भले आदमी की परछांई : The Shadow of a Noble Man

seeking angelबहुत पुरानी बात है. कहीं एक भला आदमी रहता था जो सभी से असीम प्रेम करता था और सारे जीवों के प्रति उसके ह्रदय में अपार करुणा थी. उसके गुणों से प्रसन्न होकर ईश्वर ने उसके पास अपना देवदूत भेजा.

“ईश्वर ने मुझे आपके पास यह कहने के लिए भेजा है कि वे आपसे बहुत प्रसन्न हैं और आपको कोई दिव्य शक्ति देना चाहते हैं” – देवदूत ने कहा – “क्या आप लोगों को रोगमुक्त करने की शक्ति प्राप्त करना चाहेंगे?”

“बिलकुल नहीं” – भले आदमी ने कहा – “मैं यह चाहूँगा कि ईश्वर स्वयं इस बात का निर्णय करे कि किसे रोगमुक्त किया जाय”.

“तो फिर आप पापियों को सद्मार्ग पर वापस ले आने की शक्ति ग्रहण कर लें”

“यह तो आप जैसे देवदूतों का काम है. मैं नहीं चाहता कि लोग मसीहा जानकर मेरा सम्मान करें या मुझे ऐसे प्रतिमान के रूप में स्थापित कर दिया जाय.”

“आपने तो मुझे संकट में डाल दिया” – देवदूत ने कहा – “आपको कोई शक्ति दिए बिना मैं स्वर्ग नहीं लौट सकता. यदि आप स्वयं कोई शक्ति नहीं लेना चाहेंगे तो मुझे विवश होकर आपके लिए चयन करना पड़ेगा”.

भले आदमी ने कुछ क्षणों के लिए सोचा, फिर कहा :-

“ठीक है, यदि ऐसा है तो मैं चाहता हूँ कि ईश्वर मुझसे जो भी शुभ कर्म करवाना चाहता है वे स्वतः घटित होते जाएँ परन्तु उनमें मेरा हाथ होने का पता किसी को भी नहीं चले, मुझे भी नहीं, ताकि स्वयं को ऐसी क्षमता से युक्त जानकार मुझमें कभी अहंकार न उपजे”.

“ऐसा ही हो” – देवदूत ने कहा. उसने भले आदमी की परछाईं को रोगमुक्त करने की दिव्य शक्ति से संपन्न कर दिया परन्तु केवल उसी समयकाल के लिए जब उसके चेहरे पर सूर्य की किरणें पड़ रहीं हों. इस प्रकार, वह भला आदमी जहाँ कहीं भी गया वहां लोग रोगमुक्त हो गए, बंजर धरती में फूल खिल उठे, और दुखियों के जीवन में वसंत आ गया.

अपनी दिव्य शक्तियों से अनभिज्ञ वह भला आदमी सालों तक दूरदेशों की यात्रायें करता रहा. उसके पीछे सदैव चल रही उसकी परछाईं ईश्वरीय इच्छा को पूर्ण करती रही. उसे जीवनपर्यंत इसका बोध नहीं हुआ कि वह परमेश्वर के कितना करीब था.

(पाउलो कोएलो के ब्लॉग से)

(A story on goodness of a man – Paolo Coelho – in Hindi)

(~_~)

Many years ago, there lived a man who was capable of loving and forgiving everyone he came across. Because of this, God sent an angel to talk to him.

‘God asked me to come and visit you and tell you that he wishes to reward you for your goodness,’ said the angel. ‘You may have any gift you wish for. Would you like the gift of healing?’

‘Certainly not,’ said the man. ‘I would prefer God to choose those who should be healed.’

‘And what about leading sinners back to the path of Truth?’

‘That’s a job for angels like you. I don’t want to be venerated by anyone or to serve as a permanent example.’

‘Look, I can’t go back to Heaven without having given you a miracle. If you don’t choose, I’ll have to choose one for you.’

The man thought for a moment and then said:

‘All right, I would like good to be done through me, but without anyone noticing, not even me, in case I should commit the sin of vanity.’

So the angel arranged for the man’s shadow to have the power of healing, but only when the sun was shining on the man’s face. In this way, wherever he went, the sick were healed, the earth grew fertile again, and sad people rediscovered happiness.

The man traveled the Earth for many years, oblivious of the miracles he was working because when he was facing the sun, his shadow was always behind him. In this way, he was able to live and die unaware of his own holiness.

जिंदगी की U ट्यूब

sanjay sinhaसंजय सिन्हा पेशे से पत्रकार हैं और दिल्ली में रहते हैं. फेसुबक पर उनके लंबे स्टेटस जिंदगी और उससे जुड़े मसलों पर संजीदगी से सोचने को मजबूर करते हैं. उन्हें पढ़ने पर यह अहसास गहरा होता है कि अपनी तमाम दुश्वारियों और लाचारियों के बावजूद हमारी ज़िंदगी और ये दुनिया यकीनन बहुत सुंदर है. प्यार, पैसा और हर तरह की ऊंच-नीच के दुनियावी मसले सदा से कायम हैं और कायम रहेंगे… ज़िंदगी और वक्त ऐसी शै हैं जिनपर आप ऐतबार नहीं कर सकते… न जाने कब ये मुठ्ठी में बंद रेत की मानिंद बिखर जाएं. इसलिए अपनी अच्छाइयों को बरक़रार रखकर छोटे-छोटे लम्हों से खुशी चुराने की बात कहते हुए संजय अपने अनुभवों को साफ़गोई से बहुत रोचक अंदाज़ में बयां करते हैं. इन्हें पढ़कर आपको यकीनन बहुत अच्छा लगेगा.


alice popkorn photo

इस संसार में बहुत से लोग ईश्वर को मानते हैं. बहुत से लोग नहीं मानते. बहुत से लोग कहते हैं उन्हें नहीं पता. बहुत से लोग आधा मानते हैं, आधा नहीं मानते. बहुत से लोग सिर्फ इतना मानते हैं कि ईश्वर नहीं है लेकिन कोई शक्ति है.

मैं ईश्वर के बारे में कुछ भी कह पाने वाला कोई नहीं हूं. मैंने ईश्वर को नहीं देखा है, फिर भी बहुत से लोगों की इस दुविधा पर मैं अपनी एक राय रखना चाहता हूं. ये राय मैं उन लोगों के लिए रखना चाहता हूं, जो ईश्वर पर सिर्फ इसलिए यकीन नहीं करना चाहते क्योंकि वो उसकी पूजा करते हैं, उसकी उपासना करते हैं, मगर वो उन्हें अपनी मौजूदगी का अहसास नहीं कराता. ये राय मैं उन लोगों के लिए लिखना चाहता हूं जिन्हें अच्छे कर्मों के बदले अच्छा मिलने और बुरे कर्मों के बदले बुरा मिलने वाली बात पर संदेह है. यकीनन जो लोग ऐसा सोचते हैं, उनके पास अपने अनुभव भी होंगे. आप में से तमाम लोगों ने कभी अच्छे काम किए होंगे, कोई पुण्य किया होगा फिर भी आपको उसके बदले में बुराई मिली. आपके पास तमाम वे उदाहरण भी होंगे ही जिनमें आपके जानने वाले ने कोई गलत काम किया, पाप किया पर उसकी ज़िंदगी में अच्छा ही अच्छा होता चला गया. ऐसे उदाहरण अक्सर हमें गुमराह करते हैं.

ऐसे उदाहरण हमें ये मानने को मजबूर करते हैं कि इस बात की गारंटी नहीं है कि पाप करने का अंजाम बुरा होगा और पुण्य करने के बदले में भला होगा.

मैं कहता हूं कि इस बात की गारंटी है. आप जो कर्म करेंगे उसका प्रतिफल वैसा ही मिलेगा. और सिर्फ समझाने के लिए मैं आपके सामने एक उदाहरण पेश करने जा रहा हूं, जिसे मैंने इक्का-दु्क्का अब तक अपने मित्रों से ही साझा किया था.

आप मान लीजिए जब बच्चा पैदा होता है, उसकी जिंदगी एक यू ट्यूब (U) की तरह होती है. अब U आकार के इस हिस्से में आधा ‘अच्छा’ भरा है और आधा ‘बुरा’. इसे आप चाहें तो आधा पुण्य कह लीजिए और आधा पाप. आप इसे आधा पॉजीटिव कह लीजिए या आधा निगेटिव.

ये अच्छा और बुरा जन्म के साथ जुड़ कर आपके साथ आया है. अब आप जब कोई अच्छा काम करते हैं, तो U आकार के इस ट्यूब के आधे हिस्से में अच्छाई भरे होने वाले छोर से इसके भीतर अच्छाई जाती है. जब उसमें थोड़ी अच्छाई अंदर जाती है तो दूसरी तरफ से उतनी ही बुराई बाहर निकलती है. क्योंकि U ट्यूब पूरी तरह से भरी हुई और उसमें कुछ और भरने की जगह ही नहीं है. इसलिए इसके एक छोर से उसमें अच्छाई भीतर जाने पर  दूसरी तरफ से बुराई बाहर निकल गई.

फिर कभी आपको लगा, हे भगवान! हमने तो भला किया लेकिन हमारे साथ ये बुरा क्यों हो गया?

अब मान लीजिए कि आपने किसी का बुरा कर दिया. आपके U ट्यूब के दूसरे छोर से उसमें बुराई घुसी और दूसरी ओर से लबालब भरी अच्छाई में से थोड़ी सी अच्छाई बाहर निकल गई. आपको लगा, ये हुई न बात! ईश्वर नहीं है. कर्म कुछ नहीं है. देखो मैंने तो पाप किया लेकिन मेरा भला हुआ.

फिर आप लगातार बुरा करते जाते हैं. और अधिक बुराई उस ट्यूब में अंदर जाती रहती है, और अच्छाई बाहर आती रहती है. आप रिश्वत लेते रहते हैं, आप चोरी करते रहते हैं, आप व्यभिचार करते रहते हैं और आपका जीवन लगातार जगमग रोशनी से चमकता रहता है. एक दिन सारी अच्छाई उस ट्यूब से निकल जाती है. इसके बाद उस ट्यूब से जो कुछ भी बाहर निकलता है, वो सिर्फ और सिर्फ बुरा निकलता है. जिस दिन उस यू ट्यूब से सारी अच्छाई निकल जाती है, उस दिन आप चाहे चमचमाती मर्सिडीज़ कार में चलते रहे होंगे, चाहे आप खुद सरकार ही क्यों न हों, एक दिन आपका ही भाई आता है और अपनी बंदूक की सारी गोलियां आपके सीने में उतार देता है.

क्यों? सब कुछ तो इतना अच्छा चल रहा था! आज भाई का दिमाग फिर क्यों गया?

नहीं समझे? अरे भाई, अपने बड़े बुजुर्ग इसी को तो कहते थे कि पाप का घड़ा भर गया.

एक वाकया सुनाता हूं आपको. भोपाल में मेरे घर के टॉयलेट को साफ करने वाली एक महिला, दो वक्त की रोटी को तरसने वाली एक महिला अपने अच्छे कर्म को नहीं छोड़ती. उसे गरीबी मंजूर है, लेकिन गलत काम नहीं. जिस ईश्वर ने उसे कुछ नहीं दिया उस पर उसका इतना भरोसा है कि बिना उसकी तस्वीर को प्रणाम किए वो कोई काम ही नहीं करती. एक दिन बाथरूम में उसे हीरे की एक अंगूठी मिलती है, तो उसे धो कर वापस कर देती है. मैंने उससे पूछा भी कि ‘क्या तुम्हें पता है, ये अंगूठी कितने की होगी?’ उसने कहा ‘दाम तो नहीं पता साहब लेकिन बहुत महंगी होगी. सोना और हीरा तो महंगे ही होते हैं’. मैंने पूछा, ‘तुम्हारे मन में क्या ऐसा नहीं आया कि बाथरूम में गिरी चीज न भी मिले तो कोई तुम पर शक नहीं ही करता. तुम इसे अपने पास ही रख सकती थीं.’ उसने दोनों कानों को हाथ लगाया और कहा, ‘साहब पिछले जन्म की गलतियों के बाद तो आज इस जन्म में ये गरीबी देख रही हूं, अभी भी नहीं चेती तो अगले कई जन्मों का चक्र बिगड़ जाएगा. इस पर कहीं तो रोक लगानी ही होगी.’

मेरे घर के टॉयलेट साफ करने वाली उस महिला को मैंने मन-ही-मन प्रणाम किया. एक दिन वो मेरे ही पास यह कहने के लिए आई कि उसकी बेटी दसवीं में पढ़ती है और मैं उसे कुछ पढ़ा दूं ताकि वो हाई स्कूल ठीक से पास हो जाए. मैं उस लड़की से मिला. मुझे वो मेधावी लगी. मैंने उसे अपने एक शिक्षक के पास भेज दिया.

लड़की प्रथम श्रेणी से पास हुई. फिर उसका परिचय भोपाल में ही एक रूसी अध्ययन संस्थान की अपनी एक टीचर से मैंने करा दिया. ये बात तब की है जब रूस का विघटन नहीं हुआ था. 1987 में उस लड़की ने रूसी भाषा में पढ़ाई शुरू कर दी. फिर उसे सोवियत संघ में कोई स्कॉलरशिप मिली. जिस लड़की ने कभी ट्रेन को नहीं देखा था, वो एक शाम मालवा एक्सप्रेस से भोपाल से दिल्ली आई और दिल्ली से एयरोफ्लोत एयर लाइंस से मॉस्को पहुंची. वहां वह कुछ पढ़ने लगी. मैं जिन दिनों मॉस्को गया था वो मुझसे मिली थी.

फिर सोवियत संघ का विघटन हो गया. वहां पढ़ने के लिए गए बहुत से लोग शराबी-कबाबी बन कर रह गए और अय्याशी करके वापस आ गए. लेकिन वो लड़की वहीं रही. उसने बदलते हुए रूस के साथ खुद को ढाल किया. आज वह मॉस्को में बहुत बड़ा व्यापार समूह संभाल रही है. दुनिया भर की यात्रा करती है. कोई साल भर पहले उसके बारे में पता किया था तो पता चला कि उसकी मां, जो हमारे घर काम करती थी वो बेटी के पास चली गई. कोई बता रहा था कि भोपाल के अरेरा कॉलोनी में उसका बहुत बड़ा बंगला है. दिल्ली-मुंबई में तो है ही. सिंगापुर और पता नहीं कहां-कहां है.

कुछ समझे आप? उस औरत ने अच्छाई का दामन नहीं छोड़ा. उसने पुण्य का दामन नहीं छो़ड़ा. उसने ईश्वर की उंगली नहीं छो़ड़ी. उसके U ट्यूब में एक-एक कर ढेरों पुण्य समाते गए और दूसरी छोर से एक-एक कर सारे पाप निकल गए. जिस दिन सारे पाप निकल गए, U ट्यूब के पास निकालने को सिर्फ ‘गुड’ ‘गुड’ ‘गुड’ ही रह गया.

इसे ही गंवई भाषा में पाप और पुण्य का कुंड कहते हैं. ईश्वर ने भी खुद को किसी आकार में परिभाषित नहीं किया है. अगर गीता को ईश्वर का कथन मान लें तो उसने यही तो कहा है कि मैं तुम-में ही हूं. उसने भी तो कर्म करने की बात ही कही है. यह ईप पर निर्भर करता है कि आप कितने दिनों तक अपने दुख को सहते हुए पुण्य के खाते को बढ़ाना चाहते हैं. आप पर ही यह भी निर्भर करता है कि कितने दिनों तक पाप करते हुए आप अपने पुण्य के बैलेंस को खत्म करके दुख को बार-बार झेलना चाहते हैं.

ये मत भूलिए कि सबकी मंजिल एक है. अज्ञानी अंधविश्वास के सहारे वहां पहुंचते हैं और ज्ञानी तर्क के सहारे. जो बच्चे सुबह सुबह अपने मम्मी-पापा को, दादा-दादी को, नाना-नानी को गुड मॉर्निंग कहते हैं वो उनके ज्यादा प्यारे तो होते ही हैं, जो बच्चे सुबह उठ कर अपने मां-बाप को, सास-ससुर को कोसते हैं उन्हें तो वो भी कोसेंगे ही. फिर आप ईश्वर की पूजा कर ही लेंगे तो क्या नुकसान है? ईश्वर हो या न हो, लेकिन आपके जुड़े हुए हाथ, मुंह से निकले ‘थैंक यू’ के दो शब्द किसी को बुरे नहीं लगते, फिर मूर्ति को वे क्यों बुरे लगेंगे?

मैं फिर दुहरा रहा हूं… ईश्वर है या नहीं ये मैं नहीं जानता. लेकिन आपके कर्मों का फल आपके ही सामने होगा इसमें आप संदेह मत कीजिएगा. आपके कम्यूटर में वायरस होगा, आपके कम्यूटर का प्रोसेसर सुस्त होगा, लेकिन उसका कम्यूटर बहुत शानदार है. मर्जी आपकी. अगर कण कण में भगवान है तो मैं किसी भी कण को नहीं छोड़ना चाहता, ना मूरत वाले कण को, ना सूरत वाले कण को. मैं भी अपने घर के टॉयलेट को साफ करने वाली उस महिला की तरह अभी ही चेत कर अपने पिछले जन्मों और इस जन्म में किए सारे पापों के चक्र को पूरा कर मुक्त होना चाहता हूं. क्या पता मेरे लिए भी एक मॉस्को, ऊपर ही सही, मेरा इंतजार कर रहा हो.

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ईश्वर के दस आदेश : Ten Commandments

alice-popkorn-photo.jpgकई शताब्दी पहले, ईश्वर ने पृथ्वी पर आकर जर्मन लोगों से कहा, “मैंने मनुष्यों के लिए कुछ आदेश बनाए हैं जिनके पालन से सबका भला होगा.”

जर्मन लोगों ने पूछा, “कैसे आदेश?”

ईश्वर ने कहा, “जीवन जीने के नियम.”

“आप कोई नियम बताइए?”

ईश्वर ने कहा, “तुम किसी की हत्या नहीं करोगे.”

“कोई हत्या नहीं? माफ कीजिए, हमें ऐसे नियम नहीं चाहिए.”

तब ईश्वर इटली के लोगों के पास गया और बोला, “मैंने कुछ आदेश बनाए हैं…”.

इटलीवालों ने भी उदाहरण के लिए कोई आदेश सुनना चाहा. ईश्वर ने कहा, “तुम चोरी नहीं करोगे.”

“चोरी नहीं करेंगे? नही, हमें ऐसे आदेशों में कोई रूचि नहीं है.”

फिर ईश्वर ने फ्रांसीसियों को भी आदेशों के बारे में बताया.

फ्रांसीसियों ने भी कोई एक आदेश सुनाने के लिए कहा. ईश्वर बोले, “तुम अपने पड़ोसी की पत्नी पर बुरी नज़र नहीं डालोगे.”

फ्रांसीसियों ने भी ऐसा आदेश सुनकर उन्हें ग्रहण करने से इंकार कर दिया.

अंत में ईश्वर ने यहूदियों को आदेशों के बारे में बताया.

“आदेश?”, यहूदियों ने कहा, “ये कितने के हैं?”

“ये तो मुफ्त हैं”, ईश्वर ने कहा.

“तो हमें दस दे दो.”

(~_~)

Centuries ago, God came down, went to the Germans and said, “I have Commandments that will help you live better lives.”

The Germans ask, “What are Commandments?”

And the Lord says, “Rules for living.”

“Can you give us an example?”

God says, “Thou shalt not kill.”

“Not kill? We’re not interested.”

So God went to the Italians and said, “I have Commandments…”

The Italians wanted an example and the Lord said, “Thou shalt not steal.”

“Not steal? We’re not interested.”

Next the Lord went to the French saying, “I have Commandments…”

The French wanted an example and the Lord said, “Thou shalt not covet thy neighbor’s wife.”

And the French were not interested.

God then went to the Jews and said, “I have Commandments…”

“Commandments,” said the Jews, “How much are they?”

“They’re free.”

“We’ll take 10.”

जंगल में नास्तिक : An Atheist in Jungle

lion.jpgअफ़्रीका के जंगलों से गुज़रते समय एक नास्तिक वैज्ञानिक विकासवाद के कारण अस्तित्व में आए प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना करता जा रहा था.

“कितने सुंदर विराट वृक्ष! कितनी वेगवती नदियां! कितने सुंदर प्राणी! और यह सब किसी के हस्तक्षेप के बिना अपने आप ही घटित हो गया! दुनिया में केवल अज्ञानी और कायर ही हैं जो किसी अज्ञात शक्ति के भय से ग्रस्त होकर चमत्कारिक ब्रह्मांड के अस्तित्व का श्रेय नाहक ही ईश्वर को देते हैं.”

तभी उसके पीछे झाड़ियों में कुछ आहट हुई. एक शेर नास्तिक पर झपटा. उसने भागने की कोशिश की लेकिन शेर ने उसे चित कर दिया.

जब कोई राह न सूझी, नास्तिक के मुंह से निकल पड़ा, “भगवान बचाओ!”

और एक चमत्कार हुआ: सब कुछ थम गया. वातावरण में दिव्य प्रकाश व्याप्त हो गया और एक आवाज़ आई:

“तुम क्या चाहते हो? इतने वर्षों तक तुम मेरे अस्तित्व को नकारते रहे और दूसरों को भी यह समझाते रहे कि ईश्वर का कोई वजूद नहीं है. तुमने मेरी रची दुनिया को महज़ “घटनाओं का संयोग” कहा.

नास्तिक को अचरज में कुछ न सूझा, वह बोला:

“सिर्फ इसलिए कि मैं अगले ही पल मरनेवाला हूं, मैं पाखंड का आश्रय नहीं लूंगा. मैं पूरी ज़िंदगी यही सिद्ध करता रहा हूं कि तुम्हारा कोई अस्तित्व नहीं है.”

“अच्छा, तो अब तुम मुझसे क्या चाहते हो?”

नास्तिक ने एक पल को विचार किया. वह जानता था कि अब किसी संवाद की गुंजाइश नहीं थी. अंततः उसने कहा:

“मैं नहीं बदल सकता लेकिन यह शेर तो बदल सकता है. तुम इस खूंखार भयानक शेर को आस्थावान ईसाई बना दो!”

उसी क्षण दिव्य प्रकाश लुप्त हो गया. जंगल में चिड़ियों की चहचहाहट फिर से सुनाई देनी लगी. शेर नास्तिक के ऊपर से उतर गया. उसने श्रृद्धा से अपना सर झुकाया, और नम्रतापूर्वक बोला:

“हे ईश्वर, मेरी भूख मिटाने के लिए तूने अपार उदारता दिखाई और मुझे यह भोजन सौंपा. तुझे लाख-लाख धन्यवाद प्रभु…”

(~_~)

An atheist is going through a forest in Africa, filled with admiration for everything created by that “accident of evolution”.
“But what majestic trees! What powerful rivers! What beautiful animals! And all this happened by chance, without anyone interfering! Only the weak and ignorant, afraid they cannot explain their own lives and the universe, feel the need to attribute all these marvels to a superior entity!”
There is a noise in the bushes behind him; a lion is about to pounce on him. He tries to flee, but the animal knocks him over.
With nothing else to lose, he shouts out: “My God!”
And a miracle happens: time stops, the atmosphere is drenched in a strange light, and a voice is heard:
“What do you want? You have denied my existence for all these years, you have taught others that I do not exist, and you reduced Creation to a “cosmic accident”.
Quite confused, the man exclaims:
“It would be hypocritical of me to change my mind just because I am about to die. All my life I have preached that You do not exist.”
“So, what do you expect me to do?”
The atheist reflected for a moment, knowing that the discussion could not last forever. Finally he says:
“I can’t change, but the lion can. So, I ask the Lord to change this wild, murderous beast into a Christian animal!”
Right there and then, the light disappears, the birds in the forest renew their singing, and the river begins to flow again. T
The lion climbs off the man, pauses, lowers its head, and says very earnestly:
“Lord, I am ever so grateful for Your generosity, for this food that I am about to eat…”

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वैज्ञानिक और ईश्वर : A Scientist Meets God

cornelia-kopp-photography.jpgएक वैज्ञानिक ने ईश्वर को खोज लिया और उससे कहा, “ईश्वर, हमें अब तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है. विज्ञान ने इतनी उन्नति कर ली है कि अब हम जीवन के किसी भी रूप की रचना कर सकते हैं. आदिकाल में तुमने जो किया वह हम अब करके दिखा सकते हैं.”

“अच्छा! बताओ तुम क्या कर सकते हो?”, ईश्वर ने पूछा.

वैज्ञानिक ने कहा, “हम मिट्टी से जीवन के विविध रूपों की रचना कर सकते हैं. हम इसे तुम्हारी आकृति में ढालकर इसमें प्राण फूंक सकते हैं. हम पुरुष, स्त्री और जीवन के हर उस रूप की रचना कर सकते हैं जो कभी अस्तित्व में रहा हो.”

“वाह! यह तो बहुत अच्छी बात है”, ईश्वर ने कहा, “मुझे दिखाओ तुम ऐसा कैसे करते हो”.

वैज्ञानिक नीचे झुकता है और अपनी परखनली में थोड़ी सी मिट्टी भरता है…

“रूको! ज़रा ठहरो!”, ईश्वर ने उसे टोकते हुए कहा, “वह तो मेरी मिट्टी है! तुम अपनी मिट्टी से यह काम करो!”

(~_~)

A scientist one day discovered the God and said to Him, “God, we don’t need you any more. Science has finally figured out a way to create life out of nothing – in other words, we can now do what you did in the beginning.

“Oh, is that so? Tell Me…” replies God.

“Well,” says the scientist, “we can take dirt and create life forms from it. We can make it into the likeness of you and breathe life into it. We are able to create man, woman or any living thing that ever existed.”

“Well, that’s very interesting…show Me how you do it.”

So the scientist bends down to the ground and picks up some dirt in his his test tube…

“No, no, no…” interrupts God, “That’s the dirt I created! Get your own dirt.”

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