’s Skin, Flesh, Bones and Marrow

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सत्य पर चर्चा चल रही थी कि मैं भी आ गया. सुनता हूं. जो बात कह रहे हैं, वे अध्ययनशील हैं. विभिन्न दर्शनों से परिचित हैं. कितने मत हैं और कितने विचार हैं, सब उन्हें ज्ञात मालूम होते हैं. बुद्धि उनकी भरी हुई है – सत्य से तो नहीं, सत्य के संबंध में औरों ने […]

मोक्ष

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मैं शांति, आनंद और मुक्ति की बातें कर रहा हूं. जीवन की वही केंद्रीय खोज है. वह पूरी न हो तो जीवन व्यर्थ हो जाता है. कल यही कह रहा था कि एक युवक ने पूछा, “क्या सभी को मोक्ष मिल सकता है? और यदि मिल सकता है, तो फिर मिल क्यों नहीं जाता?” एक […]

संयम और संगीत ही साधना है

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सुबह जा चुकी है. धूप गर्म हो रही है और मन छाया में चलने को है. एक वृद्ध अध्यापक आये हें. वर्षों से साधना में लगे हैं. तन सूख कर हड्डी हो गया है. आंखें धूमिल हो गयी हैं और गड्ढों में खो गयी हैं. लगता है कि अपनों ने बहुत सताया है और उस […]

शून्य के लिए ही मेरा आमंत्रण

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एक साधु ने अपने आश्रम के अंत:वासियों को जगत के विराट विद्यालय में अध्ययन के लिए यात्रा को भेजा था. समय पूरा होने पर उनमें से एक को छोड़कर अन्य वापस लौट आये थे. उनके ज्ञानार्जन और उपलब्धियों को देखकर गुरु बहुत प्रसन्न हुआ. वे बहुत कुछ सीख कर वापस लौटे थे. फिर अंत में […]

मनुष्यता : Humanity

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पूर्णिमा है, लेकिन आकाश बादलों से ढका है. मैं राह से आया हूं. एक रेत के ढेर पर कुछ बच्चे खेल रहे थे. उन्होंने रेत के कुछ घर बनाए और उस पर से ही उनके बीच में झगड़ा हो गया था. रेत के घरों पर ही सारे झगड़े होते हैं. वे तो बच्चे ही थे, […]

जगत के रहस्य का ज्ञान ही मुक्ति है

house of cards (2)

एक परिवार में आमंत्रित था. संध्या हुए ही वहां से लौटा हूं. एक मीठी घटना वहां घटी. बहुत बच्चे उस घर में थे. उन्होंने ताश के पत्तों का एक महल बनाया था. मुझे दिखाने ले गये. सुंदर था. मैंने प्रशंसा की. गृहणी बोली, ‘ताश के पत्तों के महल की भी प्रशंसा! जरा सा हवा का […]

स्व-अज्ञान मूर्च्छा है

ignorance

एक पूर्णिमा की रात्रि मधुशाला से कुछ लोग नदी-तट पर नौका विहार को गये थे. उन्होंने एक नौका को खेया. अर्धरात्रि से प्रभात तक वे अथक पतवार चलाते रहे. सुबह सूरज निकला, ठंडी हवाएं बहीं तो उनकी मधु-मूर्च्‍छा टूटने लगी. उन्होंने सोचा कि अब वापस लौटना चाहिए. यह देखने के लिए कि कहां तक चले आये हैं, […]

मन के छिद्र बंद करो

rails morning

रात्रि बीत गई है और खेतों में सुबह का सूरज फैल रहा है. एक छोटा सा नाला अभी-अभी पार हुआ है. गाड़ी की आवाज सुन चांदनी के फूलों से सफेद बगुलों की एक पंक्ति सूरज की ओर उड़ गई है. फिर कुछ हुआ है और गाड़ी रुक गई है. इस निर्जन में उसका रुकना भला […]