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नया साल – नये संकल्प

हर साल जनवरी आते ही बहुतेरे जन अति उत्साह में आ जाते हैं. कोई अपने लिए नए संकल्प (रिजोल्यूशंस) की लिस्ट बनाता है तो कोई खुद में बदलाव लाने के लिए किसी जिम या क्लास की सदस्यता ले लेता है. नया साल लोगों में एक अजीब सी उर्जा भर देता है.

बहुत कुछ बेहतरीन करने की चाह में जिस बात की ओर हमारा ध्यान नहीं जाता वह यह है कि अपनी ज़िंदगी में कुछ नया जोड़ने के लिए हम कुछ जगह बनाने की बजाय उसे नयी चीज़ों से लाद देते हैं.

नए साल की शुरुआत अपनी ऊर्जा का नवीनीकरण करने और कुछ पुरानी इच्छाओं और संकल्पों को पूरा करने का बढ़िया मौका है – स्वास्थ्य, परिवेश में व्यवस्था, कोई नया और सुरुचिपूर्ण काम, आर्थिक नियोजन, और ऐसे ही बहुत से मोर्चों पर लोग कुछ-न-कुछ नया करने का सोच-विचार करते हैं. नया साल ज़िंदगी को बुहारने-चमकाने का बेहतरीन बहाना है. यह ज़िंदगी की किताब का कोरा सफा पन्ना या चैप्टर है जिसपर अगले 12 महीने, या 52 सप्ताह, या 365 दिनों में बहुत कुछ लिखा जाना है.

ऐसे में, जबकि हर शख्स ने अपने लिए कम या ज्यादा कुछ सोचा हो, या न भी सोचा हो, मैं यह बताने जा रहा हूँ कि मैंने अपने लिए क्या सोचा है:

* मैं अपने पिछले साल का आकलन करूंगा. मैंने कहाँ-कहाँ गलतियाँ की, और उनसे मैंने कुछ सीखा भी या नहीं. मैंने क्या खोया, क्या पाया.

* अपने शेड्यूल को मैं यथासंभव सहज बनाऊंगा. इसके लिए मुझे दूसरों को ‘ना’ कहना सीखना ही पड़ेगा.

* पुरानी और आधी-अधूरी योजनाओं को समेट लूँगा और लोगों से अनिच्छुक होते हुए भी वादे नहीं करूंगा. इस तरह मेरे कामकाज का माहौल कुछ सिलसिलेवार और सहज हो जाएगा.

* अपने स्वास्थ्य और खानपान में बदलाव लाने के लिए नियत किये गए पुरानी योजनाओं का पुनरावलोकन करूंगा ताकि मुझे कुछ नयी चीज़ें आजमाने का मौका मिले.

* अपने इनबॉक्स को खंगालूँगा. यदि मैंने किसी ईमेल का जवाब हाल में नहीं दिया है तो शायद जवाब देना गैरज़रूरी होगा. इस मेल को आर्काइव करके दूसरी मेल्स पर तवज्जोह दूंगा ताकि इनबॉक्स कुछ व्यवस्थित हो जाए. ऐसा ही कुछ सोशल नेट्वर्किंग के साथ करना भी ठीक रहेगा. जिन वेबसाइट्स से मैं बस यूंही जुड़ गया था उनसे अपने प्रोफाइल हटा लूँगा. दस जगह अपनी मौजूदगी बनाए रखने की बजाय एक-दो जगह नियमित रहना ही सही रहेगा.

* कम्प्यूटर की फाइलें भी व्यवस्थित करूगा. जिन फाइलों को मैंने बहुत लंबे अरसे से नहीं छुआ है उन्हें डिलीट करने के बारे में सोचूंगा. यदि डिलीट करना सही न हो तो उन्हें किसी पोर्टेबल हार्ड ड्राइव या क्लाउड में सहेज दूंगा.

* कागज़ के उपयोग में कटौती करूंगा. अब मैंने कागज़ का इस्तेमाल पहले से बहुत कम कर दिया है. धीरे-धीरे सब कुछ डिजिटल होता जा रहा है. डाक-सामग्री को प्राप्ति के समय ही सहेजने या ठिकाने लगाने के बारे में तय कर लूँगा अन्यथा वह टेबल पर कई दिनों तक धूल खाती रहेगी.

* अनावश्यक चीज़ों से छुटकारा पाऊंगा. कमरे के जो कोने अस्त-व्यस्त लगेंगे उन्हें देर किये बिना जमा दूंगा. जिन चीज़ों की मुझे ज़रुरत नहीं है उन्हें किसी को दे दूंगा.

* अपनी आलमारी, दराजें, और फ्रिज को बेकार की चीज़ें से नहीं भरूँगा. पुराने कपड़े, कबाड़, और जंक फ़ूड (यदि हो तो)… सब निकाल बाहर करूंगा. किचन और फ्रिज में सिर्फ वही चीज़ें जायेंगीं जो स्वास्थ्यप्रद हों.

* रोज़मर्रा के काम नियत समय पर ही निबटा दूंगा. बिलों को अंतिम तिथि से पहले ही चुका दूंगा. जिन कामों को लंबे समय से टालता आ रहा हूँ उन्हें वरीयता के अनुसार पूरा कर दूंगा.

* अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनाऊंगा. अपनी आय और बचत पर नज़र बनाए रखूंगा. क्रेडिट/डेबिट कार्ड का उपयोग कम-से-कम करूंगा.

* उन छोटी-छोटी बातों का हमेशा ध्यान रखूंगा जिन्हें नज़रंदाज़ करने पर बाद में बड़ी समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं.

इन सबको करने और साधने में बड़ी मेहनत और दृढ़-संकल्प लगेगा. कुछ चीज़ें बारंबार करने पर भी ध्यान से उतर जायेंगीं. अंततः, यदि मैं इनमें से आधी बातें भी अमल में ला सका तो यह साल मेरे लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा और मैं अधिकाधिक सक्रिय और रचनात्मक बनूँगा.

ईमानदारी से कहूं तो मैं यह सभी चीज़ें साल भर करता ही रहता हूँ, लेकिन नए साल की शुरुआत के साथ इन्हें दोहराने के कई फायदे हैं. सफा-कोरा स्लेट की तरह लगभग पूरा साल आनेवाली घटनाओं का रास्ता जोह रहा है. ऐसे में खुद से किये कुछ वादे-इरादे ताज़िंदगी काम आयेंगे.

लियो बबौटा की यह पोस्ट साल की शुरुआत में ही आ जानी चाहिए थी लेकिन अभी कौन सी देर हो गयी है!

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आदत

एक आदमी बाड़ में कीलें ठोंक रहा था. एक औरत वहां से गुज़री और उसे काम करते देखकर बोली, “यह तुम क्या कर रहे हो? कीलों को उनकी नोक पर नहीं बल्कि चपटे सिरे पर चोट मारकर ठोंकते हैं. क्या तुमने पहले कभी कीलें नहीं ठोंकीं? क्या पी रखी है?”

“मैं यह पहले भी सैकड़ों बार कर चुका हूँ”, उस आदमी ने कहा, “मैं ऐसे ही काम करता हूँ”.

“लेकिन तुम्हारा तरीका तो सरासर गलत है. लाओ, मैं तुम्हें ठीक से यह करके दिखती हूँ”, औरत ने कहा.

“नहीं! मैं अपनी आदत नहीं बदलना चाहता”, आदमी बोला, “मुझे ऐसे ही काम करना पसंद है और मेरे लिए यही सही तरीका है”.

औरत ने देखा कि वह आदमी मजाक नहीं कर रहा था. वह चुपचाप वहां से चली गयी.

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