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डाली

स्पेन के महान चित्रकार सल्वाडोर डाली (1904-1989)

रेखांकन सबसे ईमानदार कला है. इसमें धोखाधड़ी की गुंजाईश नहीं है. रेखाचित्र या तो अच्छा होता है या बेकार.

परिपूर्णता से मत डरो. यह तुम्हें कभी नसीब नहीं होगी!

मैं किसी शख्स के चेहरे से मेल खाता पोर्ट्रेट नहीं बनाता बल्कि वह शख्स ही बढ़ते-बढ़ते उस पोर्ट्रेट जैसा लगने लगता है.

मैं नशा नहीं करता, मैं खुद ही नशा हूँ.

(चित्रकला में) गलतियाँ तो दैवीय हैं! उन्हें सुधरने की चेष्टा मत करो. उन्हें भली-भांति समझो और न्यायसंगत ठहराओ. तभी तुम उनका परिष्कार कर सकोगे.

किसी नवयौवना के गालों की तुलना गुलाब से करने वाला पहला आदमी कोई कवि ही रहा होगा. और जिसने इसे दोहराया, वह शायद मूर्ख था.

सच्ची और झूठी यादों में वही भेद है जो असली और नकली नगीने में होता है. नकली नगीना बेतरह चमकता है और असली लगता है.

मुझमें और किसी पागल आदमी में यह अंतर है कि पागल आदमी खुद को स्वस्थचित्त मानता है जबकि मैं कहता हूँ कि मैं पागल हूँ!

किसी-किसी दिन तो मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं संतुष्टि के ओवरडोज़ से मर जाऊँगा!

जो व्यक्ति किसी की नक़ल नहीं करना चाहता वह खुद कुछ नहीं रच पाता.

बहुत से लोग उम्र के आठवें दशक में नहीं पहुँच पाते क्योंकि वे चौथे दशक पर ज़रुरत से ज्यादा ठहर जाते हैं.

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जॉर्जो मोरांदी

जॉर्जो मोरांदी (1890 – 1964) महान इतालवी चित्रकार थे। उन्होंने बहुत सीमित रंगों का उपयोग करके असंख्य ‘स्टिल लाइफ़’ चित्र बनाए. उनके चित्रों में एक-सी घरेलू वस्तुओं का फीका संयोजन बहुतायत में दीखता है। उनके बाद के लगभग सभी चित्रकारों पर उनकी शैली का प्रभाव पड़ा है, इसीलिए उन्हें ‘चित्रकारों का चित्रकार’ भी कहते हैं. वे कहते हैं कि…

01 – किसी भी चित्रकार के लिए उसके पूरे जीवनकाल में लगभग आधा दर्ज़न पेंटिंग्स बना लेना पर्याप्त होगा। मेरे लिए भी।

02 – मैं मूलतः एक ही तरह की स्टिल लाइफ़ बनाता हूं जो प्रशांति और निजता की मनोदशाओं का चित्रण करती हैं. मैं इन्हें अन्य सभी मनोदशाओं में श्रेष्ठ मानता हूँ।

03 – गैलीलियो ने हमें यह बताया कि सत्य को अंकित करने की एक और लिपि है जो हमारी लिपि से पृथक है – वर्ग, आयत, त्रिभुज, वृत्त, पिरामिड और अन्य ज्यामितीय आकृतियाँ इसके अक्षर हैं।

04 – यह तय करने में मुझे कई हफ्ते लग जाते हैं कि एक ख़ास रंग के टेबल-क्लॉथ पर कौन सी बोतलों को रखना ठीक रहेगा. इसके बाद कई हफ़्तों तक मैं बोतलों को जमाने के तरीके सोचता रहता हूँ, फिर भी मैं गलतियाँ कर बैठता हूँ. मैं शायद बहुत जल्दबाजी करता हूँ।

(Quotes of Giorgio Morandi – 20th century’s most famous painter of ‘still life’ – in Hindi)

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कला, कलाकार, और रचनात्मकता

कुछ नया नहीं सोच पा रहे? बेहतर विचार नहीं आ रहे? रचनात्मकता से कोसों दूर अनुभव कर रहे हैं? आपके लिए मैं लेकर आया हूँ महान कलाकारों द्वारा कला और रचनात्मकता के सम्बन्ध में कहे गए अप्रतिम कथनों का संकलन. कला क्या है? कला के महान रूप को रचनेवाले कलाकार को क्या प्रेरित करता है? और भी बहुत कुछ:-

“सागरतट पर खड़े होकर लहरों को ताकने से तुम पार नहीं जा सकते”. – रवीन्द्रनाथ टैगोर 

“जब मैं कला के किसी रूप को आंकता हूँ तो मैं उसे ईश्वर की रची किसी वस्तु जैसे फूल या वृक्ष के साथ रखकर देखता हूँ. यदि दोनों में द्वंद्व होता है तो यह कला नहीं है” – मार्क शागाल

“किसी महान कलाकार को एक औसत कलाकार से जो बातें पृथक करतीं हैं वे हैं: पहली – उसकी चैतन्यता और कोमलता; दूसरी – उसकी कल्पना; और तीसरी – उसकी उद्यमिता” – जॉन रस्किन

“कला हमारे जीवन से रोज़मर्रा की धूल को झाड़ देती है”.
“कलाकार एक पात्र है जिसमें हर जगह से भावनाएं आकर गिरतीं है: आकाश से, पृथ्वी से, रद्दी से, गुज़रती हुई आकृति से, मकड़ी के जाले से”.
“मैं हमेशा वही चीज़ें करता हूँ जो मैं नहीं कर सकता. तभी तो मैं उन्हें कर पाता हूँ!”
“बचपन में मैं राफाएल की तरह चित्र बना सकता था लेकिन बच्चे की तरह चित्र बनाना सीखने में मेरी पूरी ज़िंदगी लग गयी”. – पाब्लो पिकासो

“मैं आँखें बंद कर लेता हूँ ताकि देख सकूं”. – पॉल गौगाँ

“यदि मैं इसे शब्दों में कह सकता तो मैं चित्र ही क्यों बनाता? – एडवर्ड हॉपर

“ज़िंदगी बहुत बड़ा कैनवास है और तुम इसपर जितना रंग फेंक सकते हो, फेंक दो!” – डैनी काये

“कला हमें अपनी ओर खींचती है क्योंकि यह हमारे भीतर के रहस्यों को उजागर करती है” – ज्यां लुक गोदार

“हर चीज़ में परिपूर्णता की खोज में जुटे कलाकारों को किसी चीज़ में कुछ नहीं मिलता”. – यूजीन देलाक्रोआ

“किसी भी कलाकार को उसके श्रम का नहीं अपितु उसके अवलोकन का पारिश्रमिक दिया जाता है” – जेम्स व्हिसलर

“मौलिकता की परवाह मत करो! तुम जब चाहो तभी इससे छुटकारा पा सकते हो.” – रॉबर्ट हैनरी

“कलाकार की प्रारंभिक रचनाएँ उसकी रुचियों और अभिवृत्तियों को दर्शाती हैं. इनमें से कुछ तो सुसंगत होतीं है और कुछ में द्वंद्व दिखता है. स्वीकरण और बहिष्करण के साथ आगे बढ़ते हुए कलाकार की निरीक्षण की प्रवृत्तियां स्पष्ट होने लगतीं हैं. उसकी असफलताओं का मोल उसकी सफलता से कमतर नहीं होता: किसी गलत निर्णय पर चलकर वह किसी विषयवस्तु की पुष्टि कर सकता है जबकि कई बार उसे यह पता भी नहीं होता कि वह विषयवस्तु क्या है” – ब्रिजेट रिली

“संग्रहालय में टंगी पेंटिंग को दुनिया में सबसे कठोर टिप्पणियां झेलनी पडतीं हैं”. – अज्ञात

(Quotes on art, artist, and creativity – in Hindi)

 

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